सिर्फ कैरियर नहीं, खुशहाल व्यक्तित्व का निर्माण भी जरूरी

शिक्षाविद एवं ‌‘फ्लाइंग बर्ड इंटरनेशनल स्कूल एंड जूनियर कॉलेज‌’ की प्राचार्या डॉ. संगीता पांडेय के विचार

    27-May-2026
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पुणे, 26 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) 

 बदलते परिवेश में बच्चों की शिक्षा में सुधार करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. आज का युग डिजिटल है, जहाँ जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध है, लेकिन ध्यान भटकाने वाले साधन भी उतने ही अधिक हैं. ऐसे माहौल में शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता. एक शिक्षाविद और संस्थान प्रमुख के दृष्टिकोण से बदलते परिवेश में बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए हमें इन पांच मुख्य स्तंभों पर कार्य करना होगा.
 रटने की बजाय कौशल आधारित शिक्षा पर जोर
आज के समय में यह मायने नहीं रखता कि बच्चे ने कितना याद किया है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि वह उस ज्ञान का उपयोग किस प्रकार करता है. अवधारणा आधारित शिक्षा- बच्चों को क्या सोचना है के बजाय कैसे सोचना है सिखाया जाए, ताकि उनमें तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच विकसित हो. विज्ञान, तकनीक और कला का समन्वय: विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के साथ कला को भी जोड़ा जाए, ताकि बच्चों में रचनात्मकता और तार्किक क्षमता दोनों का विकास हो. व्यावहारिक ज्ञान: परियोजनाओं, प्रयोगशाला कार्यों और शैक्षणिक भ्रमण को बढ़ावा दिया जाए, ताकि बच्चा जो पढ़े उसे प्रत्यक्ष रूप से समझ सके.
 तकनीक का सही और संतुलित उपयोग
हम बच्चों को तकनीक से दूर नहीं रख सकते, लेकिन उन्हें इसका सही उपयोग अवश्य सिखा सकते हैं. स्मार्ट शिक्षण : कक्षाओं में दृश्य सामग्री, एनिमेशन और इंटरैक्टिव बोर्ड का उपयोग किया जाए, ताकि कठिन विषय भी रोचक बन सकें. डिजिटल जागरूकता-बच्चों को साइबर सुरक्षा, स्क्रीन समय के संतुलन और इंटरनेट पर सही सामग्री चुनने की समझ दी जानी चाहिए.
 मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक मजबूती
 
आज के परिवेश में बच्चों पर प्रदर्शन का दबाव बहुत अधिक है. इसलिए शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. तनावमुक्त वातावरण: विद्यालयों में ऐसा माहौल हो जहाँ बच्चा असफलता से डरे नहीं, बल्कि उसे सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माने. परामर्श सत्र: बच्चों के लिए नियमित मार्गदर्शन और परामर्श सत्र आयोजित किए जाएँ, ताकि वे अपने तनाव और संकोच को खुलकर साझा कर सकें. संस्कार और सहानुभूति: शिक्षा में नैतिक मूल्यों और सहानुभूति को शामिल करना आवश्यक है, ताकि बच्चे केवल सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि अच्छे इंसान भी बनें.
 
शिक्षक और अभिभावक की साझेदारी
 
बदलते परिवेश में बच्चा केवल विद्यालय या केवल घर पर नहीं सीखता, बल्कि दोनों के सामंजस्य से उसका विकास होता है. संवाद: अभिभावक-शिक्षक बैठक केवल शिकायत का मंच न होकर, बच्चे के समग्र विकास पर चर्चा का माध्यम बने. घर का वातावरण: अभिभावकों को घर में ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहाँ स्क्रीन समय कम हो और पुस्तकों, संवाद तथा रचनात्मक गतिविधियों को महत्व मिले.
 
खेलकूद और कलात्मक अभिरुचियां
 
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खेल और कला से बेहतर माध्यम कोई नहीं है. खेल भावना: टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और हार-जीत को स्वीकार करने का गुण खेल के मैदान से ही विकसित होता है. साहित्य और कला: कविता, संगीत, चित्रकला और नाटक बच्चों की भावनाओं को सकारात्मक दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं. बदलते परिवेश में हमें बच्चों के लिए शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि खोज बनाना होगा. जब तक उनके भीतर जिज्ञासा जीवित रहेगी, वे हर बदलती परिस्थिति में स्वयं को ढालने और सफल होने में सक्षम रहेंगे.