पुणे, 17 जून (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) डॉ. शिवाजीराव कदम का व्यक्तित्व हीरे की तरह दमकता है और उनका सम्मान एक सुंदर, समृद्ध, प्रेरणादायी तथा सार्थक जीवनयात्रा का गौरव है. उनके जीवन का मूल्य, उदारता और शिक्षा क्षेत्र में दिए गए योगदान का आकलन करना आकाश की ऊंचाई मापने के समान है. शिक्षा समाज परिवर्तन का साधन है, इस उदात्त उद्देश्य से वे पूज्य डॉ. पतंगराव कदम के मार्गदर्शन में पिछले 50 वर्षों से निरंतर कार्यरत हैं. वे कुशल संगठक, प्रगतिशील नेतृत्वकर्ता, कर्मशील चिंतक, विनम्र और संयमी व्यक्तित्व के धनी हैं तथा अजातशत्रु व्यक्तित्व उनकी विशेष पहचान है. यह गौरवपूर्ण शब्द पद्मविभूषण डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने व्यक्त किए. महाराष्ट्र साहित्य कला प्रसारिणी सभा, पुणे तथा मनीषा प्रकाशन, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में भारती विद्यापीठ के कुलपति डॉ. शिवाजीराव कदम का अमृत महोत्सवी सम्मान एवं अभिनंदन पत्र प्रदान समारोह सोमवार को आयोजित किया गया. डॉ. कदम का सम्मान पद्मविभूषण डॉ. रघुनाथ माशेलकर के हाथों किया गया. इस अवसर पर वे बोल रहे थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य सहकारी बैंक के मुख्य प्रशासक विद्याधर अनास्कर ने की. समारोह का आयोजन एस.एम. जोशी सभागार में किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में सातारा की रयत शिक्षण संस्था के कार्याध्यक्ष चंद्रकांत दलवी, वरिष्ठ उद्योगपति सतीश मगर, 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष विश्वास पाटिल व विधायक वेिशजीत कदम उपस्थित थे. इस अवसर पर डॉ. शिवाजीराव कदम के जीवन पर आधारित मधुकर भावे द्वारा संपादित पुस्तक ‘ज्ञानतपस्वी’ का विमोचन मान्यवरों के हाथों किया गया. महाराष्ट्र साहित्य कला प्रसारिणी सभा, पुणे के अध्यक्ष सचिन ईटकर, सचिव रवींद्र डोमाले, उपाध्यक्ष रजनी कानडे तथा लता राजगुरु मंच पर उपस्थित थे. सम्मान स्वरूप फुले पगड़ी, शॉल, सम्मानपत्र प्रदान किया गया. डॉ. माशेलकर ने कहा कि डॉ. कदम के जीवन का 75 वर्षों का सफर वास्तविक ज्ञान और विवेक की अमूल्य संपत्ति है. सम्मान के प्रत्युत्तर में डॉ. शिवाजीराव कदम ने कहा कि आज के इस सम्मान से मैं भावविभोर हो गया हूं. जीवन की इस यात्रा में मुझे पूज्य माता-पिता और बड़े भाई डॉ. पतंगराव का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त हुआ है. शिक्षा और कार्यकुशलता के माध्यम से ही व्यक्ति जीवन में महान बनता है, यह मूल्य रयत शिक्षण संस्था ने मेरे भीतर विकसित किया है. यह दिन मेरे पांच दशकों के ज्ञानयज्ञ की तपस्या का परिणाम है. गतिशील शिक्षा के माध्यम से समाज परिवर्तन के उद्देश्य से मैं भारती विद्यापीठ के माध्यम से निरंतर कार्यरत हूं. अध्यक्षीय भाषण में विद्याधर अनास्कर ने कहा कि डॉ. शिवाजीराव कदम का सम्मान गुरु तुल्य व्यक्तित्व का ऋषि तुल्य व्यक्तित्व के हाथों होने वाला गौरव है. इस अवसर पर चंद्रकांत दलवी, वेिशास पाटिल, सतीश मगर तथा डॉ. वेिशजीत कदम ने भी अपने विचार व्यक्त किए.