आम जनता ही हर बार बलिदान क्यों दे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कम खर्चों की अपील पर नागरिकों का दो टूक सवाल

    15-May-2026
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पश्चिम एशिया में हो रहे युद्ध का परिणाम भारत देश पर भी हो रहा है. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशहित के लिए देशवासियों को पेट्रोल- डीजल बचत के लिए आह्वान किया है. साथ ही ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्क फ्रॉम होम के पर्यायों का सुझाव दिया है. उन्होंने कहा कि, प्रत्येक देशवासी द्वारा 1 प्रतिशत ईंंधन बचाने से एक साल में 14,819 रुपयों की बचत हो सकती है और साथ ही प्रतिदिन 13.7 करोड़ लीटर पेट्रोल और 29.4 करोड लीटर डीजल की बचत हो सकती है. साथ ही एक साल तक सोना न खरीदने के लिए भी अपील की गई है. इस आह्वान के बाद में देशवासियों में चर्चा का माहौल है. इस आह्वान के बारे में शहर के कुछ प्रतिष्ठितों की प्रतिकात्मक प्रतिक्रियाएं...  
 
सरकारी अधिकारियों की करोड़ों की बेनामी संपत्ति जब्त करें

जो बड़ी शादियां होती हैं, वे आम आदमी के लिए नहीं होतीं. मंत्रियों के पास 25 से 50 कारों का काफिला होता हैं. इन सभी बड़े बिजनेसमैन, बिल्डर, सरकारी अधिकारियों वगैरह पर टैक्स लगाना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. खाने का तेल 10 परसेंट कम इस्तेमाल होने की वजह से फॉरेन करेंसी कम हो, ये कैसे हो सकता है? असल में, पिछले दस सालों में भारत और भारतीय बिजनेसमैन कच्चे माल के लिए पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो गए हैं. घरेलू कच्चे माल के सप्लायर को इंसेंटिव देना जमी हुई करेंसी को बचाने में बहुत काम आएगा. अगर सरकारी अधिकारियों की करोड़ों की बेनामी संपत्ति जब्त कर ली जाए, तो देश का कर्ज कम हो सकता है. इसके लिए बहुत आसान है, बस पिछले पंद्रह सालों में पुणे शहर में हुई सभी खरीद-फरोख्त का ईमानदारी से ऑडिट होना जरूरी है. अगर खरीद ऐसे लोगों के नाम पर रजिस्टर्ड है जिनके पास कोई पॉवर या फाइनेंशियल कैपेसिटी नहीं है, तो उन्हें बेनामी माना जाना चाहिए और सबसे जशरी बात, मोदीजी, अगर आप दिन में तीन-चार बार कपड़े बदलने और मेकअप करने में खर्च होने वाले पैसे से बचेंगे, तो आपका बहुत सारा समय और पैसा बचेगा. - एड. योगेश पांडे, पुणे  
 

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आम जनता ही हर बार बलिदान क्यों दे?

देशवासियों को त्याग का उपदेश देना आसान है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर आम जनता ही हर बार बलिदान क्यों दे? देश की जनता पूछ रही है, क्या महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बोझ का पूरा भार सिर्फ मध्यम वर्ग और गरीब जनता ही उठाएगी? जब पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार रिकॉर्ड टैक्स वसूल रही थी, तब जनता को राहत क्यों नहीं दी गई? जब करोड़ों युवा बेरोजगार हैं, तब सरकार अपनी विफलताओं पर बात करने के बजाय लोगों की निजी जिंदगी और खर्चों पर ‌‘सलाह‌’ क्यों दे रही है? सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि आज वही बातें सरकार कह रही है, जिन मुद्दों पर पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार चेतावनी देते रहे. राहुल गांधी ने पहले ही महंगाई, आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और आम जनता पर बढ़ते बोझ का मुद्दा उठाया था. तब उसे मजाक का विषय बनाया गया, लेकिन आज खुद सरकार जनता से खर्च कम करने और त्याग करने की अपील कर रही है. इससे साफ है कि विपक्ष जो कह रहा था, वही आज हकीकत बन चुका है. अगर देश की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है जैसा रोज दावा किया जाता है, तो फिर जनता को डर और कटौती का संदेश क्यों दिया जा रहा है? देशभक्ति का मतलब यह नहीं कि जनता अपनी जशरतें छोड़ दे और सरकार सिर्फ भाषण देती रहे. पहले सरकार अपने फिजूल खर्च, प्रचारबाजी और बड़े-बड़े इवेंट्स पर होने वाले करोड़ों रुपये बंद करे, फिर जनता को त्याग का ज्ञान दे. - अक्षय जैन, अध्यक्ष-महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस (मीडिया विभाग)  
 
 
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  नेशन फर्स्ट, प्रधानमंत्री की 7 अपीलों को सपोर्ट करें

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के हर नागरिक को देशहित को सबसे ऊपर मानकर आत्मनिर्भर, काबिल और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सात आवश्यक अपीलें की हैं. इन अपीलों में जहां तक हो सके घर से काम करने को प्राथमिकता देना, अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचना, पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अयादा इस्तेमाल करना, खाने के तेल का इस्तेमाल कम करना, विदेशी ब्रांड के बजाय देसी प्रोडक्ट को प्राथमिकता देना, केमिकल खाद पर निर्भरता कम करके नेचुरल खेती को बढ़ावा देना और अगले एक साल तक विदेश यात्रा से बचने की कोशिश करना शामिल हैं. ये सभी सात अपीलें सिर्फ अपनी आदतें बदलने के बारे में नहीं हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, विदेशी मुद्रा बचाने और देसी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के बारे में भी हैं. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बहुत ही असरदार और दूर की सोचने वाला कदम है और हर भारतीय को इस पर गंभीरता से सोचने और इन बातों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाने की जशरत है. हम प्रधानमंत्री की इन सभी सात जशरी अपीलों को अपना पूरा और पक्का सपोर्ट देते हैं. हर नागरिक से अपील करते हैं कि वे देश के हित, आर्थिक आत्मनिर्भरता और भारत के हर तरह के विकास के लिए इस पहल में सक्रिय रूप से हिस्सा लें. - प्रवीण चोरबेले, पूर्व नगरसेवक
 
 
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सबसे पहले घर से शरूआत करें

प्रधानमंत्री मोदी ने एक साल तक सोना न खरीद ने और इंधन बचाव का आह्वान किया है. इसका अंमल पुणे में करने के लिए सर्वप्रथम पुणे के मेयर, नगरसेवकों, विधायकों और सांसदों ने अपनी सभी फोम व्हीलर वाली गाड़ियां छोड़कर टू-व्हीलर वाली गाड़ियों का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए. उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की सलाह माननी चाहिए. फिर नागरिकों से अपील करनी चाहिए. सबसे पहले घर से शुरुआत करें! सोना न खरीदने का कारण सर्वप्रथम केंद्र सरकार द्वारा बताया जाना चाहिए. सबसे पहले लोगों के सामने पैसों की दिक्कतें रखनी चाहिए. सोने के कारोबार में लाखों कारीगर और सेल्समैन हैं. उनके बारे में क्या सोचा है? लाखों कारीगर और सेल्समैन बेरोजगार हो जाएंगे. अपने परिवारों के बारे में नहीं सोचा, व्यापारियों के बारे में नहीं सोचा. सोना न खरीदने के अपील से आर्थिक तंगी और बढ़ सकती है. व्यापारियों को किसी भी तरह से बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए. जिनके घर में शादी जैसे कार्यक्रम होने जा रहे है, उनके लिए तो यह अपील एक मुश्किल बन सकती है. वैसे भी सोना खरीदना आम जनता के लिए असंभव हो गया है, फिर भी शादी-ब्याह में सोना खरीदना आवश्यक होता है. अगर यह नहीं हुआ तो शादी की मुश्किलें और बढ सकती हैं. - भारत बी. सुराणा, अध्यक्ष: पुणे शहर जिला कांग्रेस कमेटी व्यापारी सेल  
 
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