रोबोटिक सर्जरी के कारण जोड़ों का अधिक सटीक एलाइनमेंट संभव

पुणे के साईश्री विटालाइफ के संचालक और रोबोटिक रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. नीरज आडकर ने दी जानकारी

    24-May-2026
Total Views |

bgbv 
खेलते समय लिगामेंट में चोट लग जाती है, या फिर घुटना बदलने (नी रिप्लेसमेंट) की सर्जरी तो आजकल लगभग हर किसी को करानी पड़ने वाली सर्जरी बन गई है. ऐसी सर्जरी आजकल रोबोट की सहायता से की जाती है. इसके फायदे क्या हैं? इसके बाद क्या करना चाहिए? इस तरह के प्रश्नों के पुणे के साईश्री विटालाइफ के संचालक और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. नीरज आडकर ने विस्तार से उत्तर देकर शंकाओं का निराकरण किया है.  
 
सवाल : सर्जरी और बिना सर्जरी के लिगामेंट उपचार के बाद खिलाड़ियों पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है?
जवाब : एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) जैसे लिगामेंट के पूरी तरह फटने के लिए जो खिलाड़ी सर्जरी (ऑपरेशन) करवाते हैं, वे अक्सर अधिक स्थिरता और आत्मवेिशास के साथ उच्च-स्तरीय खेलों में वापस आते हैं. बिना सर्जरी के उपचार आंशिक रूप से फटे लिगामेंट के लिए या कम सक्रिय व्यक्तियों के लिए अच्छा काम कर सकते हैं. लेकिन वे जोड़ों की ताकत को पूरी तरह से बहाल नहीं कर सकते. दीर्घकालिक परिणाम चोट की गंभीरता, पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के प्रति प्रतिबद्धता और सही निदान पर निर्भर करते हैं. सर्जरी द्वारा सुधार करने से आमतौर पर जोड़ों को बेहतर सुरक्षा मिलती है और खिलाड़ियों के लिए भविष्य की चोटों का जोखिम कम होता है.
 सवाल : रोबोटिक तकनीक के कारण मरीजों को होने वाले दर्द में कमी आती है क्या?
 जवाब : हां, पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी में आस-पास के टिश्यूज (ऊतकों) और मांसपेशियों को बहुत कम नुकसान पहुंचता है, जिससे सर्जरी के बाद मरीजों को होने वाला दर्द काफी हद तक कम हो जाता है. रोबोटिक प्रणाली की मदद से सर्जन बहुत ही सटीकता से काम करते हैं, जिससे खून का बहाव भी कम होता है. कम दर्द होने के कारण मरीज को पेनकिलर दवाइयां भी कम लेनी पड़ती हैं और वह बहुत जल्दी अपने पैरों पर खड़ा होकर चलने-फिरने लगता है. शुरुआती रिकवरी के दौरान ही फिजिकल थेरेपी भी मरीजों के लिए बहुत आरामदायक और कम दर्दनाक साबित होती है.
सवाल : रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की सफलता में फिजियोथेरेपी क्या भूमिका निभाती?
जवाब : रोबोटिक सहायता से किए गए घुटना प्रत्यारोपण के बाद फिजियोथेरेपी पारंपरिक सर्जरी जितनी ही महत्वपूर्ण होती है. वह ताकत, गतिशीलता और संतुलन बहाल करने में मदद करती है. साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि नया जोड़ सुचारू रूप से कार्य करे. वास्तव में, रोबोटिक सर्जरी के कारण जोड़ों का अधिक सटीक एलाइनमेंट किया जा सकता है, इसलिए शुरुआती दौर में फिजिकल थेरेपी अधिक प्रभावी और कम दर्दनाक हो सकती है. इस तकनीक का पूरा लाभ उठाने के लिए एक सुनियोजित तरीके से देखभाल करना आवश्यक है. देखभाल नहीं की गई या उसमें देरी की गई, तो परिणामों पर सीमाएं आ सकती हैं.
सवाल : पुनर्शल्यक्रियाओं (रिवीजन सर्जरी) में रोबोट की सहायता से संपूर्ण घुटना प्रत्यारोपण (टीकेआर) किया जा सकता है क्या?
जवाब : हां, रोबोटिक सहायता से किया जाने वाला संपूर्ण घुटना प्रत्यारोपण (टीकेआर) रिवीजन सर्जरी में तेजी से उपयोग किया जा रहा है, जहां पुराने या खराब हो चुके इम्प्लांट को बदलने की आवश्यकता होती है. रोबोटिक प्रणाली विस्तृत योजना और इम्प्लांट के सटीक एलाइनमेंट (संरेखण) में मदद करती है. यह विशेष रूप से जटिल रिवीजन सर्जरी में उपयोगी साबित होती है. सभी केंद्रों में यह क्षमता नहीं होती है. लेकिन जब यह उपलब्ध होती है, तब यह सटीकता और परिणाम में सुधार कर सकती है. सफलता सुनिश्चित करने के लिए सर्जनों का रोबोटिक तकनीक में अच्छी तरह से प्रशिक्षित होना आवश्यक है.
सवाल : क्या कुछ ऐसे विशिष्ट जोखिम कारक हैं, जिनके कारण युवा मरीजों में अवैस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) होने की संभावना अधिक होती है?
जवाब : हां, कई कारक युवा व्यक्तियों में अवैस्कुलर नेक्रोसिस का जोखिम बढ़ा सकते हैं. उनमें लंबे समय तक कॉर्टिको स्टेरॉइड्स का उपयोग, अत्यधिक शराब का सेवन, जोड़ों में लगी चोट या ल्यूपस या सिकल सेल डिजीज जैसी कुछ चिकित्कीय स्थितियां शामिल हैं. ये कारक हड्डियों को होने वाली रक्त आपूर्ति को कम करते हैं. इस वजह से ऊतक (टिश्यूज) मृत हो जाते हैं. जोड़ों के गंभीर नुकसान से बचने के लिए जल्द निदान होना महत्वपूर्ण है. रोकथाम में जीवनशैली के विकल्प और चिकित्सा प्रबंधन बड़ी भूमिका निभाते हैं.
सवाल : क्या शराब के सेवन से अवैस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) की वृद्धि तेज हो सकती है ?
जवाब : हां, अत्यधिक शराब का सेवन एक सर्वविदित जोखिम कारक है, जिससे एवीएन की स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है. इससे हड्डियों में रक्त के प्रवाह में रुकावट आती है. इसके कारण हड्डियों की कोशिकाओं की मृत्यु और जोड़ों का नुकसान तेजी से होता है. कुछ लोगों में उच्च खुराक के स्टेरॉयड का बहुत कम समय का उपयोग भी एवीएन को ट्रिगर कर सकता है. जोखिम वाले मरीजों की नियमित इमेजिंग (जांच) द्वारा निगरानी की जानी चाहिए और उन्हें जीवनशैली में बदलाव के बारे में सलाह दी जानी चाहिए. इन जोखिमों को कम करने से एवीएन की गति धीमी हो सकती है या इसे रोका भी जा सकता है.