बुधवार पेठ, 16 जून (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
श्रीमंत दगडूसेठ गणपति मंदिर में गणेश नामावली हवन, गणेश पुराण हवन के साथ-साथ सभी मराठी महीनों की चतुर्थी व्रत कथा और धुंडी विनायक मास यानी अधिक मास कथा हवन का आयोजन किया गया. धुंडी विनायक मास के उपलक्ष्य में मंदिर में ‘शुक्ल यजुर्वेद घन पारायण’ संपन्न हुआ. श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट और सुवर्णयुग तरुण मंडल द्वारा आयोजित ‘शुक्ल यजुर्वेद घन पारायण’ के अंतर्गत मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए. वेदमूर्ति मिलिंद राहुरकर गुरुजी के पौरोहित्य (मंत्रोच्चार व मार्गदर्शन) में हर दिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे के बीच मंदिर में पारायण एवं हवन किया गया. बताते हैं कि गाणपत्य संप्रदाय में ज्योतिष शास्त्र से संबंधित भगवान गणेश का अवतार श्री ढुंढिराज अवतार है. महाराजा दिवोदास नामक राजा के उद्धार के लिए हुआ यह एक अत्यंत दिव्य अवतार है, जिसका पूजन स्वयं भगवान श्री शंकर (शिव जी) द्वारा संपन्न हुआ था. इस अवधि में श्री गणेश मूर्ति की पूजा, श्री गणेश को दूर्वा अर्पित करना (दुर्वार्चन), गणेश ग्रंथों का पाठ (पारायण) और गणेश मंत्र जाप का विशेष महत्व है. इसी कारण मंदिर में ‘चतुर्वेद स्वाहाकार’ और उसके बाद ‘शुक्ल यजुर्वेद घन पारायण’ का आयोजन किया गया था.
भगवान ढुंढिराज के दर्शन और वंदन करने की प्राचीन परंपरा आज भी काशी क्षेत्र में भगवान श्री वेिशनाथ के मंदिर के सामने उनके द्वारा पूजित भगवान ढुंढिराज विराजमान हैं. काशी में वेिशनाथ जी के दर्शन की शुरुआत करने से पहले, भगवान ढुंढिराज के दर्शन और वंदन करने की प्राचीन परंपरा है. उनकी उपासना का अत्यंत विशेष महत्व होने के कारण, इस महीने को गाणपत्य संप्रदाय में ‘ढुंढिराज मास’ कहा जाता है.