रिश्ते हमेशा झुकने से चलते हैं, अकड़ने से नहीं !

मुंबई अग्रवाल सामूहिक विवाह सम्मेलन के अध्यक्ष डालचंद गुप्ता की दो टूक राय

    14-Jun-2026
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श्री डालचंद गुप्ता
मुंबई अग्रवाल सामूहिक विवाह सम्मेलन के संस्थापक अध्यक्ष
मोब. 93242-68484
 
आज की आधुनिक चकाचौंध में विवाह के पारंपरिक मायने और सामाजिक मूल्य पूरी तरह बदल चुके हैं. रिश्तों में आ रहे इसी बिखराव, समाज की बढ़ती भौतिकवादी सोच, दहेज की छिपी चाहत और युवा पीढ़ी में घटती सहनशीलता जैसे गंभीर विषयों पर मुंबई अग्रवाल सामूहिक विवाह सम्मेलन के संस्थापक अध्यक्ष श्री डालचंद गुप्ता से दै. आज का आनंद की एक विशेष बातचीत. प्रस्तुत हैं इस गहरे विमर्श के मुख्य अंश -  
 
प्रश्न : पहले और आज के दौर में जीवनसाथी चुनने के पैमाने कितने बदल गए हैं?
 उत्तर : देखिए, इसमें जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है. पहले जब शादियाँ तय होती थीं, तब खानदान, सामाजिक पकड़ और संस्कार देखे जाते थे. लेकिन आज? आज सिर्फ तन की सुंदरता, दौलत, बड़ा पैकेज, कार और बंगले देखे जाते ह्‌ैं‍. हालत यह है कि आज माता-पिता में इतनी हिम्मत ही नहीं बची है कि वे अपनी मर्जी से बच्चों के रिश्ते कर सक्‌ें‍. लड़का-लड़की दोनों की पसंद बदल गई है; सबको गाड़ी-घोड़े वाले अमीर जीवनसाथी ही चाहिए, भले ही वे समाज का केवल 10% हिस्सा ही क्यों न हों.
 प्रश्न : क्या आज के दौर में दोनों ही पक्षों की उम्मीदें पूरी तरह से भौतिकवादी हो चुकी हैं?
उत्तर : बिल्कुल, लड़के वालों की पहली पसंद बड़े घर की लड़की होती है ताकि उन्हें भरपूर दहेज मिल सके. दूसरी तरफ, लड़की वालों की इच्छा रहती है कि लड़की को खूब पैसे वाला लड़का मिले ताकि बेटी को कोई काम न करना पड़े, परिवार छोटा हो और घर में भरपूर नौकर-चाकर ह्‌ों‍. इसी छोटे परिवार के चक्कर में आज सारे बड़े रिश्ते खत्म हो गए ह्‌ैं‍. पहले माता-पिता गर्व से कहते थे कि हमारी बेटी को घर का सारा काम आता है, लेकिन अब कहते हैं कि हमने कभी अपनी बेटी से घर का काम करवाया ही नहीं.
प्रश्न : जीवनसाथी की तलाश और शादियों में हो रही देरी को लेकर आपका अनुभव क्या कहता है?
उत्तर : आज रिश्तों का बाजार गाड़ियों के शोरूम जैसा सज गया है, यही कड़वी हकीकत है. सब किसी नई लॉन्चिंग यानी और भी बेहतर विकल्प का इंतजार कर रहे हैं. इसी अंतहीन तलाश में बच्चों की उम्र बढ़ती जा रही है और नतीजा सौ कोड़े और सौ प्याज खाने जैसी हालत हो रही है. अच्छे से अच्छे की तलाश में आज सब अधेड़ (उम्रदराज) हो रहे हैं.
 प्रश्न : आजकल कामकाजी लड़कियों और पारिवारिक तालमेल के बीच जो तनाव देखने को मिलता है, उस पर आपका क्या नजरिया है?
उत्तर : इसमें एक गहरा विरोधाभास है. आज लड़कों को नौकरी करने वाली लड़की तो चाहिए, लेकिन जब वह खुद कमाएगी, तो वह हर जगह झुकने को तैयार नहीं होगी. जब वह खुद कमाएगी वो सास-ससुर और पति की क्या इअजत करेगी? ऐसे में अगर आपसी सम्मान न हो, तो फिर बात-बात पर अहंकार टकराता है. आज घरों में तनाव की जड़ यही बन गई है कि खाना होटल से मँगाओ या खुद बनाओ. अब बच्चों में बिल्कुल भी सहनशीलता नहीं बची है, एक-दूसरे के प्रति समर्पण खत्म हो चुका है और इसी का नतीजा है कि आज समाज में आत्महत्या और तलाक के मामले बढ़ रहे हैं.
 प्रश्न : एक खुशहाल वैवाहिक जीवन का मूल मंत्र क्या होना चाहिए?
उत्तर : बहुत सीधा सा नियम है रिश्ते हमेशा झुकने से चलते हैं, अकड़ने से नह्‌ीं‍. जीवन को खूबसूरती से जीने के लिए एक छोटा घर, आपसी तालमेल, प्रेम, साथ और सहकार ही सबसे जशरी हैं. पर अफसोस, आज लोगों की इच्छाएँ बहुत बड़ी गाड़ी और बड़े बंगले की हो चुकी हैं, फिर चाहे वहाँ मालकिन की जगह दासी बनकर ही क्यों न रहना पड़े, उन्हें मंजूर है.
प्रश्न : आपको ऐसा क्यों लगता है कि आधुनिक सुखसुि वधाओं ने मानसिक अशांति को और बढ़ा दिया है?
उत्तर : क्योंकि व्यस्तता का स्वरूप बदल गया है. आज हमारे पास सारी सुख-सुविधाएँ मौजूद ह्‌ैं‍. पहले ये सुविधाएँ नहीं थीं, केवल परिवार और काम था, इसलिए फालतू बातें दिमाग में आती ही नहीं थ्‌ीं‍. आज दिन भर मोबाइल, घंटों तक टीवी सीरियल और ब्यूटी पार्लर. अब लोगों के पास घर के काम और परिवार के लिए टाइम ही कहाँ बचा है?
प्रश्न : जो बेटियाँ अपने नए जीवन की शुरुआत करने जा रही हैं, या शादी के योग्य हो चुकी हैं, उन्हें आप क्या व्यक्तिगत सलाह देना चाहेंगे?
उत्तर : मेरी सभी बेटियों को एक ही सलाह है कि ससुराल और कॉलेज एक बराबर होते हैं. जैसे कॉलेज की थोड़ी- बहुत रैगिंग आप हंसकर सहन कर लेती हैं, वैसे ही ससुराल में भी शुरुआती तालमेल बिठाने के लिए थोड़ा-बहुत सहना सीखो. याद रखो, आज आप बहू हो, तो कल आपको भी सास बनना है. इसलिए समय पर शादी कर लो, अपने स्वभाव में सहनशीलता लाओ और छोटे-बड़ों का सम्मान करना सीखो.
प्रश्न : जीवन के उतार-चढ़ाव से परेशान युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर : कभी भी जीवन से हारकर आत्मघाती मत बनो. जिंदगी है, इसमें उतार-चढ़ाव आते ही रहते ह्‌ैं‍. हमेशा सोच-समझकर फैसला लो, अपने से बड़ों का आदर करो और ऊपरवाले पर वेिशास रखो. हम भौतिक चीजों के पीछे भागते-भागते रिश्तों की असली कीमत भूल गए हैं, इसे पहचानना आज के समय में बहुत जशरी है.  
 
अविवाहित, तलाकशुदा और दिव्यांग साथियों के लिए विशेष परिचय सम्मेलन

 इसी दिशा में अकेलेपन को दूर करने और एक सही जीवनसाथी की तलाश को आसान बनाने के लिए आगामी 26 जुलाई 2026, रविवार सुबह 9:00 बजे से अजंता पार्टी हॉल , गोरेगांव, मुंबई में एक विशेष परिचय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इस सम्मेलन में सभी उम्र के तलाकशुदा, विधवा, विधुर, दिव्यांग और 35 वर्ष से ऊपर के अविवाहित युवक-युवती शामिल हो सकते ह्‌ैं‍. उपयुक्त श्रेणी के इच्छुक प्रत्याशी कार्यालय के नंबरों 9699054544 / 9920646646 पर संपर्क करके अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, तथा अपना बायोडेटा infomadhursathi.com पर भेजकर या madhursathi.com पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.