पुणे, 14 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) संत ज्ञानेेशर और संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है. जेजुरी में नए दो किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी दी गई है. साथ ही पालकी मार्ग पर फलटण तक 6.7 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण को भी मंजूरी प्रदान की गई है. इसके अलावा तोंडले में भी नए फ्लाईओवर निर्माण को मंजूरी दी गई है. हडपसर से दिवे घाट तक का कार्य 60 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है और आगामी दिसंबर तक पूरा कार्य पूर्ण हो जाएगा, यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने पत्रकार-वार्ता में दी. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने गुरुवार (14 मई) को हड़पसर से फलटण तक संत ज्ञानेेशर महाराज पालकी मार्ग का बस से निरीक्षण किया. इसके बाद आयोजित पत्रकार-वार्ता में उन्होंने यह जानकारी दी. गड़करी ने कहा कि जेजुरी में बनाए जाने वाले दो किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के लिए 250 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. पालकी मार्ग पर फलटण तक सड़क निर्माण के लिए 97 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. यह चार लेन सड़क होगी. साथ ही पंढरपुर तक टेंभुर्णी तक के मार्ग को भी मंजूरी दी गई है. तोंडले के फ्लाईओवर के लिए 100 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि संत ज्ञानेेशर महाराज पालकी मार्ग आलंदी से पंढरपुर तक 234 किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय महामार्ग है. यह राष्ट्रीय महामार्ग पुणे, सातारा और सोलापुर इन तीन जिलों को जोड़ता है. लगभग 7625 करोड़ रुपये खर्च कर इस मार्ग का विकास किया गया है. इस मार्ग का कार्य विभिन्न पैकेजों में किया जा रहा है. इसमें मोहोळ से वाखरी, वाखरी से खडूस, खडूस से धर्मपुरी, धर्मपुरी से लोणंद, लोणंद से दिवे घाट और दिवे घाट से हडपसर तक छह पैकेजों में कार्य किया जा रहा है. इनमें से चार पैकेजों का कार्य पूर्ण हो चुका है. धर्मपुरी से लोणंद का कार्य अंतिम चरण में है, जबकि दिवे घाट से हड़पसर तक का लगभग 65 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है. इस मार्ग पर वारकरियों के लिए स्वतंत्र पदयात्रा मार्ग बनाया गया है. दिवे घाट में चार लेन सड़क निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है. संत ज्ञानेेशर पालकी मार्ग को फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज, अंडरपास और अन्य पुलों के माध्यम से विकसित किया जा रहा है. पालकी मार्गों पर लगभग 40 हजार वृक्ष शासन की ओर से लगाए गए हैं. संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग के बारे में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग पाटस से पंढरपुर तक लगभग 130 किलोमीटर लंबा है. यह मार्ग पुणे और सोलापुर जिलों को जोड़ता है. लगभग 4416 करोड़ रुपये खर्च कर इस राष्ट्रीय महामार्ग का विकास तीन पैकेजों में किया गया है. यह राष्ट्रीय महामार्ग पाटस से बारामती, बारामती से इंदापुर और इंदापुर से तोंडले गांव तक विकसित किया गया है. इनमें से पाटस से बारामती मार्ग का कार्य पूर्ण हो चुका है. इंदापुर से तोंडले गांव तक का कार्य 96 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है, जबकि बारामती से इंदापुर तक का कार्य 84 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है. यहां भी स्वतंत्र पदयात्रा मार्ग, फ्लाईओवर, अंडरपास और बायपास मार्गों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. संत ज्ञानेेशर पालकी मार्ग और संत तुकाराम पालकी मार्ग का विकास केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र विकास मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है. गड़करी ने कहा कि पालकी मार्गों पर अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत 40 से अधिक सरोवर बनाए गए हैं. अहिल्या कुआं और बाजीराव कुआं जैसी ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण करते हुए उनके आसपास सुरक्षा निर्माण कार्य किया गया है. विभिन्न स्थानों पर पालकी विश्राम स्थलों की भी व्यवस्था की गई है. इन दोनों पालकी मार्गों को आधुनिक पायाभूत सुविधाओं से जोड़ते हुए सुरक्षा और विकास का संगम तैयार किया जा रहा है. हड़पसर से दिवे घाट तक के मार्ग के लिए 17 हेक्टेयर भूमि वन विभाग से प्राप्त करने में सफलता मिली है. मैंने आज बस से संत ज्ञानेेशर महाराज पालकी मार्ग का निरीक्षण किया. आधुनिकता और धार्मिक परंपराओं को साथ जोड़ते हुए पालकी मार्गों का विकास किया गया है. भविष्य में कृषि और औद्योगिक परिवहन इन मार्गों से तेज होगा. पुरंदर में विकसित होने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी इस राष्ट्रीय महामार्ग से जोड़ा जाएगा. दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के प्रयासों से बारामती बायपास पर कान्हेरी गांव के पास तालाब का गहरीकरण किया गया था. इससे राष्ट्रीय महामार्ग के कार्यों को गति मिली. हिंगणघाट और कान्हेरी में वन्य जीवों के लिए भूमिगत मार्ग बनाकर उनके आवास को सुरक्षित किया जा रहा है.
यह सब विट्ठल की कृपा : नितिन गड़करी
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मेरी माता आज जीवित नहीं हैं. उन्होंने पंढरपुर और गाणगापुर की यात्रा की थी. उस समय उन्होंने मुझसे कहा था कि पंढरपुर और गाणगापुर को जोड़ने वाले मार्ग अत्यंत खराब हैं. उन खराब सड़कों के कारण उनकी पीठ में दर्द होने लगा था. तभी मैंने तय किया था कि संत ज्ञानेेशर और संत तुकाराम पालकी मार्गों का विकास करना है. विठ्ठल के आशीर्वाद से आज संत ज्ञानेेशर पालकी मार्ग और संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग विकसित हो रहे हैं. इसका मुझे हृदय से आनंद है और मुझे लगता है कि यह विठ्ठल की कृपा है.
पालकी मार्ग के आसपास हरियाली होनी चाहिए
संत ज्ञानेेशर महाराज पालकी मार्ग और संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग के आसपास का क्षेत्र हराभरा होना चाहिए. दोनों पालकी मार्गों के दोनों ओर वृक्ष होने चाहिए. इसके लिए स्थानीय नगरपालिका, नगर परिषद, धार्मिक संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थाएं और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं एक साथ आकर दोनों मार्गों के दोनों ओर वृक्षारोपण करें, ऐसा यह अपील गड़करी ने की है.
विनामूल्य अमृत सरोवरों की संख्या : 66
विनामूल्य जलसंग्रह क्षमता : 5151 टीसीएम
लाभान्वित गांव : 47
66 अमृत सरोवरों में से 36 पुणे जिले में, 5 सोलापुर जिले में और 25 सातारा जिले में स्थित हैं. जलसंवर्धन कार्यों के कारण महाराष्ट्र शासन के लगभग 94 करोड़ रुपये की बचत हुई है.