भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी है. बीमा उद्योग में निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश की अनुमति मिलने के बाद भी एलआईसी ने बाजार पर अपना दबदबा कायम रखा है. बीमा कराने वालों का अनुपात अभी भी केवल तीन प्रतिशत है. इसी सिलसिले में पुणे डिवीजन इंश्योरेंस वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन के महासचिव अजीत परांजपे से चंद्रशेखर पटवर्धन द्वारा लिए गए साक्षात्कार के संपादित अंश...
प्रश्न : पुणे डिवीजन इंश्योरेंस वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन का कार्यक्षेत्र क्या है?
उत्तर : भारतीय जीवन बीमा निगम के पश्चिमी क्षेत्र (वेस्टर्न जोन) में पुणे मंडल (डिवीजन) आता है. इसमें पुणे, अहिल्यानगर और सोलापुर इन 3 शहरों और जिलों की 33 शाखाएं और दो मंडल कार्यालय पुणे डिवीजन इंश्योरेंस वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन के कार्यक्षेत्र में शामिल हैं. पुणे डिवीजन के अंतर्गत लगभग 1800 कर्मचारी और अधिकारी हैं. और लगभग 4500 पॉलिसीधारकों (बीमाधारकों) के पीछे एक कर्मचारी सेवा प्रदान कर रहा है. भारतीय जीवन बीमा निगम के लगभग चार करोड़ रिटेल और व्यक्तिगत शेयरधारक हैं.
प्रश्न : प्रबंधन के सामने संगठन ने कौन सी प्रमुख मांगें रखी हैं?
उत्तर : रिक्त पदों को तुरंत भरना, कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारियों को नौकरी में परमानेंट करना, 2012 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को पुरानी पद्धति के अनुसार पेंशन योजना का लाभ देना, पदोन्नति प्रक्रिया को गति देना, कार्यालय के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार करना, कर्मचारी कल्याण योजनाओं का विस्तार करना, बढ़ते काम के तनाव पर पुनर्विचार करना और ग्राहक सेवा के लिए आवश्यक मैनपावर उपलब्ध कराना, केंद्र सरकार के निर्देशानुसार भर्ती दृष्टिबाधित कर्मचारियों को काम करने के लिए अत्याधुनिक मोबाइल और लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएं. हमारी राष्ट्रीय संस्था छजखथ के साथ केंद्रीय प्रबंधन नियमित रूप से संवाद बैठकें आयोजित करे और संगठन के सुझावों को लागू करे. ये हमारी प्रमुख मांगें हैं.
प्रश्न : क्या एलआईसी के प्राइवेटाइजेशन का संगठन विरोध कर रहा है?
उत्तर : सरकार ने वर्ष 2000 से बीमा व्यवसाय के प्राइवेटाइजेशन की शुरुआत की थी. इसके बाद वर्ष 2022 में सरकार ने अपने स्वामित्व के केवल 3.5% शेयर आम जनता और वित्तीय संस्थानों को बेचे. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह प्रमाण कितना कम है. इसके बाद सरकार भी आगे के शेयरों की बिक्री के लिए अब तक हिम्मत नहीं जुटा पाई है.
प्रश्न : बीमा नियामक प्राधिकरण (खठऊअख) की भूमिका उद्योग के लिए कैसे सहायक है?
उत्तर : बीमा नियामक प्राधिकरण उद्योग में पारदर्शिता, ग्राहक संरक्षण, वित्तीय स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. नियामक नीतियों के कारण बीमा क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और ग्राहकों का वेिशास बढ़ाने में मदद मिल रही है. हालांकि, कोई भी नीति तय करते समय ग्राहकों, कर्मचारियों और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है.
प्रश्न : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में आदेश दिया है कि बीमा कर्मचारियों के लिए भी जनगणना अनिवार्य है. संगठन इस पर क्या रुख अपनाएगा?
उत्तर : जनगणना राष्ट्रहित का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है और कानून द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी का पालन सभी को करना चाहिए. बहरहाल, 53-54 वर्ष की औसत आयु वाले बीमा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उनके नियमित कामकाज और ग्राहक सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े. आईपीओ आने के बाद ग्राहक सेवा प्रभावित न होने देना ही हमारी प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. वास्तव में, पिछले लोकसभा चुनावों, विधानसभा चुनावों और मनपा चुनावों में भी एलआईसी पुणे मंडल के कर्मचारियों ने कई दिक्कतों के बावजूद चुनावी ड्यूटी बहुत मुस्तैदी से निभाई थी. संगठन जनगणना के लिए आवश्यक सुविधाएं, प्रशिक्षण और उचित समन्वय उपलब्ध कराने की मांग करेगा.
प्रश्न : इंश्योरेंस कर्मचारियों के सामने आज कौन सी प्रमुख समस्याएं हैं?
उत्तर : आज मैनपावर की कमी, काम का बढ़ता बोझ, डिजिटल परिवर्तन के कारण नए स्किल की आवश्यकता, रिक्त पदों का न भरा जाना, पदोन्नति (प्रमोशन) में देरी और ग्राहकों की बढ़ती उम्मीदें जैसी प्रमुख समस्याएं हैं. इसके साथ ही, निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है.
प्रश्न : अंत में आप कर्मचारियों और ग्राहकों को क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर : एलआईसी केवल एक बीमा संस्था नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों का विश्वास है. कर्मचारियों को बदलते समय के साथ तालमेल बिठाते हुए उत्कृष्ट सेवा देने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए. ग्राहकों ने एलआईसी पर जो विश्वास दिखाया है, वही हमारी सबसे बड़ी ताकत है. दीर्घकालिक निवेश नीति के माध्यम से एलआईसी ने ग्राहकों, समाज और देश की आर्थिक समृद्धि की है. परंतु, अब उनके सामने हर सप्ताह के अंत में होने वाली परीक्षा में भी खुद को साबित करने की चुनौती खड़ी हो गई है. कर्मचारी, ग्राहक और प्रबंधन के सहयोग से एलआईसी को और अधिक सक्षम, आधुनिक और लोकाभिमुख बनाने के लिए हमें मिलकर काम करना चाहिए.