सदाशिव पेठ, 26 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) शहनाई और चौघड़े के मंगलमय सुर, पारंपरिक वेशभूषा में आए उत्साही पुणेवासी और प्रत्येक माता-बहन को फूलों का गजरा व पुरुषों को स्वर्ण चम्पा देते हुए, अत्यंत मंगलमय वातावरण में संपूर्ण गीत रामायण कार्यक्रम की प्रस्तुति शुरु हुई. पुणे के रसिक श्रोताओं ने भावविभोर और कृतार्थता की भावना के साथ इस कार्यक्रम का आनंद लिया. अवसर था महाकवि ग.दि. माडगूलकर और स्वरतीर्थ सुधीर फड़के की अमर कलाकृति गीत रामायण के संगीत महोत्सव का. गीत रामायण के 71वें वर्ष के उपलक्ष्य में विदिशा विचार मंच, कोहिनूर कट्टा और जयराज ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में इस महोत्सव का आयोजन किया गया है. भरत नाट्य मंदिर में आयोजित यह महोत्सव रसिकों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क है. इस तीन दिवसीय संपूर्ण गीत रामायण महोत्सव में गीत रामायण के 56 गीतों का निरुपण (विवेचन) और गायन आनंद माडगुलकर करेंगे. उनके साथ अभिजीत पंचभाई, हेमंत वालुंजकर, राजेश दातार, मीनल पोंक्षे, श्रेया माडगुलकर - सरपोतदार और मनीषा निश्चल समेत सह-कलाकार प्रस्तुति देंगे. उल्हास दादा पवार ने कहा, काव्य, संगीत और अध्यात्म के अद्वितीय संगम वाली इस गीत रामायण श्रृंखला ने कई पीढ़ियों को संस्कार, आदर्श और भक्ति का संदेश दिया है. विदिशा विचार मंच के समन्वयक नितिन जलूकर ने प्रास्ताविक किया, जबकि राजेश दामले ने मंच संचालन और आभार प्रदर्शन किया.
सांस्कृतिक जगत में बनाया अमिट स्थान कृष्णकुमार गोयल ने कहा, संगीत जगत की एक अमर कृति के रूप में इस गीतमाला ने मराठी सांस्कृतिक वेिश में एक अमिट स्थान बनाया है. डॉ. राजेश शाह ने कहा, गीत रामायण केवल गीतों का संकलन नहीं है, बल्कि मराठी मन के भाव-जगत को समृद्ध करने वाला एक सांस्कृतिक महाकाव्य है.