चेहरा नीचे झुकना, हाथों में कमजोरी महसूस होना तुरंत कार्रवाई का सही समय : डॉ. दृष्टि खत्री

    14-Jun-2026
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डॉ. दृष्टि खत्री
डीआरएनबी न्यूरॉलॉजी
साईश्री विटालाइफ हॉस्पिटल
 
डॉ. दृष्टि खत्री ने एमबीबीएस के बाद इंटरनल मेडिसिन (वयस्कों की बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार पर केंद्रित चिकित्सा शाखा) में स्नातकोत्तर (एमडी) की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने ‌‘डॉक्टरेट ऑफ नेशनल बोर्ड इन न्यूरोलॉजी‌’ (डीआरबीन्यूरोलॉजी) पूरा किया, जो भारत में एक सुपर-स्पेशलिटी मेडिकल कोर्स है. यह पाठ्यक्रम मुख्य रूप से केंद्रीय और परिधीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल एंड पेरिफेरल नर्वस सिस्टम) के निदान और उपचार पर केंद्रित है. वर्तमान में डॉ. दृष्टि खत्री साईश्री विटालाइफ हॉस्पिटल, पुणे में कार्यरत हैं. वह गंभीर और पुरानी स्ट्रोक मैनेजमेंट, थ्रोम्बोलिसिस/न्यूरोवैस्कुलर इंटरवेंशन सहायता, मिर्गी और दौरे, सिरदर्द और माइग्रेन की देखभाल, नींद से संबंधित न्यूरोलॉजिकल विकार, ईईजी/ईएमजी-एनसीव्ही/न्यूरोडायग्नोस्टिक्स और जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थितियों का निदान और उपचार करती हैं. मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के बारे में हमारे समाज में कई गलतफहमियां हैं. उन्हें दूर करने और सही समय पर उचित उपचार पाने के लिए उनका यह साक्षात्कार अत्यंत उपयोगी है.  
 
सवाल : पक्षाघात (स्ट्रोक) के शुरुआती लक्षण कौन से हैं?
जवाब : स्ट्रोक के सामान्य लक्षणों में अचानक चेहरा, हाथ या पैर कमजोर होना, बोलने में कठिनाई होना, चेहरे का एक हिस्सा दूसरी तरफ मुड़ जाना (टेढ़ा होना), अचानक दृष्टि चले जाना, तेज चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना शामिल हैं. इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत इलाज कराना बेहद जरूरी है.इसे हमेशा याद रखें: चेहरा नीचे झुकना, हाथों में कमजोरी महसूस होना, बोलने में कठिनाई होना, यही तुरंत कार्रवाई करने का सही समय है.
सवाल : अपस्मार (मिर्गी/दौरे आने की बीमारी) क्या है? क्या दौरों का इलाज संभव है?
जवाब : मिर्गी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क में असामान्य विद्युत तरंगों (इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी) के कारण बार-बार दौरे (झटके) आते हैं. सही दवाओं और जीवनशैली में एहतियाती उपायों की मदद से अधिकांश मरीजों में दौरों पर अच्छा नियंत्रण पाया जा सकता है. सवाल : हाथों या पैरों में झुनझुनी या सुन्नता किस वजह से होती है? जवाब : इसके सामान्य कारणों में मधुमेह (डायबिटीज), विटामिन की कमी, नसों पर दबाव आना, गर्दन या कमर की रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) की समस्याएं, थायराइड विकार, न्यूरोपैथी और कुछ विशेष दवाएं शामिल हैं.
 सवाल : नर्व कंडक्शन स्टडी और ईएमजी क्या है?
जवाब : ये दोनों जांचें नसों और मांसपेशियों (नर्व और मसल्स) के कार्य का मूल्यांकन करने के लिए की जाती हैं. ये न्यूरोपैथी, रेडिकुलोपैथी, मांसपेशियों के विकार, मोटर न्यूरॉन रोग और नसों की चोटों का निदान करने में मदद करती हैं. सवाल : क्या कम उम्र में याददाश्त कमजोर हो सकती है? जवाब : हां, तनाव, चिंता, अपर्याप्त नींद, विटामिन की कमी, थायराइड की समस्याएं, डिप्रेशन (अवसाद) या तंत्रिका तंत्र के विकारों के कारण याददाश्त से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. याददाश्त कम होने का मतलब हमेशा डिमेंशिया (स्मृतिभ्रंश) ही हो, ऐसा नहीं है.
सवाल : जीवनशैली से जुड़ी कौन सी आदतें मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं?
जवाब : स्वस्थ आदतों में ये शामिल हैं- नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और मधुमेह पर नियंत्रण, तनाव प्रबंधन (स्ट्रेस मैनेजमेंट), दिमाग को सक्रिय रखने वाली गतिविधियां, और धूम्रपान व अत्यधिक शराब के सेवन से बचना. सवाल : क्या कंपन (हाथ-पैर कांपना) का मतलब हमेशा पार्किंसंस की बीमारी ही होता है? जवाब : कंपन एसेंशियल ट्रेमर (आवश्यक कंपन), चिंता, थायराइड विकार, दवाओं के साइड इफेक्ट, अत्यधिक कैफीन या पार्किंसंस रोग के कारण हो सकता है. एक न्यूरोलॉजिकल जांच से इसके सही कारण की पहचान करने में मदद मिलती है. सवाल : क्या चक्कर आने की समस्या हमेशा दिमाग से ही जुड़ी होती है? जवाब : चक्कर आने की समस्या आंतरिक कान के दोष, कम रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर), शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), चिंता, गर्दन की समस्याओं या तंत्रिका तंत्र से संबंधित कारणों से हो सकती है. सही जांच से इसका सटीक कारण निर्धारित करने में मदद मिलती है.