‌‘नवकार आर्ट फाउंडेशन‌’ की पेंटिंग्स प्रदर्शनी उद्घाटित

देश भर के 200 पेंटर्स के अलग-अलग आर्टवर्क का एग्जिबिशन में किया गया है प्रदर्शन

    01-Jun-2026
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पुणे, 31 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

नवकार आर्ट फाउंडेशन द्वारा पेंटिंग प्रदर्शनी पिछले 11 वर्षों से पुणे में आयोजित की जा रही है और कलाकारों से अच्छी प्रतिक्रिया के कारण, यह प्रदर्शनी मुंबई और नासिक में आयोजित की गई थी. ‌‘नवकार आर्ट फाउंडेशन‌’ पिछले ग्यारह वर्षों से चित्रकारों को वैश्विक पहचान मिले और दुर्लभ कलाकृतियों को बचाने का अवसर प्राप्त हो, इस उद्देश्य से काम कर रहा है. यह जानकारी नवकार आर्ट फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष मनसुख छाजेड़ ने दी. नवकार आर्ट फाउंडेशन द्वारा आयोजित रविवार, 31 मई को पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन श्री सकल जैन श्रावक संघ, पुणे डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट विलास राठौड़ ने किया. यह एग्जिबिशन पुणे के बालगंधर्व कलादालन में हो रही है और लगातार तीन दिनों तक (2 जून) सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक सभी के लिए खुली रहेगी. देश भर के 200 पेंटर्स के अलग-अलग आर्टवर्क यहां प्रदर्शित किए गए हैं. इस अवसर पर नगरसेविका सपना छाजेड़, नगरसेविका मनीषा चोरबेले, ‌‘सूर्यदत्त‌’ के अध्यक्ष डॉ. संजय चोरडिया, भाजपा जैन प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष संदीप भंडारी, नगरसेवक आनंद छाजेड़, ‌‘सरहद‌’ के अभय नहार, सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सुराणा, कलाकार अशोक जैन, मयूर सरनोत, वरिष्ठ कलाकार मुरली लाहोटी, मुकुंद तंबोली, शंकर घोटे, मल्लिकार्जुन, एस.जी. कलवणकर, सुरेश लुंकड़, अशोक बाफना के साथ दूरदर्शन पुणे के नारायणजी ढेबे, आज का आनंद की मिलन म्हेत्रे, जैन संदेश पत्रिका के संपादक सुभाष लुंकड़ उपस्थित थे. इस अवसर पर महासाध्वी पू. श्री प्रतिभाजी म.सा. आदि ठाणा 2 ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर पेंटिंग्स का निरीक्षण किया और मंगलपाठ दिया. नवकार आर्ट फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष मनसुखजी छाजेड़ ने सभी गणमान्य व्यक्तियों और चित्रकारों का अभिनंदन और स्वागत किया और उनका आभार व्यक्त किया. इस पेंटिंग प्रदर्शनी का आयोजन मनसुख छाजेड़ और उनके सभी सहयोगियों कीर्ति ओसवाल, संजय संचेती, प्रेरणा नहार, रोशनी नहार, प्रतिभा दुगड़, अनुज नहार, मनोज नहार, सतीश दुगड़ ने किया. प्रोग्राम को जयपुर के अशोक बाफना ने मॉडरेट किया, जबकि अनुज नाहर ने धन्यवाद दिया.  
  
 
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कुंदन की बारीक नक्काशी और एक्रिलिक रंगों से उभरा भगवान श्रीनाथजी का अलौकिक रूप : पुष्पी अग्रवाल ‌

‘नवकार आर्ट फाउंडेशन‌’ इस एक्झिबिशन में 2 3 फीट का कैनवास बोर्ड पेंटिंग मेरे द्वारा भगवान श्रीनाथजी को समर्पित एक कलाकृति है, जिसे मैंने एक्रिलिक रंगों और कुंदन के बारीक काम से तैयार किया है ताकि इसे एक समृद्ध और दिव्य रूप दिया जा सके. इसमें चमकते हुए सुनहरे तत्व और हाथ की महीन नक्काशी इस कलाकृति की आध्यात्मिक भावना को और भी खूबसूरत बनाती है. आभूषणों से लेकर सजावटी पैटर्न तक, हर एक छोटी से छोटी डिटेल को मैंने बेहद धैर्य और भक्ति के साथ तराशा है. जीवंत एक्रिलिक रंगों और चमकते कुंदन पत्थरों का यह संयोजन परंपरा और भव्यता का एक सुंदर संतुलन पेश करता है. इसके साथ ही, इसकी इल्यूमिनेटेड फ्रेम इसमें एक अलौकिक चमक जोड़ती है, जिससे यह पेंटिंग और भी ज्यादा उभर कर दिखाई देती है. यह कलाकृति न केवल मेरे कलात्मक कौशल को दर्शाती है, बल्कि मेरी गहरी सांस्कृतिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति को भी बयां करती है.  
 

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  कैनवास पर उकेरा आंतरिक चेतना और प्रकृति का सौंदर्य : अन्विता अग्रवाल

मैंने ‌‘नवकार आर्ट फाउंडेशन‌’ द्वारा आयोजित एक्सिबिशन में अपनी तीन पेंटिंग्स प्रस्तुत की है. पहली पेंटिंग कैनवास पर एक्रिलिक रंगों से बनाई गई है. मेरी विशेषता यह है कि, मैं एक्रिलिक रंगों से भी ऑयल पेंटिंग जैसी ही स्मूथ ब्लेंडिंग हासिल कर लेती हूं और यही प्रयोग मैंने यहां भी किया है. इसका हर एक स्ट्रोक बेहद बारीक है. यह पेंटिंग किसी की आइडेंटिटी को तलाशने के विचार को दर्शाती है. यह स्थिर होने के बजाय बिल्कुल तरल है. इसके ये बहते हुए हाथ स्वतंत्रता का प्रतीक हैं, जबकि पैर जमीन से जुड़े होने को दर्शाते हैं. यानी आजादी का अहसास, लेकिन साथ ही अपनी जड़ों से जुड़े रहना. मैंने यह पेंटिंग तब बनाई थी जब मैं लोनावला से मुंबई शिफ्ट हो रही थी; वह मेरे लिए एक बहुत बड़ा बदलाव था. यह कलाकृति उसी बदलाव को बयां करती है. एक खुली उड़ान, पर अपनी जड़ों से जुड़ाव. मेरी दुसरी एक्रिलिक पेंटिंग है. यह कंटेम्परेरी आर्ट पर आधारित है. इसमें मस्तिष्क और सिर के हिस्से को तरल रूप में दिखाया गया है, जो यह दर्शाता है कि हमारे विचार लगातार कैसे विकसित हो रहे हैं और हम कैसे एक बेहतर इंसान बन रहे हैं. लेकिन इस विकास के बीच भी, हम अपनी मूल पहचान को बनाए रखते हैं. तीसरी पेंटिंग ट्रॉपिकल पेंटिंग सीधे प्रकृति से जुड़ी है. लोनावला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए जाना जाता है, और मैं खुद को प्रकृति के बहुत करीब पाती हूं. खासकर बारिश के बाद जब चारों तरफ गहरी हरियाली छा जाती है, मैंने उसी विजुअल स्टाइल के जरिए लोनावला के उस खूबसूरत रूप को यहां उतारने की कोशिश की है.
 
 
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