मंदिराें में वीआईपी दर्शन भेदभावपूर्ण : मद्रास हाईकाेर्ट

    01-Jun-2026
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HC 
 
मद्रास हाईकाेर्ट ने हिंदू मंदिराें में पैसे देकर हाेने वाले वीआईपी दर्शन काे पूरी तरह गलत और भेदभावपूर्ण बताया है. काेर्ट ने तर्क दिया कि चर्च और मस्जिदाें में ऐसी काेई प्रथा नहीं अपनाई जाती, ताे फिर मंदिराें में ऐसा क्याें हाे? जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मी नारायणन की वेकेशन बेंच ने कहा, मंत्रियाें और विधायकाें काे यह नहीं साेचना चाहिए कि वे किसी भी समय मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं और भगवान उनका इंतजार कर रहे हाेंगे. आखिर हमें वीआईपी दर्शन की जरूरत ही क्याें है? भगवान की नजर में सभी भक्त समान हैं.काेर्ट ने सरकार की उस दलील काे भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि वीआईपी दर्शन बंद करने से मंदिराें काे राजस्व का नुकसान हाेगा.
 
अदालत ने साफ किया कि संवैधानिक पदाें पर बैठे लाेगाें, बुजुर्गाें और दिव्यांगाें काे छाेड़कर आम भक्ताें के बीच इस तरह का भेदभाव तुरंत बंद हाेना चाहिए.पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वीआईपी दर्शन और विशेष दर्शन काे पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की गई थी. विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी पी.चाेकलिंगम द्वारा दायर जनहित याचिका में मानव संसाधन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग के अधीन मंदिराें में प्रचलित वीआईपी दर्शन की प्रथा काे समाप्त करने की मांग की गई है. उनके वकील बी.जगन्नाथ ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर मामले में सर्वाेच्च न्यायालय ने कहा था कि विशेष दर्शन और वीआईपी कतार प्रणाली काे समाप्त करने के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिए.इस संबंध में समिति ने पिछले सप्ताह सर्वाेच्च न्यायालय में एक रिपाेर्ट प्रस्तुत की थी.