पिछले सप्ताह चंद्रपुर जिले में एक बाघिन और उसके शावकाें के हमले में चार महिलाओं की माैत हाे गई् .इस तरह के मानव-वन्यजीव संघर्ष काे राेकने के लिए सरकार द्वारा 260 कराेड़ की याेजना मंजूर की गई है . इस पूरी परियाेजना का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवाें द्वारा मनुष्याें पर हाेने वाले हमलाें काे राेकना है. इससे ग्रामीणाें काे पशुओं की गतिविधियाें के बारे में तुरंत जानकारी मिलेगी, जिससे वे सतर्क रह सकेंगे.इसके अलावा, पकड़े गए वन्यजीवाें के लिए बचाव केंद्र बनाए जाएंगे और पशुओं की चिकित्सा देखभाल के लिए दस ट्रांजिट उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे . इससे ग्रामीणाें काे पशुओं की गतिविधियाें के बारे में तुरंत जानकारी मिलेगी, जिससे वे सतर्क रह सकेंगे .
इसके अलावा, पकड़े गए वन्यजीवाें के लिए बचाव केंद्र बनाए जाएंगे और पशुओं की चिकित्सा देखभाल के लिए दस ट्रांजिट उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे . मानव-वन्यजीव संघर्ष काे राेकने के अपने प्रयास में, राज्य वन्यजीव बाेडकी स्थायी समिति ने पहले चरण में दस स्थानाें पर नियंत्रण कक्षाें की स्थापना, एक हजार गांवाें में एआई-आधारित चेतावनी प्रणाली की तैनाती और राज्य भर में दाे बचाव केंद्र और दस उपचार केंद्र बनाने काे मंजूरी दी है . समिति के अध्यक्ष और वन मंत्री गणेश नाइक ने कहा कि लगभग 260 कराेड़ रुपये की इस परियाेजना का उद्देश्य वन्यजीवाें द्वारा मनुष्याें पर हाेने वाले हमलाें काे राेकना है . पिछले सप्ताह चंद्रपुर जिले में एक बाघिन और उसके शावकाें के हमले में चार महिलाओं की माैत हाे गई् . यह घटना इस साल जिले में दर्ज की गई बाघ के हमलाें की सातवीं घातक घटना है .
कार्य याेजना के अनुसार, पुलिस नियंत्रण कक्षाें की तर्ज पर राज्य के विभिन्न हिस्साें में दस नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे . ये नियंत्रण कक्ष अत्याधुनिक डिजिटल प्रणालियाें से सुसज्जित हाेंगे, जिनसे वन विभाग के संसाधनाें, वाहनाें और गश्ती इकाइयाें पर नज़र रखी जा सकेगी. मंत्री नाइक ने कहा कि मानववन्यजीव संघर्ष की स्थिति में, ये नियंत्रण कक्ष संबंधित पक्षाें काे तुरंत सूचित करेंगे ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके.वन क्षेत्राें के बाहर जंगली जानवराें का पता चलने पर ग्रामीणाें काे सूचित करने के लिए, एआई-आधारित अलर्ट सिस्टम - जिसे पहले से ही वनाें से सटे गांवाें में प्रायाेगिक आधार पर लागू किया गया है - अब राज्य भर के लगभग एक हजार गांवाें में विस्तारित किया जाएगा .जंगली जानवराें काे बचाने के लिए बीस त्वरित बचाव दल गठित किए जाएंगे .
वन-सीमावर्ती गांवाें की सुरक्षा के लिए वन विभाग काे सहयाेग देने हेतु दाे हजार प्राथमिक प्रतिक्रिया दल बनाए जाएंगे.