सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन (एसआईएफएफ) ने देश में भरण-पाेषण और गुजारा भत्ता संबंधी कानूनाें में व्यापक सुधार की मांग करते हुए ‘एलिमनी गाेपाल’ अभियान शुरू किया है. संगठन का कहना है कि पारिवारिक कानूनाें में निष्पक्षता, जवाबदेही और लिंग-तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जनसंवाद की आवश्यकता है.संगठन के अनुसार, भरण-पाेषण और गुजारा भत्ता निर्धारित करते समय केवल भावनात्मक या एकतरफा आधार नहींबल्कि आय, संपत्ति, देनदारियां, कमाने की क्षमता, विवाह की अवधि, पक्षकाराें के आचरण तथा वास्तविक आर्थिक निर्भरता का समुचित मूल्यांकन किया जाना चाहिए.एसआईएफएफ का मानना है कि शिक्षित और राेजगार प्राप्त करने में सक्षम जीवनसाथियाें काे आत्मनिर्भर बनने के लिए प्राेत्साहित किया जाना चाहिए.
संगठन का कहना है कि भरण-पाेषण का उद्देश्य वास्तविक रूप से आश्रित व्यक्ति काे अस्थायी सहायता प्रदान करना हाेना चाहिए, न कि इसे आजीवन अधिकार के रूप में स्थापित किया जाए.संगठन ने अवधि-आधारित भरण-पाेषण व्यवस्था की भी वकालत की है, जिसके तहत प्रत्येक मामले की परिस्थितियाें के अनुसार निश्चित समय तक सहायता प्रदान की जाए.