पेट्राेल-डीजल की कीमताें में उछाल और आरएमसी (रेडी मिक्स कंक्रीट) प्लांट संचालकाें द्वारा दामाें में की गई भारी बढ़ाेतरी के कारण पुणे शहर में सड़क निर्माण के कार्याें काे बड़ा झटका लगा है. निर्माण लागत अत्याधिक बढ़ जाने के कारण ठेकेदाराें के सामने वित्तीय संकट खड़ा हाे गया है, जिससे शहर के कई हिस्साें में सड़काें के काम ठप या अधूरे पड़ गए हैं.इस बीच, घाटे का राेना राे रहे ठेकेदाराें ने मनपा से अतिरिक्त फंड की मांग की है, जिसे पुणे मनपा प्रशासन ने साफ ताैर पर खारिज कर दिया है. मनपा ने ठेकेदाराें काे सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वे तय समय-सीमा में काम पूरा करें, अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. पुणे मनपा द्वारा शहर में छह महीने से कम अवधि वाले सीमेंट कंक्रीट की सड़काें के निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं. मनपा के नियमाें के मुताबिक, ऐसी शाॅर्ट टर्म की परियाेजनाओं पर मूल्य वृद्धि सूत्र (प्राइस एस्केलेशन क्लाॅज) लागू नहीं हाेता है. यह नियम केवल लंबी अवधि के बड़े प्राेजेक्ट्स के लिए ही वैध हाेता है.
युद्ध और आंदाेलन से बिगड़ा बाजार का गणित पिछले कुछ महीनाें में दाे मुख्य कारणाें से निर्माण बाजार की स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई है. इसमें पुणे मनपा द्वारा शहर के अवैध आरएमसी प्लांटाें पर की गई कार्रवाई के विराेध में संचालकाें ने हड़ताल की थी. आंदाेलन वापस लेते समय इन प्लांट चालकाें ने कंक्रीट मिक्सर के रेट में प्रति क्यूबिक मीटर करीब ढाई हजार रुपये की भारी वृद्धि कर दी. तथा दूसरी मांग अमेरिका-इरान युद्ध के वैश्विक संकट के चलते बाजार में डीजल के दाम प्रति लीटर करीब 7 रुपये तक बढ़ गए हैं. इसके कारण माल ढुलाई करना महंगी हाे गई है, जिससे खड़ी, मुरूम और अन्य कच्ची सामग्रियाें कीकीमतें भी काफी बढ़ गई हैं. इस अनपेक्षित महंगाई के चलते ठेकेदाराें काे दी गई कुल राशि में से जहां 100 फीसदी काम हाेना था, वहां केवल 60 से 80 प्रतिशत काम ही पूरा हाे पाया है. शेष काम के लिए ठेकेदाराें ने मनपा के पथ विभाग के साथ बैठक कर अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग की थी, जिसे मनपा ने नियमाें का हवाला देकर ठुकरा दिया है.