माेरया (श्री गणेश) के असंख्य नेत्र हैं. जिसके असंख्य नेत्र हाेते हैं, उसे सब कुछ पता हाेता है. फिर कमरे में काेई हाे या न हाे, सीसीटीवी हाे या न हाे, मैं सही तरीके से व्यवहार करता हूं; क्याेंकि मेरा इस बात पर विश्वास हाेना चाहिए कि मेरा माेरया देख रहा है. जब तक ‘भगवान देख रहे हैं’ इस बात पर विश्वास था, तब तक सीसीटीवी की आवश्यकता नहीं थी.स्वर्ग हाे या नर्क, पाप हाे या पुण्य, इन सबसे बढ़कर यह आत्म-नियंत्रण का विज्ञान है. यह प्रतिपादन प.पू. गाणपत्य विद्यावाचस्पति स्वानंद पुंड शास्त्री महाराज ने किया. वे ‘श्री गणेश गीता’ के अंतर्गत भक्तियाेग पर छठवेें दिन निरूपण (प्रवचन) करते हुए बाेल रहे थे.
इस प्रवचनमाला का आयाेजन पावन अधिकमास के उपलक्ष्य में श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट और सुवर्णयुग तरुण मंडल की ओर से किया गया है.स्वानंद पुंड शास्त्री ने कहा कि माेरया (श्री गणेश) के हाथाें में कराेड़ाें सूर्याें के समान तेजस्वी आयुध हैं. प्रत्येक आयुध की एक अलग छटा है. वे आयुध अर्थपूर्ण हैं. शस्त्र विनाश के लिए हाेते हैं, जबकि आयुध निर्माण के लिए हाेते हैं. दुनिया का प्रत्येक जीव अलग है; लेकिन माेरया की विशेषता यह है कि वे पारंपरिक साैंदर्य के नियमाें में नहीं बंधते.अन्य देवताओं की विशिष्ट रूपाें की सीमाएं हाेती हैं. परंतु माेरया का काेई निश्चित रूप न हाेने के कारण, उन्हें प्रत्येक रूप में अनुभव किया जा सकता है. इसी वजह से माेरया का वैभव अन्य देवताओं से अलग और व्यापक साबित हाेता है.