जिला बैंक साइबर सिक्योरिटी सेंटर का उपयोग करें

सहकार विभाग के सचिव प्रवीण दराडे के निर्देश, देश में 42 प्रतिशत लेन-देन डिजिटल माध्यम से हो रहे

    27-May-2026
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वाशी (नवी मुंबई), 26 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जिला बैंकों के लेन-देन को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सहकारी बैंक ने नवी मुंबई के वाशी में अत्याधुनिक ‌‘साइबर सिक्योरिटी सेंटर‌’ शुरू किया है. इससे बैंकों के सर्वर पर होने वाले साइबर हमलों को रोकने में अच्छी सफलता मिली है. हालांकि, ढाई वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद भी केवल राज्य के पांच जिला बैंक ही इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं. राज्य के सभी जिला बैंकों को इस सुविधा का उपयोग करना चाहिए, ऐसे निर्देश सहकार विभाग के सचिव प्रवीण दराडे ने जारी किए हैं. यह जानकारी राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक विद्याधर अनास्कर ने दी. विद्याधर अनासकर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट आधारित डिजिटल लेनदेन में तेजी से वृद्धि हुई है. वर्तमान में देश के 42 प्रतिशत लेन-देन डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं. इसी के साथ साइबर हमलों की संख्या भी बढ़ी है और लोगों का पैसा बैंकों में भी असुरक्षित होने लगा है. राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जिला बैंकों की रकम सुरक्षित रहे, इसके लिए चार वर्ष पहले राज्य सहकारी बैंक ने वाशी में 40 करोड़ रुपये खर्च कर अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित साइबर सिक्योरिटी सेंटर स्थापित किया है. ढाई वर्ष पहले यह प्रयोगशाला प्रत्यक्ष रूप से शुरू हुई और यहां 35 कम्प्यूटर अभियंता कार्यरत हैं. राज्य में कुल 31 जिला बैंक हैं, लेकिन अब तक केवल चार बैंकों ने ही इस सुविधा का लाभ लिया है. साइबर हमलों से जनता की रकम सुरक्षित रहे, इस उद्देश्य से शुरू की गई इस सेवा का लाभ अन्य जिला बैंकों को भी लेना चाहिए, ऐसे निर्देश सहकार आयुक्त प्रवीण देवरे ने सभी जिला बैंकों को दिए ह्‌ैं‍. इस सेंटर में 50 बैंकों को सेवा प्रदान करने की क्षमता है. साइबर सिक्योरिटी सेंटर के उद्देश्य राज्य बैंक और अन्य सहकारी बैंकों को ज्ञात तथा अज्ञात दोनों प्रकार के संभावित साइबर हमलों से सुरक्षित रखना. साइबर हमलों का शुरुआती चरण में ही पता लगाकर उन पर प्रभावी नियंत्रण करना, ऐसे हमलों को विफल करना तथा संभावित खतरों को लेकर बैंकों को सूचना और अलर्ट देना. कम्प्यूटर संबंधी जानकारी चोरी कर सहकारी बैंकों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए प्रयासों को विफल करना और संभावित खतरों से उनकी सुरक्षा करना. कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार निगरानी कर संभावित खतरों का पता लगाना और बैंकों को अलर्ट देना. हमलों के संभावित मार्गों की पहचान करना, बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन करना और उन्हें आवश्यक सुरक्षा संबंधी सुझाव देना. रिजर्व बैंक, नाबार्ड और केंद्र सरकार के नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक प्रणाली के माध्यम से बैंकों को रिपोर्ट तैयार करने में सहायता करना.  
 
साइबर सिक्योरिटी सेंटर बनाने वाला पहला राज्य

 वाशी में स्थापित साइबर सिक्योरिटी सेंटर में जिला बैंकों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जिला बैंकों को आधुनिक तकनीक के युग में अधिक सक्षम बनाने के लिए राज्य सहकारी बैंक द्वारा ऐसी सुविधा तैयार करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है. - विद्याधर अनासकर, प्रशासक, राज्य सहकारी बैंक