चीनी की कीमताें में और गिरावट की आशंका

निर्यात पर प्रतिबंध का असर : वर्तमान में शक्कर का भरपूर स्टॉक, मांग न होने की स्थिति

    16-May-2026
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n hbn
 
गुलटेकड़ी, 15 मई (आ. प्र.)

घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा. हालांकि, इस फैसले से चीनी उद्योग में चिंता का माहौल बन गया है. पहले से ही समस्याओं से जूझ रहे इस उद्योग में निर्यात बंदी के कारण कीमतों के और गिरने का डर सता रहा है. व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में चीनी का भारी स्टॉक बचा हुआ है. आने वाले समय में शादी-ब्याह या बड़े आयोजनों का सीजन न होने के कारण मांग में कमी रहेगी. ऐसी स्थिति में कीमतों के और नीचे जाने की पूरी संभावना है. गौरतलब है कि भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इस फैसले का अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार पर भी व्यापक असर पड़ सकता है. केंद्र सरकार ने इससे पहले चीनी मिलों को 1.59 मिलियन मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी. उस समय यह अनुमान लगाया गया था कि देश में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग से अधिक रहेगा. हालांकि, अब स्थिति बदल गई है. प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्पादन कम होने के कारण लगातार दूसरे वर्ष देश में चीनी का उत्पादन खपत से कम रहने की संभावना जताई जा रही है. विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और बारिश की अनियमितता के कारण उत्पादन प्रभावित होने की बात कही जा रही है. माना जा रहा है कि सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया है ताकि घरेलू बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके. लेकिन, भारत के इस फैसले से वैेिशक आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना है, इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चिंता व्यक्त की जा रही है. कीमतें नियंत्रण में रहने की उम्मीद कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बनी रहने में मदद मिलेगी. परिणामस्वरूप, यह उम्मीद जताई जा रही है कि रिटेल बाजार में चीनी की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी.  
 
इन खेपों के निर्यात की अनुमति सरकार द्वारा दी जाएगी

 सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिसूचना जारी होने से पहले जिन खेपों की लोडिंग प्रक्रिया शुरू हो गई थी, उन्हें निर्यात की अनुमति दी जाएगी. व्यापारियों के अनुसार, मंजूर किए गए 1.59 मिलियन मेट्रिक टन चीनी में से लगभग 0.8 मिलियन टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके थे. इसमें से 0.6 मिलियन टन से अधिक चीनी पहले ही विदेशों में भेजी जा चुकी है. जिन खेपों के लिए शिपिंग बिल दाखिल किया जा चुका है और संबंधित जहाज भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुका है या लंगर डाले खड़ा है, ऐसे निर्यात को भी मंजूरी दी जाएगी. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधिसूचना लागू होने से पहले सीमा शुल्क विभाग या अधिकृत कस्टोडियन को सौंपी गई चीनी की खेपों को भी अनुमति दी जाएगी.  
 
  चीनी उद्योग में वर्तमान स्थिति काफी खराब व चिंताजनक

चीनी उद्योग में वर्तमान स्थिति काफी खराब है. चीनी का स्टॉक भरपूर मात्रा में होने के कारण बाजार में कोई विशेष खरीदार नहीं है और निर्यात भी मूल रूप से बेहद कम हो रहा था. निर्यात पर पाबंदी के कारण स्वाभाविक रूप से बाजार भाव और नीचे गिरेंगे. आने वाले समय में शादियों का सीजन नहीं है, इसलिए आगे भी कोई खास ग्राहक नजर नहीं आ रहे हैं. अनुमान है कि जून-जुलाई तक बाजार भाव में प्रति क्विंटल लगभग 50 से 100 रुपये की गिरावट आएगी. आमतौर पर मई के महीने में आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और शादियों के कारण मांग बढ़ती है, लेकिन इस साल ऐसा कुछ खास नहीं दिख रहा है. चर्चा थी कि एमएसपी बढ़ेगी, लेकिन वैसा भी कुछ नहीं हुआ. फिलहाल पुणे मार्केट में भाव 4,000 से 4,040 प्रति क्विंटल हैं, जबकि मिलों पर भाव लगभग 3,750 से 3,780 प्रति क्विंटल चल रहे हैं. ईेशर नहार, चीनी व्यापारी, पुणे