16 हजार कराेड़ रुपये के बजट वाली मनपा का कामकाज कितना पारदर्शी है, इसका एक और चाैंकाने वाला उदाहरण सामने आया है. मनपा के विभिन्न विभागाें के आर्थिक व्यवहार और खाताें की जांच करने वाला लेखापरीक्षण विभाग फिलहाल खुद ही वेंटिलेटर पर है. मंजूर 105 कर्मचारियाें में से 77 पद रिक्त हाेने के कारण मनपा के कई प्रमुख विभागाें का पिछले दाे वर्षाें से लेखापरीक्षण (ऑडिट) रुका हुआ है.महाराष्ट्र मनपा अधिनियम 1949 की धारा 453 के अनुसार मुख्य लेखापरीक्षक की नियुक्ति की जाती है. इस कानून की धारा 105 से 108 तथा परिशिष्ट ड के प्रकरण 3 के अनुसार लेखापरीक्षकाें के कर्तव्य और अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं.
मनपा के कुल 62 मुख्य विभाग, 5 परिमंडल कार्यालय और 15 क्षेत्रीय कार्यालय जैसी विशाल व्यवस्था के खर्च पर नजर रखना और उसका ऑडिट करना इस विभाग का मुख्य कार्य है.कई विभागाें का ऑडिट नहीं ! प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली के कारण रिक्त पद नहीं भरे जाने से गिनेचुने कर्मचारियाें पर लेखापरीक्षण का भारी दबाव है. उपलब्ध कर्मचारी पेंशन संबंधी मामलाें में व्यस्त हाेने से मनपा के अन्य विभागाें का लेखापरीक्षण करते समय उन्हें कठिनाइयाें का सामना करना पड़ रहा है. हर वर्ष लेखापरीक्षण हाेना आवश्यक हाेने के बावजूद कर्मचारियाें की कमी के कारण कई विभागाें का ऑडिट नहीं हाे सका है.