मांसपेशियां व हड्डियों के दर्द में उनकी गंभीरता के अनुसार इलाज किया जाता है. इसमें सर्जरी एक महत्वपूर्ण उपाय होता है. पेशेंट को जल्दी ठीक होने और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पहले जैसी आसान करने में फिजियोथेरेपिस्ट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. फिजियोथेरेपिस्ट की मदद से पेशेंट जल्दी ठीक हो सकता है. इस बारे में पूछे गए प्रश्नों के विस्तार से उत्तर देकर पुणे स्थित साईश्री विटालाइफ के संचालक और स्पोर्ट्स इंजुरी विशेषज्ञ डॉ. नीरज आडकर ने शंकाओं का समाधान किया. सर एक क बड्डी क डॉ. नीरज आडकर चीफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पोर्ट्स इंजरी सर्जन चेयरमैन, साईश्री विटालाइफ हॉस्पिटल.
सवाल : अस्थिबंधन (Ligament) शल्यक्रिया की सफलता दर पर उम्र का क्या असर होता है?
जवाब : युवा, खासकर खिलाड़ी हो तो अस्थिबंधन शल्यक्रिया के बाद शीघ्रता से ठीक होते हैं और अपने काम में अधिक उत्साह से भाग ले सकते हैं. फिर भी वृद्ध/ प्रौढ़ रुग्ण अगर कार्यक्षम हो या अस्थिरता की भावना हो तो शल्यक्रिया से लाभ होता है. सफल शल्यक्रिया में उम्र के कारण अड़चनें नहीं होतीं किन्तु अधिक उम्र के कारण ठीक होने में समय लगता है और स्नायु कड़े होते है. व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवनपद्धति पूर्ववत होने की प्रक्रिया का सुनियोजन हो तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है. सभी उम्र के लोगों के लिए उचित नियोजन तथा उस पर अमल यह सफलता की चाबी है.
सवाल : नमस्ते सर, मैं एक कबड्डी का खिलाड़ी, नगर का रहने वाला हूं. मुझे जो समस्या हुई है, उस का निदान “ ALC Injury’ किया गया है और सर्जन ने शल्यक्रिया की सलाह दी है. अस्थिबंधन मरम्मत की शल्यक्रिया के बाद पूर्ववत होने के लिए कौन से पायदान सबसे अधिक निर्णायक हैं?
जवाब : अस्थिबंधन मरम्मत की शल्यक्रिया के बाद सफल परिणाम के लिए पूर्ववत होना अत्यावश्यक है. सबसे महत्वपूर्ण पायदानों में हालचाल के लिए जल्दी व्यायाम आरंभ करना, जोड़ के आजू-बाजू के स्नायु की (विशेषत: क्वाड्रीसेप्स और हैमस्ट्रिग्स) ताकत बढ़ाना, संतुलन ठीक करना तथा इसमें समन्वय का अंतर्भाव होता है. पूर्ववत होने की कालावधि में वेदना का व्यवस्थापन तथा सूजन पर नियंत्रण इन बातों से रोगी कार्य करने हेतु सक्षम रहता है. इस के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के मार्गदर्शन हो तो फिर से समस्या होने का खतरा कम होता है. ये आवश्यक बातें टालने से या काम करने की जल्दबाजी से अड़चनों या अस्थिरता का सामना हो सकता है.
सवाल : डॉक्टर, रोबोटिक्स का बढ़ता प्रसार देखते हुए पारंपरिक TKR और रोबो की मदद से TKR इन दोनों में महत्वपूर्ण फर्क क्या है क्या यह आप बता सकते है?
जवाब : पूरा घुटना बदलने की पारंपरिक शल्यक्रिया पूरी तरह सर्जन के हस्तकौशल्य पर निर्भर होती है. मात्र रोबो की सहायता से की जाने वाली शल्यक्रिया में एडवांस्ड तकनीक का मार्गदर्शन होता है. रोबोटिक पद्धति में 3 डी नियोजन और अचूक नाप होने के कारण पुन:रोपण करने में अधिक बेहतर संयोजन हो सकता है. आस-पास के नरम टिश्यू की हानि कम होती है. दोनों पद्धतियों में वेदना मुक्ति तथा काम फिर से शुरू करना यह साध्य रहता है. किन्तु रोबोटिक TKR में अधिक अचूकता, खासकर जटिल केस में संभव होती है.
सवाल : मेरे पिताजी को घुटना बदलने की सलाह दी गई है. मेरा आग्रह रोबोटिक शल्यक्रिया का है लेकिन मेरे पिताजी नहीं चाहते. मुझे यह जानना है कि घुटना बदलने की रोबोटिक पद्धति क्या पारंपरिक पद्धति से अधिक अचूक और प्रभावशाली है? जवाब : रोबोटिक शल्यक्रिया में नरम टिश्यू का समतोल (बैलेंसिंग) तथा नए घुटने की संरचना में अचूकता अधिक होती है. अच्छी संरचना यानि जोड़ों की अधिक सुधारित रिकवरी तथा रिप्लेस हुआ घुटना लंबे समय तक टिकने की संभावना बढ़ती है. कुछ प्रकार के स्टडी दर्शाते है कि रोबोटिक शल्यक्रिया के कारण ठीक होने की प्रक्रिया गतिशिल होती है और रोगी को वेदना भी कम होती है. इस के बावजूद रोबोटिक तथा पारंपरिक पद्धति के दीर्घकालीन परिणामों पर स्टडी आज भी चालू है. शल्यचिकित्सक का कौशल्य, अनुभव तथा चुनी हुई तकनीक ये बातें अत्यधिक महत्व की है.
सवाल : डॉक्टर, रोबोटिक पद्धति से घुटना बदलने से अधिक लाभ होने वाली खास शल्यक्रियाएं हैं क्या?
जवाब : हां. हड्डियों की असाधारण रचना, पहले की गई शल्यक्रियाएं या जटिल विकृति वाले रुग्ण को रोबोटिक शल्यक्रिया की अचूकता से लाभ होता है. इसके अलावा हमेशा काम करने वाले अथवा जल्दी ठीक होने की चाह रखने वाले रोगी भी रोबोटिक TKR पसंद करते हैं. पुन:रोपण प्रक्रिया में अधिक अचूकता आवश्यक होने की स्थिति में यह पद्धति उपयुक्त है, फिर भी सर्वसाधारण रोगी के लिए रोबोटिक पद्धति का सुधारित नियोजन तथा सामंजस्य लाभदायक होता है. आप के आर्थोपेडिक शल्यचिकित्सक के साथ चर्चा उपयुक्त और फायदेमंद साबित होती है.
सवाल : मेरी आयु 60 साल की है और मुझे जाइंट बदलने की सलाह दी गई है. 3 साल पहले मेरे पत्नी की TKR पारंपरिक पद्धति से की गई और अब उसे बिल्कुल तकलीफ नहीं. किन्तु मेरी उम्र के हिसाब से मुझे पूछना है कि मुझे रोबोटिक की सलाह दी गई है तो पारंपरिक या रोबोटिक पद्धति से घुटना बदलें तो दोनों के कारण पूर्ववत होने में कितना समय लगता है?
जवाब : कुल मिला कर पारंपरिक या रोबोटिक पद्धति से TKR के कारण पूर्ववत होने में कालावधि समान यानि रोजमर्रा के काम के लिए 6 हप्ते और पूरी तरह ठीक होने में 3 से 6 महीने लगते हैं. किन्तु रोबोटिक पद्धति से TKR करने से कुछ रोगी कम वेदना का अनुभव करते है तथा वे जल्दी रिकवरी कर सकते हैं. इससे रोज के काम आवश्यक समय से पहले आरंभ कर सकते है. दीर्घकालीन परिणाम करीब करीब समान होते है लेकिन रोबोटिक पद्धति से पूर्ववत होने की क्रिया अधिक सुलभ और कम तकलीफ देने वाली होती है. रोबोटिक पद्धति से TKR में अचूक छेद दिया जाता है जिस से अचूकता आती है और आस-पास के नरम टिश्यू की हानि कम होती है. इसलिए रोबोटिक्स उचित सिद्ध होता है . सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि फिजियोथेरेपिस्ट को सौंप देने से बड़ा फर्क पड़ता है.
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