भारत के पास वैज्ञानिक प्रतिभा, नवीन विचार और वैश्विक नवाचार में अग्रणी बनने की महत्वाकांक्षा है.अब हमें ऐसे सिस्टम बनाने की जरूरत है, जाे माैलिक विज्ञान काे खाेज के स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक दुनिया में प्रभाव उत्पन्न करने तक ले जा सकें और विज्ञान और उद्यम काे जाेड सके. आईसर पुणे जैसे संस्थान बुनियादी अनुसंधान और उसके व्यावहारिक अनुप्रयाेग के बीच इस कड़ी काे मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, यह विचार प्रख्यात जैव-प्राैद्याेगिकी विशेषज्ञ और बायाेकाॅन लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार-शाॅ ने व्यक्त किए.
विज्ञान की बारीकियाें और उद्यमशीलता की साेच काे मिलाते हुए प्रेरणादायक भाषण में, प्रख्यात जैव-प्राैद्याेगिकी विशेषज्ञ और बायाेकाॅन लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार-शाॅ ने युवा शाेधकर्ताओं से समाज के लिए समाधान खाेजने वाले (साेल्यूशन क्रिएटर) बनने का आह्वान किया. वह भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधानसंस्थान (आईसर,पुणे) में विज्ञान और उद्यम काे जाेड़ना (ब्रिजिंग साइंस एंड एंटरप्राइज) नामक विशेष कार्यक्रम काे संबाेधित कर रही थीं.सी. वी. रमन प्रेक्षागृह में आयाेजित इस कार्यक्रम में लगभग 200 लाेग शामिल हुए, जिनमें आईसर के संकाय सदस्य, छात्र, शाेधार्थी और आमंत्रित व्यक्ति शामिल थे. उपस्थित लाेगाें में आस-पास के शैक्षणिेटेक और फार्मा सेक्टर के इंडस्ट्री पार्टनर के प्रतिनिधि भी शामिल थे.
मजूमदार-शाॅ का दाैरा पाेस्टर प्रस्तुति सत्र के साथ शुरू हुआ, जिसमें आईसर पुणे के चुनिंदा संकाय सदस्याें ने बायाेलाॅजिक्स, बायाेसिमिलर्स, माेनाेक्लाेनल एंटीबाॅडीज और काॅन्जुगेटेड रिकाॅम्बिनेंट प्राेटीन के क्षेत्राें में अपने शाेध कार्य प्रस्तुत किए. उन्हाेंने ऑन्काेलाॅजी, इम्यूनाेलाॅजी, डायबिटीज, नेत्र स्वास्थ्य और अस्थि स्वास्थ्य से संबंधित उपचार क्षेत्राें काे लाभ पहुंचाने वाले ट्रांसलेशनल रिसर्च पर भी प्रकाश डाला. इस सत्र ने आमंत्रित अतिथियाें काे आईसर पुणे के शाेधकर्ताओं के साथ बातचीत करने, चल रही परियाेजनाओं के बारे में जानने, और विचाराें का आदान-प्रदान करने के लिए मंच प्रदान किया.निदेशक प्राे. सुनील भागवत ने स्वागत भाषण दिया और आईसर पुणे के रिसर्च इकाेसिस्टम के बारे में जानकारी दी. सहयाेगी प्राेफेसर और सहयाेगी अधिष्ठाता डाॅ. कृष्णपाल करमाेदिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया.