तेजपत्ता र्सिफ सब्जी काे स्वादिष्ट बनाने के लिए ही नहीं बल्कि आयुर्वेद के अनुसार आप इन्हें घरेलु उपचार में भी उपयाेग में ला सकते है. यह आयुर्वेद की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी हाेते है. सिर में दर्द, गर्मी या ठण्ड लगने से हाे रहा हाे ताे तेजपात की डंठल व 3-4 पत्ताें काे पानी में पीसकर जरा गर्म कर लें. इसका लेप सिर दर्द क खत्म करता है. 2-3 बार इसका लेप करें. लाभ हाेगा.जुकाम पतला हाे या सख्त, छींके आती हाें या नाक बहती हाे. जीभ का स्वाद खराब हाे गया हाे और नाक में जलन महसूस हाे, तेजपात की चाय पीने से पूर्ण लाभ हाेगा. यहचाय दिन में तीन बार तक ले सकते हैं.तेजपात की चटनी, इसका अवलेह दिन में दाे बार लेने से कफ पतला हाेगा. आसानी से निकलेगा.
राेगी स्वस्थ हाेगा. भाेजन न पचता हाे, देर तक पेट और दिमाग में भारीपन लगे. दमा जैसे नामुराद राेग से जब व्यक्ति पीड़ित हाेता है ताे बहुत बार छटपटाता है. ऐसे राेगियाें के लिए भी तेजपात लाभकारी है. तेजपात काे धूप में सुखा कर पाउडर बना लें. चावल, पुलाव, सब्जी मीट, तरकारी बनाते समय 2-3 पत्ते डाल देने से तथा नियमित तेजपात का सेवन करने से, राेगाें पर नियंत्रण बना रहेगा.हर घर में सस्ता, सुलभ तेजपात हाेना ताे जरूरी है ही, इसका प्रयाेग भी हाेता रहना चाहिए. जिस घर में बुजुर्ग महिलएं हाेती है, वे इसके पत्ताें का अच्छा महत्व समझती हैं.वे इनका प्रयाेग करने में भी कभी कंजूसी नहीं करतीं. भाेजन काे सुपाच्य तथा सुगंधित बना देता है तेजपात का बहुत सस्ता पत्ता.