एफडीए की कार्रवाई के बाद मार्केटयार्ड में गुड़ की आवक घटी

आवक आधे से भी कम, लेकिन कीमतों में मामूली ब‹ढोतरी : पुणे में ही FSSAI लैब स्थापित करने की मांग

    16-Jun-2026
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गुलटेकड़ी, (पुणे) 15 जून (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
पिछले कुछ दिनों में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एडीए) द्वारा गुड़ की गुणवत्ता को लेकर अपनाए गए कड़े रुख और ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के कारण राज्य के गुड़ बाजारों में भारी हड़कंप मच गया है. केडगांव स्थित गुड़ बनाने वाली इकाइयों (गुऱ्हाळ) पर हुई कार्रवाई के बाद अब किसान और व्यापारी दोनों जागरूक हो गए हैं. बाजार में केवल रसायन मुक्त और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित गुड़ ही बेचा जाए, इसके लिए व्यापारी संगठनों ने आग्रह किया है. केडगांव (पुणे जिला) के गुड़ बनाने वाले कारखानों (गुऱ्हाळ) पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने छापा मारकर गुड़ में अखाद्य रंग और चीनी की मिलावट का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई के बाद पूरे राज्य के गुड़ बाजार में हड़कंप मच गया. इसके तुरंत बाद, गुड़ व्यापारी संगठनों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और FSSAI मानकों के अनुसार प्रमाणित नहीं होने वाले या मिलावटयुक्त गुड़ को न खरीदने का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है. इसका असर बाजार पर भी दिखा है. कार्रवाई के बाद केडगांव, सांगली और कोल्हापुर इलाके के किसानों ने 4 से 5 दिनों तक गुड़ बनाने के कारखाने बंद रखे थे. इस वजह से पुणे बाजार में गुड़ की आवक काफी घट गई थी. पुणे के बाजार में आमतौर पर हर दिन औसतन 80 टन गुड़ की आवकहोती है. हालांकि, कार्रवाई के डर से और गुड़ के कारखाने बंद रहने के कारण, पुणे के गुलटेकड़ी मार्केटयार्ड में होने वाली गुड़ की आवक लगभग 75 प्रतिशत तक घटकर महज 15 से 20 टन पर आ गई थी. फिलहाल इसमें थोड़ा सुधार हुआ है और यह 40 से 45 टन तक पहुंच गई है. भले ही बाजार में गुड़ की आवक सामान्य से आधी रह गई है, लेकिन कीमतों में प्रति क्विंटल केवल 50 रुपये की मामूली बढ़ोतरी देखी गई है. वर्तमान में गुणवत्ता के अनुसार होलसेल बाजार में गुड़ 42 रुपये से 53 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा है. व्यापारी बताते हैं कि पहले प्राकृतिक तरीके से गुड़ तैयार किया जाता था, लेकिन रासायनिक खादों के कारण गन्ने की मिठास कम होने से चीनी का और बाद में गुड़ को पीला-सुनहरा रंग देने के लिए जलेबी के रंग का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाने लगा. जलेबी का रंग एक खाद्य रंग (फूड कलर) होने के कारण गुड़ में उसका उपयोग करना सुरक्षित है, ऐसा किसानों का भ्रम था; लेकिन FSSAI के नियमों के अनुसार गुड़ में किसी भी बाहरी रंग का उपयोग करने की सख्त मनाही है.  
 
किसानों से गुणवत्ता की रासायनिक रिपोर्ट मांग रहे

गुलटेकडी मार्केटयार्ड (पुणे) में जैगरी एसोसिएशन के 60 मुख्य होलसेल सदस्य हैं, फिर भी छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 200 से 250 व्यापारी गुड़ का व्यापार करते हैं. फिलहाल महाराष्ट्र में केवल 4 सरकारी प्रयोगशालाएं (लैब) होने के कारण रिपोर्ट मिलने में एक से दो महीने का समय लग जाता है. इसलिए गुड़ की तुरंत जांच के लिए पुणे में ही लैब शुरू करने की मांग बाजार समिति से की गई है. वर्तमान में गुड़ के होलसेल व्यापारी असमंजस में हैं और वे किसानों से गुड़ की गुणवत्ता की रासायनिक रिपोर्ट (केमिकल रिपोर्ट) मांग रहे हैं. - अजीत सेठिया, अध्यक्ष, जैगरी मर्चेंट एसोसिएशन पुणे
 
व्यापारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं
वर्तमान में पूरे महाराष्ट्र में केवल 4 सरकारी प्रयोगशालाएं हैं, जहां से गुड़ की जांच रिपोर्ट आने में आमतौर पर एक महीना लगता है, जबकि मौजूदा भीड़ को देखते हुए इसमें डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है. पुणे की निजी अधिकृत प्रयोगशालाएं 5 दिनों में रिपोर्ट दे देती हैं, लेकिन उनके शुल्क बहुत ज्यादा हैं. चूंकि गुड़ का उत्पादन छोटे बैच (200-300 किलोग्राम) में होता है, इसलिए हर बैच के लिए महंगी निजी जांच कराना आर्थिक रूप से किफायती नहीं है. इसलिए, पुणे बाजार समिति को अपने परिसर में ही उचित दरों पर त्वरित जांच रिपोर्ट देने वाली एक लैब शुरू करनी चाहिए. राज्य के 90% गुड़ उत्पादकों (गुऱ्हाळ चालकों) के पास एफडीए के लाइसेंस हैं. इसलिए, अन्न व औषधि प्रशासन को गुड़ बनाने की एक मानक संचालन प्रक्रिया पुस्तिका के रूप में जारी करनी चाहिए. लाइसेंस देते समय ही किसानों को रसायनों की सही मात्रा और नियमों को समझाकर उनका मार्गदर्शन (प्रबोधन) करना चाहिए.