एक नई उद्याेग अनुसंधान रिपाेर्ट के अनुसार, भारत का संपीड़ित बायाेगैस (सीबीजी) क्षेत्र आने वाले वर्षाें में लगभग 1 लाख कराेड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर सकता है. क्वांटेस रिसर्च की रिपाेर्ट के मुताबिक, भारत वर्तमान में अपनी 62 मिलियन मीट्रिक टन की वार्षिक सीबीजी उत्पादन क्षमता के 1% से भी कम का उपयाेग कर रहा है. वित्त वर्ष 2025 में कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता रिकाॅर्ड 89.4% तक पहुंच गई है, जिसका पेट्राेलियम आयात बिल लगभग 143 अरब डाॅलर अनुमानित है.ऐसे में बायाेगैस काे अब एक रणनीतिक घरेलू ईंधन विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर रहने वाली अन्य नवीकरणीय तकनीकाें के विपरीत, भारत का बायाेगैस पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से घरेलू संसाधनाें (कृषि अवशेष, पशु गाेबर और शहरी कचरे) पर आधारित है.
केंद्र सरकार की सतत पहल और अनिवार्य सीबीजी मिश्रण राेडमैप से इस क्षेत्र में तेजी आ रही है. इसके तहत 130 से अधिक सीबीजी संयंत्र चालू हाे चुके हैं और 1,000 से अधिक परियाेजनाएं प्रक्रिया में हैं. इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियां भी इसके बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रही हैं.यह क्षेत्र न केवल जीवाश्म ईंधन के आयात काे कम करेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्राें में बड़े पैमाने पर राेजगार भी सृजित करेगा. हालांकि, खंडित फीडस्टाॅक आपूर्ति श्रृंखला, माैसमी बायाेमास उपलब्धता और उच्च शुरुआती लागत इस क्षेत्र की मुख्य चुनाैतियां हैं. विशेषज्ञाें का मानना है कि नीतिगत समर्थन मिलने पर सीबीजी क्षेत्र भी भारत के इथेनाॅल मिश्रण कार्यक्रम की तरह एक बड़ा रणनीतिक माेड़ ले सकता है.