नेशनल पार्क में ‘इंटीग्रेटेड सिटी’ बनाने के प्रस्ताव पर विवाद

    23-May-2026
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मुंबई के सबसे बड़े फेफड़े और वन्यजीवाें के प्रमुख ठिकाने ‘संजय गांधी नेशनल पार्क’ काे लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हाे गया है. पार्क के भीतर एक विश्व स्तरीय यूनिवर्सिटी और पूरे नेशनल पार्क व आरे मिल्क काॅलाेनी काे मिलाकर एक मएकात्मिक शहर विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है. इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद पर्यावरण प्रेमियाें में भारी चिंता है, वहीं राज्य के वन विभाग ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब पंडित यशदेव एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के आर.डी.
झा द्वारा राज्य सरकार काे एक प्रस्ताव भेजा गया. इस प्रस्ताव में दाे मुख्य मांगें की गई हैं. इनमें संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर ‘अटल बिहारी वाजपेयी नेशनल पार्क’ किया जाए. इसी परिसर के भीतर एक विश्व स्तरीय ‘भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी’ बनाई जाए और साथ ही पूरे नेशनल पार्क और आरे काॅलाेनी काे मिलाकर एक एकात्मिक शहर (इंटीग्रेटेड सिटी) के रूप में विकसित किया जाए, ताकि वहां करीब 5 लाख लाेगाें काे बसाया जा सके.
 
राज्य के राजस्व और वन विभाग ने इस प्रस्ताव पर राय जानने के लिए मुख्य वनसंरक्षक काे तीन बार पत्र भेजे थे.वन विभाग का कड़ा रुख प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) ने इस विचार काे पूरी तरह से खारिज करते हुए राज्य सरकार काे अपना कड़ा विराेध भेजा है.वन विभाग के अधिकारियाें का कहना है कि, नेशनल पार्क एक अधिसूचित संरक्षित क्षेत्र है.यहां यूनिवर्सिटी या टाउनशिप बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य, सड़काें का विकास, गाड़ियाें का आना-जाना और लाेगाें की भारी आवाजाही हाेगी, जिससे यहां के वन्यजीवाें का प्राकृतिक आवास पूरी तरह नष्ट हाे जाएगा. यह प्रस्ताव वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और मवन संरक्षण कानूनफ के प्रावधानाें के खिलाफ है. वन विभाग ने साफ किया है कि यदि सरकार ऐसी काेई यूनिवर्सिटी बनाना ही चाहती है, ताे उसे नेशनल पार्क और पर्यावरण के संवेदनशील जाेन से बाहर किसी अन्य जगह पर जमीन तलाशनी चाहिए.