पुणे, 18 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के कौशल विकास मंत्रालय के तहत रजिस्टर्ड कुछ निजी संस्थाएं छात्रों से लाखों रुपये की फीस वसूलकर उन्हें ठग रही हैं. इन छात्रों की न तो परीक्षा ली जा रही है और न ही उन्हें वादे के मुताबिक रोजगार दिया जा रहा है. केंद्र सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम के नाम पर इस तरह का भ्रष्टाचार चल रहा है, क्या राज्य सरकार का इसे मूक समर्थन प्राप्त है? यह तीखा सवाल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता सुनील माने ने एक पत्रकार परिषद में उठाया. आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा एकेडमी की कार्यप्रणाली का पर्दाफाश करते हुए सुनील माने ने कहा, संस्था में प्रवेश लेने वाले 170 छात्रों में से करीब 80 छात्रों की परीक्षा ही नहीं ली गई है. उन्हें कोर्स पूरा होने का प्रमाणपत्र भी नहीं दिया गया. जब छात्रों ने संस्थान से पूछताछ की, तो प्रबंधन ने झूठ बोला कि सरकार की ओर से ही परीक्षा आयोजित नहीं की गई है. हालांकि, जब मैंने महाराष्ट्र राज्य कौशल, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण बोर्ड से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी, तो बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अमिगो एकेडमी ने छात्रों की परीक्षा से जुड़ी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया ही पूरी नहीं की थी. परीक्षा न होने के कारण छात्रों को बोर्ड का आधिकारिक सर्टिफिकेट नहीं मिला, जिससे उन्हें नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं. हर छात्र को शत-प्रतिशत नौकरी देने का दावा करने वाली अमिगो एकेडमी ने बहुत ही कम छात्रों को प्लेसमेंट दिया है, वह भी महज 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह की मामूली पगार पर. इस दौरान सुनील माने ने चेतावनी दी कि इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ वे पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मिलकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने जा रहे हैं. उन्होंने राज्य के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा से भी इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और दोषी एकेडमी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है.
फीस लेने के बावजूद न प्रशिक्षण दिया, न ही विद्यार्थियों की परीक्षा ली : सुनील माने पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए सुनील माने ने कहा कि पुणे में धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है. एविएशन (विमान कर्मचारी), हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल एंड टूरिज्म और कस्टमर सर्विस जैसे कोर्स का प्रशिक्षण देने वाली पुणे की अमिगो एकेडमी ने छात्रों से लाखों रुपये की फीस वसूली है. फीस लेने के बावजूद छात्रों को न तो ठीक से प्रशिक्षण दिया गया और न ही उनकी परीक्षा ली गई. माने ने बताया कि इस एकेडमी की मुंबई के घाटकोपर, बोरीवली, बांद्रा और ठाणे पश्चिम में दो-दो शाखाएं हैं, जबकि अंधेरी और पुणे में एक-एक शाखा कार्यरत है. उन्होंने मांग की कि सरकार मुंबई और ठाणे की इन सभी शाखाओं की भी गहन जांच करे. साथ ही कौशल विकास और स्वरोजगार के नाम पर छात्रों को लूटने वाली ऐसी सभी संस्थाओं को ढूंढकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.