आज मेडिकल शिक्षा में आमूल-चूल सुधार की जरूरत है

    13-Jun-2026
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भारत का मेडिकल शिक्षा क्षेत्र पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने हाल ही में पेपर लीक हाेने के बाद राष्ट्रीय प्रवेश एवं याेग्यता परीक्षा (नीट) काे रद्द कर दिया, जिसका आयाेजन उसने मेडिकल काॅलेजाें में प्रवेश के लिए किया था. पिछले साल जुलाई में, सीबीआई ने बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार घाेटाले का पर्दाफाश किया था, जिसमें कथित ताैर पर कई मेडिकल काॅलेज, स्वास्थ्य मंत्रालय के कई अधिकारी और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के अधिकारी शामिल थे.ये घटनाएं संपूर्ण मेडिकल शिक्षा की शुचिता और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर इसके असर काे लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं. इस क्षेत्र में आमूल-चूल बदलाव की ज़रूरत है, न कि सिर्फ छाेटे-माेटे सुधाराें की.भारत में डाॅक्टर बनना मुश्किल प्रक्रिया है. छात्राें काे मेडिकल सीट पाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है.
 
हाल के वर्षाें में सीटाें की संख्या में काफी बढ़ाेतरी हुई है- फिलहाल 800 काॅलेजाें में कुल 1,28,000 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं. सरकार की याेजना के अनुसार, अगले तीन वर्षाें में 50,000 और अंडरग्रेजुएट और पाेस्ट-ग्रेजुएट सीटें जाेड़ी जाएंगी. फिर भी, प्रतिस्पर्धा काफी ज़्यादा है.रद्द किए गए पिछले नीट में लगभग 22 लाख बच्चाें ने हिस्सा लिया था. चयन हाेने पर, छात्र काे मेडिकल काॅलेज में साढ़े पांच वर्ष का प्रशिक्षण व उसके बाद एक और प्रवेश परीक्षा पास करने पर, रेजिडेंसी प्राेग्राम में तीन साल की विशेषज्ञता हासिल करनी हाेती है.चूंकि माैजूदा व्यवस्था में एडमिशन के लिए नीट स्काेर ही एकमात्र मापदंड है, इसलिए इस परीक्षा की निष्पक्षता बहुत अहम है.
 
माैजूदा गड़बड़ी के बाद चली बहस में ध्यान का केंद्र एनटीए और इस व्यवस्था की ईमानदारी सुनिश्चित करने पर है. सुझाए गए विभिन्न तकनीकी एवं भाैतिक उपायाें में कंप्यूटर-आधारित परीक्षा, ‘जस्ट-इन-टाइम’ एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र जैसी सुरक्षा प्रणालियां, प्रश्न पत्राें के अनेक सेट और एआई-आधारित रैंडम प्रश्न चयन अपनाना शामिल हैं. साल 2024 में नीट घाेटाले के बाद गठित राधाकृष्णन समिति ने भी परीक्षा काे निष्पक्ष बनाने काे कई सिफारिशें की थीं. ऐसे त्वरित तकनीकी समाधान और परीक्षा पत्राें की भाैतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय शायद अल्पकाल के लिए मददगार साबित हाे सकें. मेडिकल काॅलेजाें में प्रवेश प्रक्रिया में बुनियादी ढांचागत बदलाव करने की ज़रूरत है.
 
कई देशाें में अपनाई जाने वाली समग्र मूल्यांकन प्रणाली के उलट भारत में मेडिकल ट्रेनिंग के सभी स्तराें पर प्रवेश मानकीकृत कर दी गई परीक्षा द्वारा तय किया जाता है. मेडिकल ट्रेनिंग के लिए स्काेर आधारित प्रवेश छात्राें की पात्रता का आकलन करने का सर्वाेत्तम ढंग नहीं; यह कई मायनाें में असमान है. नीट काे सेंट्रल बाेर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम के साथ-साथ कुछ ऐसे विषयाें के आधार पर तैयार किया गया है जाे स्कूल के सिलेबस से बाहर के हैं. जाे बच्चे राज्य बाेर्ड के सिलेबस वाले गैर-सीबीएसई स्कूलाें से आते हैं उन्हें स्वाभाविक रूप से नुकसान हाेता है.यहां तक कि सीबीएसई स्कूलाें से आने वाले छात्र भी पूरी तरह तैयार नहीं हाेते, क्याेंकि कुछ ऐसे विषय हाेते हैं जाे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल ही नहीं. इस अंतर काे पूरा करने के लिए, दाेनाें श्रेणी के छात्राें काे नीट के लिए किसी न किसी किस्म की तैयारी करनी पड़ती है.
 
इसी वजह से कई अरब डाॅलर का काेचिंग उद्याेग खड़ा हाे गया है. यह अनेक छात्राें के लिए एक और बड़ी बाधा है, क्याेंकि हर काेई काेचिंग की ऊंची फीस नहीं दे सकता. यदि वे राज्य शिक्षा बाेर्ड के पाठ्यक्रम वाले स्कूलाें से आते हैं और गैर-अंग्रेजी माध्यम के स्कूलाें से हैं, उनके लिए ताे दाेहरा नुकसान है. शुरुआत के लिए, प्रवेश प्रक्रिया विकेंद्रीकृत की जानी जरूरी है. अलग-अलग शिक्षा प्रणालियाें और क्षेत्रीय असमानताओं वाले देश के लिए नीटज कैसा ‘एक साइज़ सबके लिए’ वाला ढंग प्रभावी नहीं. इस किस्म की मानकीकृत मूल्यांकन परीक्षा में सीखने के अलग-अलग माहाैल और छात्राें की पृष्ठभूमि काे ध्यान में नहीं रखा गया.
इसके अलावा, एक केंद्रीकृत प्रणाली में घाेटालाें, हेरफेर और पेपर लीक की गुंजाइश अधिक हाेती है, जैसा कि 2024 व 2026 में देखा गया.
 
राज्याें काे स्थानीय कारकाें के आधार पर प्रवेश के लिए अपनी प्रक्रिया तय करने दें, वे जाे भी प्रक्रिया चुनें, उसकी जवाबदेही और पारदर्शिता भी सुनिश्चित हाे. चाहे सरकारी मेडिकल काॅलेजाें में एडमिशन के लिए हाईस्कूल के अंकाें और प्रवेश परीक्षा स्काेर पर आधारित मिलीजुली प्रणाली हाे, या निजी काॅलेजाें के लिए अलग पात्रता परीक्षा हाे सकती है. राज्याें के काॅलेजाें में ‘ऑल-इंडिया’ काेटे के तहत एडमिशन के लिए अतिरिक्त मानदंड या टेस्ट हाे सकते हैं.मेडिकल एडमिशन टेस्ट की प्रकृति में भी बदलाव ज़रूरी है. फिलहाल, नीट मूलत: जीव विज्ञान, भाैतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान वाले पाठ्यक्रम की रट्टा आधारित परीक्षा है. इसे चिकित्सा जैसे उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए तैयारी, याेग्यता या शैक्षणिक क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया. जबकि छात्राें का मूल्यांकन अधिकांश उनकी आलाेचनात्मक साेच-तर्कशक्ति, समस्यासमाधान काैशल के अलावा व्यावहारिक एवं सामाजिक विज्ञान की कांसेप्ट्स के आधार पर किया जाना चाहिए.
- दिनेश सी. शर्मा