मुंबई, 13 जून (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) मुंबई के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल है. उन्होंने कहा कि यह नीति देश की शिक्षा व्यवस्था को रटंत प्रणाली से निकालकर नवाचार, कौशल, शोध और उद्यमिता आधारित मॉडल की ओर ले जा रही है. मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी अपने लेख में प्रो. तिवारी ने कहा कि औपनिवेशिक काल में थॉमस बैबिंगटन मैकाले द्वारा स्थापित शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों के लिए बाबू तैयार करना था, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य युवाओं को 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप सक्षम बनाना है. उन्होंने बताया कि एनईपी के लागू होने के बाद उच्च शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है.वर्ष 2014 में देश में 723 वेिशविद्यालय थे, जिनकी संख्या बढ़कर 2024 में 1,213 हो गई है. इसी अवधि में उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या 51,500 से बढ़कर लगभग 59,000 हो गई है. देश में अब 23 आईआईटी, 22 आईआईएम और 20 एम्स संस्थान कार्यरत ह्ैं. प्रो. तिवारी के अनुसार, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी), मल्टीपल एंट्री- एग्जिट प्रणाली तथा बहु-विषयक शिक्षा जैसी व्यवस्थाओं ने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और करियर के अनुरूप अध्ययन का अवसर प्रदान किया है. अब तक 4.6 करोड़ से अधिक एबीसी आईडी जारी की जा चुकी हैं.