जिला मजिस्ट्रेट गाेद लेने संबंधी कार्यवाही पर निर्णय लेने के लिए सक्षम : बाॅम्बे हाईकाेर्ट

    07-May-2026
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HC 
 
बाॅम्बे उच्च न्यायालय ने साेमवार काे एक महत्वपूर्ण फैसले में किशाेर न्याय (जेजे) अधिनियम में 2021 के संशाेधन की वैधता काे बरकरार रखा है. अदालत ने स्पष्ट किया कि अब जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) दत्तक ग्रहण (गाेद लेने) संबंधी कार्यवाही की सुनवाई करने और आदेश जारी करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं.न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की पीठ ने इस संबंध में दायर याचिकाओं काे खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं के तर्काें काे निराधार बताया. यह मामला दाे दंपतियाें द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा था, जिन्हाेंने संशाेधन काे इस आधार पर चुनाैती दी थी कि गाेद लेने की मंजूरी देना एक न्यायिक कार्य है. उनका तर्क था कि जिला मजिस्ट्रेट के पास इस जटिल कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक विशेषज्ञता नहीं हाे सकती और यह शक्ति अदालताें से छीनकर कार्यपालिका काे देना गलत है. हालाँकि, हाईकाेर्ट ने इन आशंकाओं काे खारिज कर दिया.
 
पीठ ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट जिले का सबसे वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी हाेता है और बच्चाें के कल्याण में कार्य करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त है.अदालत ने केंद्र सरकार के उस तर्क काे स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि अदालती कार्यवाही में हाेने वाली अत्यधिक देरी काे कम करने और गाेद लेने की प्रक्रिया काे तेज करने के लिए यह बदलाव किया गया था. अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संशाेधन के तहत जिला मजिस्ट्रेटाें काे इस जिम्मेदारी के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा.इस फैसले के बाद अब देश में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के लिए न्यायालय के आदेश के बजाय जिला मजिस्ट्रेट का वैध आदेश अनिवार्य हाेगा, जिससे प्रक्रिया में गति आने की उम्मीद है.