मुकुंदनगर, 17 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) समस्त महाजन और जिप्रो (JIPROJain International Philosophical Research Organisation) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित आत्म-सुधार और प्रेरणादायक सेमिनारों की श्रृंखला में ‘सुखी जीवन जीने की कला’ सेमिनार पुणे मुकुंदनगर स्थित के सुजय गार्डन उपाश्रय में समस्त महाजन के प्रबंध न्यासी डॉ. गिरीश शाह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया. इस सेमिनार में संगठन के महाराष्ट्र समन्वयक रमेश ओसवाल और आयोजक सुजय गार्डन जैन संघ के अध्यक्ष राजेंद्र शाह और राजेश शाह उपस्थित थे. मुख्य वक्ताओं में सीए जयेश शेठ, एड. एस.के. जैन, डॉ. कल्याण गंगवाल और शैलेश शाह शामिल थे. सीए जयेश शेठ ने कहा कि, आत्मा को अंतहीन पीड़ा से बचाने और अनंत सुखको प्राप्त करने के लिए, साधक को अपनी आत्म-जागरूकता में बने रहना चाहिए. अनादिकाल से हमने असंख्य बाहरी धार्मिक कर्म किए हैं, परन्तु ईेशर के आदेशों का पालन कर आंतरिक धर्म का अभ्यास नहीं किया. सुख और सुख के आभास में अंतर है. जिसे हम इस संसार में सुख कहते हैं, ज्ञानी उसे सुख का आभास कहते हैं. जो लोग यह मानते हैं कि सुख बाहरी है, वे अपना पूरा बहुमूल्य जीवन बाहरी सुख की खोज में व्यतीत कर देते हैं. सुख का नियम यह है कि जो प्राणी अधिक दुख भोगता है, उसे अधिक सुख प्राप्त होता है. जो प्राणी दुख नहीं भोगता, उसे कम सुख प्राप्त होता है या फिर उसे दुख भोगना भी पड़ सकता है. इस संसार के सुखों के साथ ही दुख भी आता है, और इन सुखों को भोगने की इच्छा से जुड़ा कर्म भी भविष्य में आत्मा को दुख देता है. भला जो सुख पहले भी दुःख दे और आगे भी दुःख देता रहे, उसे सुख कैसे कहा जा सकता है? परन्तु शोशत सुख के बारे में हमारी विकृत समझ के कारण हम इसे ही सुख मानते हैं और अनादि काल से इसे पाने का प्रयास करते आ रहे हैंं. मैं एक आत्मा हूं मात्र शाब्दिक ज्ञान और सूचना है. ज्ञान और आस्था में बहुत बड़ा अंतर है. आस्था वेिशास से उत्पन्न होती है और आस्था आत्म- साक्षात्कार से, अन्यथा भले ही समझो हमने अतीत में अनगिनत बार दीक्षा ली होती और नौ पीढ़ियों का ज्ञान प्राप्त किया होता, फिर भी हमें आत्म-साक्षात्कार का सही दृष्टिकोण प्राप्त हो चुका होता. सेमिनार यशस्वी बनाने में जैन सोशियल ग्रुप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बीरेनभ शाह, महाराष्ट्र मंडल समन्वयक दिलीप शाह, पुणे मंडल अध्यक्ष सुजश शाह, युवा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीए हरेश शाह, पुणे अध्यक्ष ललित गुंदेशा, पूणा मर्चंट चेंबर्स के अध्यक्ष राजेंद्र बाठिया, दादावाड़ी जैन मंदिर ट्रस्ट, हिंदू जन जागरण समिति और गोटीवाला जैन संघ का विशेष योगदान रहा.