सोशल मीडिया से दूर रहकर खुद को पहचानें

वरिष्ठ अभिनेता संजय मिश्रा द्वारा छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने व सीखने की सलाह

    03-May-2026
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कोथरुड, 2 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

हम खुद को भूलकर दुनिया की तलाश कर रहे हैं. ऐसे समय में, सोशल मीडिया को एक तरफ रखकर खुद को पहचानें. भीड़ का हिस्सा न बनें, बल्कि स्वतंत्र रूप से सोचना सीखें, यह सलाह वरिष्ठ अभिनेता संजय मिश्रा ने छात्रों को दी है. वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के दादासाहेब फालके इंटरनेशनल फिल्म स्कूल में अत्याधुनिक स्टूडियो के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय छात्र फिल्म महोत्सव की घोषणा और एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी संपन्न हुआ. कोथरुड स्थित एमआईटी डब्ल्यूपीयू के विवेकानंद सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में निर्देशक नागराज मंजुले, अभिनेता संतोष जुवेकर, दादासाहेब फालके अंतरराष्ट्रीय फिल्म संस्थान के मेंटर अभिजित पानसे और सिनेमैटोग्राफर प्रशांत महोपात्रा सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल वेिशनाथ कराड ने की. इस अवसर पर नागराज मंजुले ने कहा, किसी भी फिल्म को बनाने के लिए साधन अत्यंत आवश्यक हैं. लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि आपके दिमाग में विचार होने चाहिए और उन विचारों में स्पष्टता होनी चाहिए. अभिनेता संतोष जुवेकर ने भी शुभकामनाएं दीं. राज्य के मंत्री उदय सामंत ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित किया. प्रस्तावना के दौरान एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ.आर.एम.चिटणीस ने बताया कि एमआईटी डब्ल्यूपीयू का यह स्टूडियो एशिया में सर्वश्रेष्ठ है.अभिजीत पानसे ने स्वागत भाषण दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ.गौतम बापट ने किया और अरुण प्रकाश ने आभार व्यक्त किया.  
 
मूल्यों की शिक्षा जरुरी

 डॉ. राहुल वेिशनाथ कराड ने कहा, समाज शिक्षा का कार्य फिल्में प्रभावी ढंग से कर सकती हैं, इसलिए शिक्षण संस्थानों और अभिनेताओं को साथ आकर समाज शिक्षा के लिए कार्य करना चाहिए. व्यावसायिक सिद्धांतों का पालन निश्चित रूप से किया जाता है, लेकिन शिक्षा कभी व्यवसाय नहीं हो सकती; और इस मूल्य को हमने हमेशा संजोया है. हम लोकतांत्रिक मूल्यों की शिक्षा देते हैं. मानसिक रूप से हमने हमेशा पश्चिमी देशों को श्रेष्ठ माना है और स्वयं को दोयम दर्जे का (नीचा) समझा है. वास्तविकता ऐसी नहीं है. हमें एक इंसान के रूप में आगे आकर ठोस कार्य करने चाहिए.