जल बचाओ, हर बूंद में छिपा है समृद्ध भारत का सपना

    01-Jun-2026
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लेखक-भालचंद्र काशीनाथ वडके
 

महिला वर्ग में दिव्या का शानदार प्रदर्शन महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने झू जिनर को हराकर दिन की एकमात्र क्लासिकल जीत दर्ज की. मुकाबला लंबे समय तक बराबरी का रहा, लेकिन समय की कमी वाले चरण में दिव्या ने शानदार खेल दिखाया और अपनी बढ़त को जीत में बदल दिया. इस जीत के साथ दिव्या टूर्नामेंट के दूसरे हिस्से में प्रवेश करने से पहले अंक तालिका में अकेले शीर्ष स्थान पर पहुंच गई हैं. पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है. स्वच्छ जल के बिना स्वस्थ समाज, समृद्ध कृषि और विकसित राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती. दुर्भाग्य से आज जल प्रदूषण, भूजल का लगातार गिरता स्तर और पानी की बर्बादी हमारे सामने गंभीर संकट बनकर खड़े हैं. यदि समय रहते हमने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा. देश के विकास के लिए उद्योगों का विस्तार आवश्यक है, लेकिन औद्योगिक प्रगति पर्यावरण की कीमत पर नहीं होनी चाहिए्‌‍. कारखानों से निकलने वाले रासायनिक और प्रदूषित जल का उचित शोधन और रीयूज अनिवार्य होना चाहिए. जो उद्योग या व्यक्ति नदियों, तालाबों और जलस्रोतों को प्रदूषित करते हैं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई और भारी आर्थिक दंड आवश्यक है. साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. तभी हमारी नदियां स्वच्छ और जीवनदायिनी बनी रहेंगी. जल संकट का सबसे प्रभावी समाधान वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण है. वर्षा का अधिकांश पानी नालों और नदियों के माध्यम से समुद्र में चला जाता है, जबकि कुछ महीनों बाद हम पानी की कमी से जूझने लगते हैं. यदि प्रत्येक गांव, शहर और मोहल्ला वर्षा जल को रोकने, उसे भूमि में समाहित करने और भूजल स्तर बढ़ाने का संकल्प ले, तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है. ढलान वाले क्षेत्रों में ट्रेंच बनाना, छोटे- छोटे जलसंग्रह गड्ढ े तैयार करना तथा खेजड़ी, शमी और अन्य देशी वृक्षों का रोपण करना जल संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम हैं. जल प्रबंधन के लाभ दूरगामी ह्‌ैं‍. इससे भूजल स्तर बढ़ेगा, कुएं और तालाब वर्षभर पानी से भरे रहेंगे, बंजर भूमि उपजाऊ बनेगी और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी. किसानों का पलायन रुकेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. इसके साथ ही जलजनित बीमारियों में कमी आएगी, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव घटेगा तथा पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलेगी. आज आवश्यकता केवल सरकारी योजनाओं की नहीं, बल्कि जनसहभागिता की है. यदि प्रत्येक नागरिक अपने क्षेत्र में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दे, तो कुछ ही वर्षों में भारत जल समृद्ध राष्ट्र बन सकता है. यह केवल पर्यावरण संरक्षण का अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का संकल्प है. राजा भगीरथ ने तपस्या कर गंगा को धरती पर लाया था. आज हमें सामूहिक प्रयासों से जल संरक्षण की नई गंगा बहानी है. जब हर नागरिक जल बचाने का संकल्प लेगा, तब न केवल पानी की समस्या समाप्त होगी, बल्कि भारत समृद्धि, स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक नई मिसाल बनेगा. जल बचाना ही भविष्य बचाना है, और यही सच्ची राष्ट्रसेवा भी है.
श्री अमरनाथ अजिंक्यतारा हाउसिंग सोसायटी रुपीनगर, तलवड़े, पुणे-411062. मोबाइल : 9921935317