अनिंदिता गर्ग कोच और मेंटॉर
जीवन का असली सुख शांति और स्वास्थ्य में छुपा हुआ है, इन्हीं विचारों के साथ ‘ऊंचाई’ नामक संस्था अग्रवाल समाज के विभिन्न घटकों को एक साथ लाकर कार्यरत है. ‘ऊंचाई’ में लगभग 180 सदस्य जुड़े हुए हैं और संगठन द्वारा योग, ध्यान, एडवेंचर, स्पोर्ट्स और विभिन्न स्वास्थ्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता है. ‘ऊंचाई’ की एक विशेष पहल ‘मन की बात’ भी है, जिसमें प्रत्येक रविवार को ‘दै. आज का आनंद’ में अग्रवाल समाज के सदस्य अपने विचार, अनुभव, भावनाएं, स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान और जीवन के महत्वपूर्ण सुझाव साझा करते हैं. इसी कड़ी में यह लेखमाला ‘ऊंचाई’ की ओर से प्रस्तुत की जा रही है.
भारतीय संस्कृति में ‘नारी तू नारायणी’ का उद्घोष और अग्रवाल समाज की समृद्ध परंपराओं में महिलाओं को ‘लक्ष्मी’ का स्वरूप मानना, सामाजिक समरसता का एक गौरवशाली उदाहरण है. हमारे परिवारों की सुखसमृि द्ध और ऐश्वर्य का आधार घर की स्त्री ही मानी गई है, लेकिन इस गौरव के साथ एक आधुनिक और गहरी समझ का होना भी अनिवार्य है- और वह है ‘स्वयं की खुशहाली’. अग्रवाल समाज में नारी को जो उच्च दर्जा प्राप्त है, उसकी वास्तविक सार्थकता तब और बढ़ जाती है जब महिला अपनी सेहत और मानसिक प्रसन्नता को भी प्राथमिकता देने लगती है. अक्सर सबको खुश रखने की निस्वार्थ कोशिश में महिलाएं स्वयं के स्वास्थ्य को सूची में सबसे अंत में रखती हैं, जबकि जीवन का एक बुनियादी सत्य यह है कि जो आपके पास स्वयं के लिए उपलब्ध नहीं है, वह आप दूसरों को भला कैसे बांट सकते हैं?यदि एक स्त्री के पास स्वयं के लिए सकारात्मक ऊर्जा, शारीरिक सामर्थ्य और मानसिक शांति नहीं है, तो वह परिवार को संपूर्ण खुशहाली प्रदान करने में स्वतः ही असमर्थ हो जाती है. अस्वस्थ शरीर और मानसिक थकान अनजाने में उस चिड़चिड़ेपन को जन्म देती है, जो न चाहते हुए भी पूरे घर के परिवेश को प्रभावित करता है. इसी यथार्थ को समझते हुए ‘ऊंचाई’ आज एक प्रगतिशील ‘सोच’ के रूप में उभर रहा है, जो समानता और समान भागीदारी के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का संकल्प है. यहां महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे अपने सामाजिक दायरे का विस्तार करें, नए लोगों से मिलें और अपनी रुचियों को जीवंत रखें.
खुशियों व सेहत के लिए प्रेरित करने में ही नारी का सम्मान ‘ऊंचाई’ के स्वास्थ्य संबंधी आयोजनों में आज महिलाओं की भागीदारी केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि वे नेतृत्व की भूमिका में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बराबरी से खड़ी हैं. यह मंच इस विश्वास को दृढ़ करता है कि नारी को केवल सम्मान के ऊंचे आसन पर बिठाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक ‘इंसान’ के रूप में अपनी खुशियों और सेहत का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करना ही वास्तविक सम्मान है. जब घर की मुख्य धुरी स्वस्थ और प्रसन्न होगी, तभी पूरा परिवार और समाज सही मायने में प्रगति की वास्तविक ‘ऊंचाई’ को स्पर्श कर पाएगा.