भारत में कमर दर्द अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है. घर संभालने वाली गृहिणी से लेकर ऑफिस में घंटों बैठने वाले युवा तक, हर उम्र का व्यक्ति इससे प्रभावित हो रहा है. कई लोग इसे बढ़ती उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज करते हैं, जबकि कुछ सर्जरी के डर से इलाज ही नहीं करवाते. लेकिन क्या वास्तव में हर कमर दर्द का समाधान ऑपरेशन है? क्या आधुनिक चिकित्सा में ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो बिना सर्जरी राहत दे सकते हैं? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए हमने दर्द प्रबंधन विशेषज्ञ (Pain Specialist) डॉ. प्रिया राठी से विशेष बातचीत की.
प्रश्न : आज कमर दर्द इतना आम क्यों हो गया है?
डॉ.राठी- आज की जीवनशैली इसकी सबसे बड़ी वजह है. घंटों बैठकर काम करना, मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग, व्यायाम की कमी, मोटापा और गलत तरीके से वजन उठाना. ये सभी कारण कमर दर्द को बढ़ा रहे हैं. दुख की बात यह है कि अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और किशोरों में भी तेजी से बढ़ रही है.
प्रश्न : क्या कमर दर्द का मतलब हमेशा ऑपरेशन होता है?
डॉ.राठी- बिल्कुल नहीं. यह सबसे बड़ी गलतफहमी है. वास्तव में कमर दर्द के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ती. सही जांच, सही निदान और समय पर उपचार से अधिकांश मरीज बिना ऑपरेशन सामान्य जीवन जी सकते हैं.
प्रश्न : झरळप चरपरसशाशपीं क्या है और यह कैसे मदद करता है?
डॉ.राठी- Pain Management चिकित्सा की एक विशेष शाखा है, जिसमें दर्द के वास्तविक कारण को पहचानकर बिना बड़े ऑपरेशन के उपचार किया जाता है. आधुनिक इंटरवेंशनल तकनीकों की मदद से दर्द पैदा करने वाले हिस्से को सीधे टार्गेट किया जाता है, जिससे मरीज को जल्दी और प्रभावी राहत मिलती है.
प्रश्न : कौन-कौन से आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं?
डॉ.राठी- आज कई उन्नत और सुरक्षित उपचार उपलब्ध हैं. Epidural Steroid Injection (ESI) जब डिस्क खिसकने या नस दबने के कारण दर्द कमर से पैर तक जाता है, तब सूजन वाली जगह पर सीधे दवा दी जाती है. कई मरीजों को एक ही प्रक्रिया में 70 से 80 प्रतिशत तक राहत मिल जाती है. Facet Joint Injection और Medial Branch Block रीढ़ के छोटे जोड़ों में सूजन या घिसाव होने पर यह उपचार काफी प्रभावी साबित होता है. Iofrequency blation (RF ) इस तकनीक में दर्द का संदेश पहुंचाने वाली नस को निष्क्रिय किया जाता है. इसका प्रभाव एक से दो वर्ष तक बना रह सकता है. Trigger Point Injection मांसपेशियों में बनी दर्दनाक गांठों को लक्षित कर राहत दी जाती है. Sacroiliac Joint Injection: कमर और कूल्हे के जोड़ से उत्पन्न दर्द के लिए यह बेहद प्रभावी उपचार है.
प्रश्न : आजकल झठझ और झेीश्रेींहशीरूि की भी काफी चर्चा हो रही है. ये क्या हैं?
डॉ.राठी- PRP (Platelet Rich Plasma) में मरीज के अपने रक्त से प्लेटलेट्स निकालकर प्रभावित हिस्से में इंजेक्ट किए जाते ह्ैं. इससे शरीर की प्राकृतिक मरम्मत प्रक्रिया तेज होती है. Prolotherapy में विशेष घोल का उपयोग कर कमजोर लिगामेंट्स और टेंडन्स को मजबूत किया जाता है. यह उपचार शरीर को स्वयं क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए प्रेरित करता है.
प्रश्न : मरीजों को आपका सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है ?
डॉ.राठी- मैं हर मरीज से एक बात जरूर कहती हूं. दर्द को सहते रहना बहादुरी नहीं है, सही समय पर उपचार लेना ही समझदारी है. कई लोग वर्षों तक दर्द सहते रहते हैं और जब हमारे पास आते हैं तो उन्हें पता चलता है कि बिना ऑपरेशन भी राहत संभव थी. दर्द-मुक्त होकर जब वे फिर से अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, चल-फिर पाते हैं और अच्छी नींद ले पाते हैं, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होती है.
प्रश्न : किन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए?
डॉ.राठी- यदि निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. पैर में लगातार सुन्नपन या झनझनाहट पेशाब या शौच पर नियंत्रण कम होना रात में दर्द का लगातार बढ़ना बिना कारण वजन कम होना छह सप्ताह से अधिक समय तक दर्द बने रहना.