पुणे में एफडीए द्वारा 462 मेडिकल की दुकानाें पर छापा

    01-Jun-2026
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FDA
 
पुणे में महाराष्ट्र एफडीए (फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन) द्वारा 462 मेडिकल की दुकानाें पर छापा मारा गया.285 के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गये ताे 79 के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किये. एफडीए के संयुक्त आयुक्त गिरीश हुकारे ने कहा कि कई दुकानाें पर नकली दवाएं बिक रही थीं.उन्हाेंने कहा- फार्मासिस्टाें की जगह अयाेग्य कर्मचारी दवाएं बेच रहे थे. कई मेडिकल स्टाेर में घटिया स्तर की दवाएं मिलीं. नियमाें का पालन न करने वाली 33 मैन्युफै्नचरिंग यूनिटस में से 18 काे भी सस्पेंड किया गया है. लाेगाें की जिंदगी के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी.समय-समय पर कार्रवाई जारी रहेगी. एफडीएने सप्लाई चेन काे दुरुस्त करने के लिए फार्मे सियाें, थाेक विक्रेताओं, निर्माताओं और स्टाेरेज यूनिट्स के खिलाफ कार्रवाई तेज़ कर दी है, और 285 लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं.
 
सार्वजनिक स्वास्थ्य काे खतरे में डालने वाले उल्लंघनाें के प्रति जीराे-टाॅलरेंस अपनाते हुए, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, पुणे विभाग के औषधि अनुभाग ने वित्त वष2025-26 के दाैरान खुदरा दवा दुकानाें के खिलाफ 462 प्रवर्तन कार्रवाइयां कीं. इनमें से 285 लाइसेंस निलंबित कर दिए गए और 79 लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए, जाे इस क्षेत्र में नियामक कार्रवाई के पैमाने और गंभीरता काे दर्शाता है.एफडीए ने पूरे इलाके में साल भर चलने वाली कार्रवाई तेज़ कर दी है, जिसमें नियम ताेड़ने वाली फार्मेसी, थाेक विक्रेताओं, निर्माताओं और स्टाेरेज सुविधाओं काे निशाना बनाया जा रहा है.
 
इन सख्त कार्रवाइयाें का मकसद लापरवाही, गलत तरीकाें और उन असुरक्षित दवाओं के चलन काे जड़ से खत्म करना है, जिनसे लाेगाें की सेहत काे खतरा हाेता है.अधिकारियाें ने बताया कि इस अभियान का मकसद यह पक्का करना है कि दवाओं का काम सिर्फ काबिल पेशेवर ही संभालें और किसी भी स्तर पर मरीज़ाें की सुरक्षा से काेई समझाैता न हाे.एफडीए के संयुक्त आयुक्त (दवाएं) गिरीश हुकारे ने कहा कि इन सख्त कार्रवाइयाें से दवा उद्याेग काे एक कड़ा संदेश मिलता है. बड़ी संख्या में लाइसेंस रद्द हाेने से यह साफ संदेश जाता है कि मरीज़ाें की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझाैता करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.हुकारे ने कहा, कई रिटेल दवा दुकानाें के लाइसेंस इसलिए रद्द कर दिए गए, क्याेंकि वहां रजिस्टर्ड या लाइसेंसशुदा फार्मासिस्टाें के बजाय अयाेग्य कर्मचारी दवाएं दे रहे थे.