दो वर्षीय मासूम को मिला नया जीवन

    28-May-2026
Total Views |
bsfb
लवले, 27 मई (आ.प्र.)

सिर्फ दो साल के एक मासूम बच्चे पर अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी करके डॉक्टरों ने उसे मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. पेट में तेज दर्द, उल्टी, लगातार बुखार और बढ़े हुए बिलीरुबिन (पीलिया) जैसे गंभीर लक्षणों के साथ इस बच्चे को सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था. जांच के बाद, बच्चे में ‌‘इंफेक्टेड कोलेडोकल सिस्ट‌’ (पित्त नली की बड़ी गांठ) और ‌‘फलमिनेंट कोलेंजायटिस‌’ (पित्त नली का गंभीर संक्रमण) नामक एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा बीमारी का निदान हुआ था. शुरुआत में, मेडिकल टीम ने ‌‘आईवी एंटीबायोटिक्स‌’ देकर बच्चे की स्थिति को स्थिर करने का प्रयास किया. हालांकि, बच्चे के खाने-पीने बंद कर देने और स्थिति लगातार बिगड़ने के कारण तुरंत सर्जरी करने का निर्णय लिया गया. संक्रमण के कारण पित्त नली के आस-पास का हिस्सा पूरी तरह से जम गया था और वह गांठ मुख्य रक्त वाहिकाओं से मजबूती से चिपकी हुई थी. ऐसी अत्यंत जोखिम भरी स्थिति में, पीडियाट्रिक सर्जरी टीम ने बेहद सटीकता के साथ ‌‘एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी‌’ करके उस गांठ को सफलतापूर्वक बाहर निकाला और ‌‘हेपेटिकोजेयुनोस्टॉमी‌’ की जटिल प्रक्रिया को पूरा किया. विशेषज्ञ शल्यचिकित्सक डॉ. कल्पेश पाटिल और डॉ. रायबा देशमुख ने अपने कौशल और समर्पण से इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाया. डॉ. इंद्राणी और उनकी टीम ने पूरे ऑपरेशन के दौरान बेहद सुरक्षित तरीके से एनेस्थीसिया को संभाला. सर्जरी यूनिट-2 की डॉ. प्रीति शाह के मार्गदर्शन में काम करने वाली टीम और डॉ. ए.आर. राजन (यूनिट 1) की देखरेख वाली पीआईसीयू टीम द्वारा की गई विशेष देखभाल के कारण ही बच्चा इतनी तेजी से ठीक हो सका. समन्वय और मरीजों के प्रति निष्ठा अस्पताल प्रशासन ने कहा कि, ऐसा तालमेल, समन्वय और मरीजों के प्रति निष्ठा ही उत्तम मरीज सेवा का सच्चा प्रतीक है. बच्चों की ऐसी ही अत्यंत जटिल सर्जरी को सफल बनाने के लिए सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर सदैव प्रतिबद्ध है.