एंजियाेप्लास्टी कराने वाले मरीजाें की उम्र ताे बढ़ रही है, लेकिन कई मरीज कुछ सालाें बाद फिर से ब्लाॅकेज, सिकुड़े हुए स्टेंट और जटिल काेराेनरी आर्टरी डिजीज (हृदय राेग) के साथ डाॅक्टराें के पास वापस आते दिख रहे हैं. ऐसे मरीजाें के लिए दाेबारा स्टेंट लगाना, बार-बार इलाज करना या बाईपास सर्जरी एक कठिन विकल्प हाे सकता है. ऐसी स्थिति में, सह्याद्रि सुपर स्पेशालिटी हाॅस्पिटल (डे्नकन जिमखाना) में उन्नत कार्डिएक लेजर थेरेपी के कारण उपचार के नए विकल्प उपलब्ध हाे रहे हैं.इस प्राैद्याेगिकी (टेक्नाेलाॅजी) के बढ़ते उपयाेग के बारे में बात करते हुए, डाॅ. अभिजीत पलशीकर (निदेशक- कार्डियाेलाॅजी, सह्याद्रि सुपर स्पेशालिटी हाॅस्पिटल) ने कहा, जिन मरीजाें में पहले लगाए गए स्टेंट बेअसर साबित हुए हैं,उनमें हम उन्नत कार्डिएक लेजर तकनीक का उपयाेग करके प्रभावी उपचार कर रहे हैं.हम कई लाेगाें काे बाईपास सर्जरी से बचने में मदद कर रहे हैं.
यह मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चीर-फाड़ वाली) उपचार पद्धति र्नत प्रवाह काे सुचारू करने, तेजी से ठीक हाेने में मदद करने और चुनिंदा मरीजाें में अतिरिक्त स्टेंट या बाईपास सर्जरी काे टालने में सहायता करती है.बताया गया कि एडवांस कार्डियक लेजर थेरेपी विशेष रूप से निष्प्रभावी हुए स्टेंट, जटिल ब्लाॅकेज और कैल्सीफाइड (कड़ी हाे चुकी) धमनियाें के इलाज के लिए काफी उपयाेगी साबित हाेती है.इसके तहत अधिकांश मरीजाें काे 24 घंटाें के भीतर अस्पताल से डिस्चार्ज दे दियाजाता है. सह्याद्रि सुपर स्पेशलिटी हाॅस्पिटल के डायरेक्टर डाॅ. नीलेश सिंह ने कहा, एडवांस कार्डियक लेजर तकनीक की शुरुआत और इसका उपयाेग मरीजाें के लिए आधुनिक हृदय राेग उपचार काे अधिक सुलभ बनाने के हमारे प्रयासाें का प्रतिबिंब है.