समाविष्ट गांवाें में संपत्ति कर निर्धारण करते समय मनपा द्वारा लागू किए गए वाजिब किराया दर में 35 प्रतिशत की कटाैती कर कर निर्धारण किया जाए. गांवाें के मनपा में समावेश की तिथि काे कट-ऑफ डेट मानते हुए उस समय तक ग्राम पंचायत में दर्ज संपत्तियाें पर एक समान पद्धति से कर लगाया जाए. साथ ही शासन द्वारा इन गांवाें में कर वसूली पर स्थगन दिए जाने के कारण उस पर दंडात्मक शुल्क न लगाया जाए.ऐसी जानकारी विपक्ष के नेता एड. नीलेश निकम तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी के गटनेता एड. काकासाहेब चव्हाण ने पत्रकार परिषद में दी.इस अवसर पर पूर्व महापाैर दत्ता धनकवड़े, नगरसेवक अजित घुले तथा सुहास टिंगरे उपस्थित थे. उन्हाेंने कहा कि समाविष्ट 32 गांवाें में कर की दर अधिक हाेने के कारण सरकार ने बकाया कर वसूली पर स्थगन दिया है.
शासन ने मनपा काे नर्देश दिया है कि कर की दर ग्राम पंचायत द्वारा लगाए जाने वाले कर की दाेगुनी से अधिक नहीं हाेनी चाहिए. इसके बावजूद मनपा इस विषय में काेई निर्णय नहीं ले रही है.उन्हाेंने कहा कि इस मुद्दे काे सभागृह में उठाते हुए सर्वदलीय समिति गठित कर ग्रामीण नागरिकाें काे राहत देने के प्रयास किए जाने चाहिए. लेकिन महापाैर द्वारा इस दिशा में काेई पहल नहीं की गई है. इसी कारण यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है.इस प्रस्ताव के अनुसार समाविष्ट गांवाें की संपत्तियाें के कर निर्धारण के लिए उपयाेग किए जाने वाले वार्षिक किराया दर में 35 प्रतिशत तक कटाैती कर संशाेधित दर निर्धारित करने की सिफारिश की गई है. समाविष्ट 32 गांवाें का स्वतंत्र वर्गीकरण कर परिशिष्ट ‘अ’और ‘ब’ में निर्धारित दराें में 35 प्रतिशत की कटाैती कर वार्षिक किराया मूल्य निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है. विशेष रूप से खुले भूखंड, माेबाइल टावर और आईटी संपत्तियाें काे इस रियायत से बाहर रखा गया है.
इसके अतिरिक्त समाविष्ट गांवाें की संपत्तियाें के लिए निर्मित क्षेत्र के केवल 15 प्रतिशत हिस्से काे चटाई क्षेत्र (कार्पे ट एरिया) मानकर कर निर्धारण करने का भी प्रस्ताव है. साथ ही ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं हाेने वाली आवासीय और गैरआवासीय संपत्तियाें के कर निर्धारण के लिए बिजली बिल, शाॅप एक्ट अथवा अन्य शासकीय दस्तावेजाें के आधार पर एक बार दर निर्धारित करने का प्रावधान भी किया गया है. यदि इस प्रस्ताव काे स्थायी समिति तथा उसके बाद महासभा की मंजूरी मिल जाती है, ताे हजाराें संपत्ति धारकाें काे राहत मिलने की संभावना है. प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि पहले अधिक वसूले गए कर की राशि काे कम्प्यूटर प्रणाली में समायाेजित किया जाएगा. इसके परिणामस्वरूप समाविष्ट गांवाें में संपत्ति कर से जुड़ा लंबे समय से लंबित मुद्दा सुलझने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है.