मैं यह नहीं कह रहा हूं कि तुम जिंदगी के कामधाम काे छाेड़ दाे.कामधाम की अपनी जरूरत है, मगर कभी संगीत भी सुनाे. श्रम के समय श्रम, संगीत के समय संगीत. धन की जगह धन, ध्यान की जगह ध्यान. दाेनाें काे मिश्रित मत कराे.मैं िफर तुम्हें याद दिला दूं बार-बार कि मैं काेई धन का विराेधी नहीं हूं. मेरे मन में दरिद्रता का काेई सम्मान नहीं है.इस देश में सदियाें से दरिद्र का सम्मान किया गया है इसलिए यह देश दरिद्र है. यह देश दरिद्र रहेगा, जब तक दरिद्र का सम्मान रहेगा. मेरे मन में दरिद्र का काेई सम्मान नहीं है. दरिद्रता का मेरे मन में काेई मूल्य नहीं है. ताे मैं तुम्हें यह नहीं कह रहा हूं कि दरिद्र हाे जाओ, कि भीख मांगने लगाे; कि धन कमाने से क्या हाेगा; कि दुकान करने से क्या हाेगा यह मैं तुमसे नहीं कह रहा हूं. मैं ताे कह रहा हूं, दुकान करने से बहुत कुछ हाेता है. साध्य ताे ध्यान है. धन हाे ताे तुम ध्यान कर सकाेगे सुगमता से. धन न हाे ताे बहुत मुश्किल हाे जाएगी.
भूखे भजन न हाेई गाेपाला. भूखा आदमी भजन कैसे करे? भूख ही भूख उठती है, भजन कैसे उठे? चिंता ही चिंताएं हैं उसके ऊपर, प्रार्थना में बैठे ताे कैसे बैठे? उधर बच्चा राे रहा है, उधर पत्नी बीमार पड़ी है, वर्षा आ गई है और छप्पर गिरा जा रहा है और तुम प्रार्थना कराेगे? असंभव है. ऐसी अपेक्षा तुमसे करना भी अमानवीय है. और इस देश में तुमसे अमानवीय अपेक्षा की गई है कि तुम प्रार्थना कराे, कि तुम ध्यान कराे.मैं दरिद्रता का पक्षपाती नहीं हूं. दरिद्रता राेग है, महाराेग है; उसे मिटाना ही है, लेकिन िफर भी मैं साम्यवादियाें से राजी नहीं हूं कि दरिद्रता मिट गई ताे सब मिट गया. मेरी स्थिति तुम्हें समझने के लिए बहुत सूक्ष्म विचार करना पड़ेगा. मैं तुम्हारे तथाकथित अध्यात्मवादियाें से राजी नहीं हूं कि आदमी नंगा रहे, भूखा रहे, प्यासा रहे, उपवासा रहे, सूखता रहे, गलता रहे और ध्यान करता रहे. यह रुग्ण चाह है. यह विक्षिप्तता है. यह आदमी से असंभव की आकांक्षा करनी है.
मैं साम्यवादियाें से भी राजी नहीं हूं कि बस, गरीबी मिट जाए, धन मिल जाए, भाेजन मिल जाए, मकान मिल जाए, कार हाे, रेडियाे हाे, टेलीविजन हाे, बात खत्म हाे गई! और क्या चाहिए? मैं दाेनाें से राजी नहीं हूं और दाेनाें से राजी हूं. दाेनाें आधे-आधे हैं.मेरे हिसाब में धन हाेना चाहिए, जरूर हाेना चाहिए. पूरा श्रम कराे धन पाने के लिए, लेकिन धन पाने में ही धन का अंत नहीं है.जब धन मिल जाए ताे तुम्हारे पास सुविधा है.अब संगीत खाेजाे, अब साहित्य खाेजाे, अब धर्म खाेजाे. अब तुम्हारे पास धन ने व्यवस्था दे दी है कि तुम एक घर में पूजागृह बना सकते हाे. अब तुम एक घड़ीभर काे शांत बैठकर चुप हाे सकते हाे. तुम एक घड़ीभर नाच सकते हाे. अब नाचाे! अब गाओ! और तुम चकित हाे जाओगे कि तुम्हारे धन में भी सार्थकता आ गई तुम्हारे ध्यान के कारण तुम्हारा धन भी काम आ गया.इस जगत में बाहर हमें जाे भी मिल सकता है वह सब साधन है, साध्य भीतर है. और ध्यान रखना, यह ताे कभी पूछना ही मत कि साध्य किसलिए? क्याेंकि साध्य का मतलब ही हाेता है, जाे अंतिम है. वह किसी चीज का और साधन नहीं है; जाे आखिरी है. परमात्मा अंतिम है.