पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हाेने के बाद कई वस्तुएं महंगी हाे गई हैं, उनकी कीमतें बढ़ गई हैं. इसमें तेल एक बड़ा घटक है. पिछले तीन महीनाें में खाद्य तेलाें की कीमतें बढ़ी हैं. विशेष बात यह है कि व्यापारियाें का कहना है कि लगभग सभी प्रकार के तेलाें की कीमतें एक ही स्तर पर आ गई हैं, जाे इससे पहले अलग अलग हाेती थी. भारत में आयातित खाद्य तेलाें पर बढ़ती निर्भरता ने पुणे के व्यापारियाें और उद्याेग से जुड़े लाेगाें के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्याेंकि देश का आयात बिल साल-दर-साल लगातार बढ़ता जा रहा है.
नीति निर्माताओं द्वारा खपत काे कम करने और आत्मनिर्भरता काे बढ़ावा देने के बार-बार किए गए आग्रह के बावजूद, घरेलू उत्पादन मांग के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ रहा है.व्यापारियाें का कहना है कि युद्ध के कारण, सप्लाई चेन डिस्टर्ब हुई है. पहले जाे तेल आने में समय लगता था, उसके मुकाबले फिलहाल ज्यादा समय लग रहा है.दूसरी बात यह है कि किराया और इंश्याेरेंस के खर्चे काफी बढ़ गए है. इसी वजह से जाे दाम बढ़े हुए हैं, वे वहां स्थिर हैं. आम ताैर पर अप्रैल, मई और जून में तेल की बिक्री कम हाेती है, क्याेंकि ऐसा है कि गर्मियाें में वैसे भी लाेग तेल कम खाते हैं. वही स्थिति अभी भी है. लेकिन जुलाई के बाद तेल की मांग बढ़ने की संभावना है.