नोबल हॉस्पिटल में पहली रोबोटिक हार्ट सर्जरी सफल

दिल से निकाली गांठ : कोई बड़ा चीरा नहीं, न हड्डी काटने की आवश्यकता

    02-May-2026
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नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आ.प्र.)

वर्तमान में मोबाइल डेटा का उपयोग और उसकी गति (स्पीड) काफी बढ़ गई है. इसके बावजूद, आज भी कई लोगों को अपने घर या इमारतों के भीतर जाने पर नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यह समस्या अब एक गंभीर चुनौती बन गई है, जिससे निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कमर कस ली है. नए नियमों के अनुसार, अब इमारतों के निर्माण डिजाइन (नक्शे) में ही डिजिटल बुनियादी ढांचा शामिल करना अनिवार्य होगा. मट्राईफ के अध्यक्ष ए. के. लाहोटी ने यह जानकारी दी है. घरों की दीवारों को भेदकर सिग्नल को अंदर पहुंचाने के लिए अच्छी फ्रीक्वेंसी वाले स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होती है. इसके लिए ट्राइ ने सरकार से 600 मेगाहर्ट्ज और 37 से 40 गीगाहर्ट्ज बैंड उपलब्ध कराने की सिफारिश की है. 600 मेगाहर्ट्ज बैंड की मदद से इमारतों के कोनों में भी मोबाइल सिग्नल स्पष्ट रूप से मिलने में मदद मिलेगी. वर्तमान मय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ रहा है. ऐसी स्थिति में केवल मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा. इसीलिए नियामक अब फिक्स्ड ब्रॉडबैंड नेटवर्क के विस्तार को अधिक बढ़ावा दे रहा है, ताकि ग्राहकों को इमारतों के भीतर भी निर्बाध सेवा मिल सके. हड़पसर, 30 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर ने रोबोट का उपयोग करके की-होल पोर्ट्स के जरिए पूरी तरह से की जाने वाली रोबोटिक लेफ्ट एट्रियल मीक्झोमा एक्सिजन नामक जटिल हृदय सर्जरी हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न की. हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है. यह सर्जरी एक 55 वर्षीय महिला पर की गई. नियमित जांच के दौरान उनके दिल के बाएं हिस्से (कप्पे) में ट्यूमर (गाठ) होने का पता चला था. इस प्रकार की गांठों को लेफ्ट एट्रियल मीक्झोमा कहा जाता है. पारंपरिक रूप से, इस सर्जरी के लिए मीडियन स्टर्नो टॉमी (छाती की हड्डी को बीच से काटना) की आवश्यकता होती है. नोबल हॉस्पिटल में पहली बार, यह प्रक्रिया रोबोट की सहायता से केवल छोटे पोर्ट चीरों के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न की गई. इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया गया और न ही छाती की हड्डी काटने की आवश्यकता पड़ी. इस सर्जरी के दौरान हार्ट-लंग मशीन का उपयोग करके हृदय को कुछ समय के लिए रोका गया था. थ्रीडी कैमरे की मदद से हृदय के बाएं हिस्से में प्रवेश कर बड़ी सटीकता के साथ गांठ को निकाला गया. इस प्रक्रिया में भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञ द्वारा विकसित एसएसआई मंत्रा रोबोटिक प्रणाली का उपयोग किया गया. यह जटिल सर्जरी हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. धैर्यशील कणसे के नेतृत्व में और वरिष्ठ कैंसर शल्य चिकित्सक डॉ. आशीष पोखरकर के सहयोग से पूरी हुई. सर्जिकल टीम में डॉ. अनिरुद्ध ढेकणे और डॉ. एन. जाधव थे जबकि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. सम्राट मदनाईक और डॉ. परमिता दीक्षित शामिल थे.  
 
दृढ़ संकल्प का प्रतीक

 डॉक्टरों की टीम का अभिनंदन करते हुए, नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर के उप-प्रबंध निदेशक डॉ. दिविज माने ने कहा कि, अत्याधुनिक उपचार के लिए मरीजों को देश से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है; वे आधुनिक और सर्वोत्तम उपचार उन तक पहुंचाना हमारी प्रतिबद्धता है. यह मील का पत्थर हमारे दृढ़ संकल्प का प्रतीक है.