दुनिया का दुःख देखने पर अपना दुःख छाेटा लगेगा

    08-May-2026
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Osho 
 
तुम अपने दुःख से भी इसलिए पीड़ित हाे, क्योंकि तुम दुनिया का दुःख नहीं देख पा रहे हाे. अगर तुम दुनिया के दुःख देख पाओ, ताे तुम्हारे दुख बड़े छाेटे रह जाएंगे-इतने छाेटे कि उनसे पीड़ित हाेना बिल्कुल बेमानी मालूम पड़ेगा उसका जाे कारण है, वह यह नहीं कि बहुत दुःख तुम्हारे पास है. उसका कारण यह है कि तुम्हारे पास और दुःख ही नहीं हैं, जिनसे तुम तुलना कर सकाे. तुम्हारे पास काेई तुलना नहीं है.जीसस काे जिस दिन सूली लगी, उस दिन एक आदमी के दांत में दर्द था.उसकी पत्नी ने रात में कई बार उसकाे कहा कि ‘आज नींद नहीं आती मुझे, कल सुबह जीसस काे सूली लग जाएगी.’ पति ने कहा, ‘भाड़ में जाने दाे जीसस काे! मेरे दांत में दर्द है, इसकी ताे तुम्हें फिक्र नहीं है, जीसस की फिक्र में लगी हाे! मैं मरा जा रहा हूं, करवटे बदल रहा हूं, दवा ले रहा हूं, दर्द ठीक ही नहीं हाेता.’ सुबह वह उठकर बैठ गया है.
 
जाे भी निकलता है, वह जीसस की बात करता है, और कहता है, ‘सुना है तुमने कि जीसस काे सूली लग जाएगी?’ वह सुनता ही नहीं है! कहता है, ‘रात-भर साेया नहीं. दवा भी काम नही कर रही है. यह भी करता हूं, वह भी करता हूं, दांत का दर्द ही नहीं जाता.’फिर ताे जीसस सूली लिए हुए निकले दरवाजे से.लाेगाें ने कहा, देखाे ताे! देखाे ताे! उसने कहा, ‘्नया देखूं! दर्द इतना ज्यादा है कि रात-भर साे नही सका. दाे रात से नींद नहीं आयी, काेई दवा काम नही करती.’ अब जिसका दांत दुःख रहा हाे, वह ठीक ही कह रहा है कि जीसस काे सूली लग रही हाे, या न लग रही हाे, इससे ्नया लेना-देना! दांत में तकलीफ है, एक बड़ी बात है. लेकिन मेरा मानना है कि काश! वह आदमी भी जीसस की सूली देख सके ताे उसका दांत का दर्द चला जाय.
 
मेरा कहना यह है कि वह दांत का दर्द दिखायी इसलिए पड़ रहा है कि उस आदमी केखने का ढंग ही बहुत गलत है. इधर दुनिया में इतनी पीड़ाएं हैं, मेरी अपनी समझ यह है कि बुद्ध या महावीर कृष्ण या क्राइस्ट जैसे लाेगाें काे जाे काेई पीड़ा नहीं हुई दुःख नहीं हुआ, इसका कारण यह नहीं है कि उनकाे दुःख नहीं था, पीड़ा नहीं थी.उसका कुल यह कारण है कि उन्हें इतना दुःख दिखायी पड़ रहा था, इतनी पीड़ा दिखायी पड़ रही थी कि अपना दुःख और पीड़ा उनके वास्ते बेमानी थी.इसका एहसास ही चला गया था एक सीमा पर आकर. इसका अंतिम अर्थ यह है कि बात ही खत्म हाे गयी.यह बात ही बेमानी है कि मैं अपने दांत के दर्द की बात करूं. जहां दर्द- ही-दर्द है, पीड़ा-ही-पीड़ा है, वहां दांत के दर्द की बात एकदम बेहूदगी है. अगर दुनिया का दुःख तुम्हें दिखायी पड़ने लगे ताे तुम्हारा दुःख एकदम विलीन हाे जाएगा. इतना छाेटा लगेगा कि आप साेचेंगे- इसकाे भी ्नया दुःख कहना चाहिए?