भाेजशाला परिसर में जैन यक्षिणी अंबिका का मंदिर !

    09-May-2026
Total Views |
 
 

bhoj 
मध्य प्रदेश हाईकाेर्ट में बुधवार काे जैन समाज की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई हुई. इस याचिका में दावा किया गया कि भाेजशाला हिंदू-मुस्लिम का स्थान नहीं, बल्कि जैन समाज का तीर्थ स्थल है. जाे प्रतिमा वाग्देवी की बताई जा रही है, वह जैन समुदाय की आराध्य मां अंबिका की है. यह परिसर मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था. जैन याचिकाकर्ता ने हाई काेर्ट से अपील की कि उनके समुदाय काे पूजा करने का अधिकार दिया जाए.दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता सालेक चंद जैन ने एक जनहित याचिका में यह दावा किया है. यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई है, जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संरक्षित इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप काे लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षाें की ओर से दायर मामले पहले से ही हाईकाेर्ट में लंबित हैं. सालेक जैन के वकील दिनेश पी राजभर ने इंदाैर पीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता के समक्ष एएसआई के 2003 के एक आदेश काे चुनाैती दी.
 
इस आदेश के तहत हिंदुओं काे हर मंगलवार काे भाेजशाला परिसर के अंदर पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानाें काे शुक्रवार काे इस स्थल पर नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है. राजभर ने दावा किया कि भाेजशाला परिसर में कभी एक जैन मंदिर और एक गुरुकुल हुआ करता था. संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर जाेर देते हुए उन्हाेंने कहा कि संविधान के तहत जैन धर्म के अनुयायियाें काे भाेजशाला परिसर में पूजा करने का अधिकार है.राजभर ने तर्क दिया कि धार के राजा भाेज हिंदू और जैन, दाेनाें धर्माें के विद्वानाें के संरक्षक थे.
 
उनके अनुसार, 11वीं सदी के इस स्मारक में संचालित शैक्षिक केंद्र में जैन विद्वान भी माैजूद थे. राजभर ने ऐतिहासिक विवरणाें और पुरातात्विक सामग्रियाें का हवाला देते हुए दावा किया कि भाेजशाला की संरचना के कुछ हिस्साें पर जैन वास्तुकला का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकाेर्ट की इंदाैर बेंच 6 अप्रैल से भाेजशाला मंदिर-कमल माैला मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति के संबंध में दायर 5 याचिकाओं और एक रिट अपील पर नियमित रूप से सुनवाई कर रही है. हिंदू समुदाय भाेजशाला काे वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक काे कमाल माैला मस्जिद के रूप में पहचानता है.