तंबाखू के स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए 31 मई को वेिश तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है. दुनिया भर में तंबाकू के कारण हर साल लगभग 80 लाख मौतें होती हैं. फेफड़ों का कैंसर, मुंह का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और पक्षाघात (स्ट्रोक) जैसी बीमारियों के लिए तंबाकू सीधे तौर पर जिम्मेदार है. इसके बावजूद युवाओं में धूम्रपान का प्रमाण अभी भी बढ़ रहा है. दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष के आयु वर्ग के अनुमानित 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट का उपयोग करते हैं. इसलिए उन्हें जीवन भर के व्यसन का खतरा बहुत बढ़ जाता है. इसी वजह से तंबाकू के हमारे शरीर पर विनाशकारी प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना अत्यंत आवश्यक है. इस अवसर पर प्रसिद्ध कैंसर (ऑन्को) सर्जन डॉ. गजानन कानिटकर ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.
धूम्रपान, चबाना या नाक से सूंघना जैसी किसी भी तरह से सेवन की गई तंबाकू के शरीर पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. सभी कैंसर से होने वाली मौतों में से 30% और फेफड़ों के कैंसर के कारण होने वाली मौतों में से 80% मौतें धूम्रपान के कारण होती हैं. फेफड़ों का कैंसर, जिसके लिए धूम्रपान एक प्रमुख जोखिम कारक है, पुरुषों और महिलाओं दोनों में कैंसर से होने वाली मौत का प्रमुख कारण है. धूम्रपान से 18 प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. सीओपीडी का तंबाकू एक प्रमुख कारण है. यह फेफड़ों की वायु थैलियों और श्वसन नलिकाओं का एक प्रगतिशील और अपरिवर्तनीय विनाश है. तंबाकू के कारण एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनीकाठिन्य) बढ़ता है, रक्तचाप बढ़ता है, दिल की धड़कन बढ़ जाती है, हृदय को होने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉट्स) बनने को बढ़ावा मिलता है. तंबाकू से होने वाले रक्तवाहिकाओं के नुकसान के कारण अंगों को होने वाली रक्त आपूर्ति कम हो जाती है. इसके कारण दर्द होता है, हरकतों पर सीमाएं आती हैं और कई मामलों में अंग को काटना पड़ता है. महिलाओं में तंबाकू के उपयोग के कारण प्रजनन क्षमता कम होना, गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं, समय से पहले जन्म, कम वजन का बच्चा और जल्दी रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. पुरुषों में तंबाकू के कारण शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम होती है और स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) से इसका संबंध जोड़ा जाता है. तंबाकू के सेवन से टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाता है और जिन्हें पहले से ही मधुमेह का निदान हुआ है, उनके रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) पर नियंत्रण रखना अधिक कठिन हो जाता है. तंबाकू का धुआं माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस से रक्षा करने वाली ेशसन मार्ग की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचाता है. सिगरेट, सिगार और पाइप के धुएबनने वाले कम कम रसायन होते कई रसायन आपके डीएनए को नुकसान पहुंसकते हैं, जो यह नियंत्रित करता है कि आपका शरीर नई कोशिकाएं कैबनाता है और प्रत्येक प्रकार की कोशिका को उसके मूल कार्य का निर्देश देता है. केवल धूम्रपान करने वाले लोगों को ही तंबाकू के धुएं के कारण कैंसर हो सकता है ऐसा नहीं है. उनके आसपास के लोग, उनके बच्चे, मित्र, सहकर्मी और अन्य लोग भी वह धुआं सांस के माध्यम से अंदर लेते हैं.
धूम्रपान छोड़ने के परिणाम तुरंत दिखाई देते हैं
-20 मिनट के भीतर दिल की धड़कन और रक्तचाप कम हो जाते हैं 12 घंटे के भीतर रक्त में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर
सामान्य हो जाता है
-2 से 12 सप्ताह के भीतर रक्त परिसंचरण (ब्लड सर्कुलेशन) में सुधार होता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ जाती 1 से 9 महीने के भीतर खांसी और सांस फूलने का प्रमाण कम हो जाता है
-धूम्रपान छोड़ने के एक वर्ष बाद कोरोनरी हृदय रोग का खतरा धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में आमतौर पर आधा हो जाता है धूम्रपान छोड़ने के 5 से 15 वर्षों की अवधि में पक्षाघात (स्ट्रोक) का खतरा उस व्यक्ति जितना कम हो जाता है जिसने
कभी धूम्रपान नहीं किया
-धूम्रपान छोड़ने के 10 वर्ष बाद फेफड़ों के कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु का प्रमाण धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की तुलना में आधा हो जाता है और कैंसर का कुल खतरा भी कम हो जाता है धूम्रपान छोड़ने के 15 वर्ष बाद कोरोनरी हृदय रोग का खतरा उस व्यक्ति जितना ही होता है, जिसने जीवन में कभी धूम्रपान नहीं किया.
उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य के खतरों से बचने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें
यदि आप तंबाकू का सेवन नहीं करते हैं, तो इसे कभी शुरू न करें! यदि आप तंबाकू का सेवन करते हैं, तो इसे तुरंत बंद करें! आप चाहे कितने भी लंबे समय से तंबाकू का सेवन कर रहे हों, फिर भी इसे बंद करने से आपके कैंसर और अन्य पुरानी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है.
निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो वे कैंसर के खतरे के संकेत हो सकते हैं. सामान्य उपचार से ठीक न होने वाली लगातार खांसी या सांस फूलना तीन सप्ताह तक रहने वाली भारी आवाज या आवाज में बदलाव निगलने या बोलने में कठिनाई मुंह में सफेद धब्बों के साथ छाले छाती में दर्द या भारीपन महसूस होना. यह हृदय और रक्तवाहिकाओं संबंधी समस्या, फेफड़ों की बीमारी या दोनों को दर्शा सकता है लगातार थकान और व्यायाम करने की कम क्षमता बार-बार ेशसन मार्ग का संक्रमण मसूड़ों का पीछे खिसकना, दांतों का सड़ना या मसूड़ों से खून आना * आंतों की आदतों में गड़बड़ी, कब्ज या दस्त.