शिवाजीनगर, 30 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) ‘भारतीय जैन संगठन’ (बीजेएस) द्वारा आयोजित ‘जैन पारिवारिक अदालत’ क्रम में मंगलवार, 26 मई को शिवाजीनगर, पुणे स्थित वर्धमान प्रतिष्ठान में तीसरी मेगा अदालत आयोजित की गई थी. इस अदालत में 14 मामलों की सुनवाई की गई. इस अवसर पर ‘बीजेएस’ के संस्थापक शांतिलाल मुथ्था, सेवानिवृत्त न्यायाधीश (उच्च न्यायालय) के.के. तातेड़, बीजेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकिशोर सांखला, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गौतम बाफना, मैनेजिंग डायरेक्टर कोमल जैन, राष्ट्रीय सचिव दीपक चोपड़ा, राष्ट्रीय प्रमुख (कम्युनिकेशन) विलास राठोड, राष्ट्रीय प्रमुख (एक्सपेंशन) ओमप्रकाश लुनावत, राष्ट्रीय प्रमुख (एक्सपेंशन) विजय जैन, राष्ट्रीय प्रमुख (सोशल मीडिया) आदेश आर. चंगेडिया एवं वरिष्ठ पदाधिकारी रमेश नवलखा सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे. समाज में कुटुंब व्यवस्था को सशक्त बनाने एवं वैवाहिक विवादों का संवेदनशील समाधान करने के उद्देश्य से भारतीय जैन संगठन (बीजेएस) ने जैन पारिवारिक अदालत नामक एक अत्यंत संवेदनशील एवं आवश्यक कार्यक्रम की शुरुआत की है. जनवरी 2026 से प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम निरंतर प्रभावी रूप से समाज में वैवाहिक मामलों को सुलझाने का कार्य कर रहा है. मात्र 4 माह में बीजेएस के पास 100 से अधिक मामले पहुंचे हैं, जिनमें से 49 मामलों का सकारात्मक समाधान किया जा चुका है. मामलों की काउंसलिंग हेतु बीजेएस हेड ऑफिस में प्रोफेशनल काउंसलर्स की नियुक्ति भी की गई है. साथ ही, इस प्रोग्राम के व्यवस्थित संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी हेड ऑफिस में नियुक्त विशेष टीम द्वारा निभाई जा रही है. जैन पारिवारिक अदालत केवल विवादों का समाधान करने का मंच नहीं, बल्कि कुटुंब व्यवस्था को सशक्त करने, परिवारों को टूटने से बचाने, एवं समाज में सकारात्मक पारिवारिक वातावरण निर्माण करने की एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आ रही है. विभिन्न जिलों में पारिवारिक अदालत समितियों का गठन ज्ञात हो कि पूर्व में बीजेएस संस्थापक एवं प्रसिद्ध समाजसेवी शांतिलाल मुथ्था द्वारा वर्ष 1990 से 2006 के बीच ‘कौटुंबिक लवाद’ नाम से इस पहल को पूरे महाराष्ट्र में संचालित किया जा चुका है. उस दौरान भी इस प्रोग्राम के माध्यम से महाराष्ट्र के हजारों परिवारों को राहत प्राप्त हुई थी. आज उसी पहल को और अधिक व्यवस्थित, संवेदनशील एवं प्रभावी स्वरूप प्रदान करते हुए ‘जैन पारिवारिक अदालत’ के रूप में देशभर के जैन समाज के लिए लागू किया जा रहा है. इस प्रोग्राम के सुचारू एवं प्रभावी संचालन के लिए विभिन्न जिलों में पारिवारिक अदालत समितियों का गठन किया गया है, जिनमें जैन समाज के वरिष्ठ अधिवक्ता, सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं बीजेएस के वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल हैं.