नई दिल्ली, 18 जून (वि.प्र.) सरकारी बैंक अमीराें पर मेहरबान, आम लाेगाें काे करते परेशान. यह टिप्पणी गुरुवार काे सुप्रीम काेर्ट ने किया. काेर्ट ने बैंक लाेन देने के तरीकाें पर देशभर के बैंकाें काे कड़ी फटकार लगाई. काेर्ट ने कहा-बैंकाें की लाेन देने की प्रक्रिया सवालाें के घेरे मेें हैं. उद्याेगपतियाें काे अरबाें का लाेन बांट देते हैं, वे प्रायः उसे डुबा भी देते हैं, जबकि कार्रवाई के नाम पर लीपापाेती चलती रहती है. बेचारा आम आदमी छाेटे से लाेन के लिए च्नकर काटता रहता है. विस्तार से प्राप्त खबराें के अनुसार सुप्रीम काेर्ट ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई समेत अन्य बैंकाें की कार्यप्रणाली पर बेहद तीखी टिप्पणी की है. काेर्ट ने कहा कि बैंक आम जनता काे छाेटा लाेन देने के नाम पर उनका ‘उत्पीड़न’ करते हैं, जबकि बड़े-बड़े उद्याेगपतियाें और कंपनियाें काे बिना साेचे-समझे कराेड़ाें- अरबाें का लाेन बांट देते हैं, जाे बाद में डूब जाता है.
मामले में सुनवाई के दाैरान न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायाधीश आर महादेवन की बेंच ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में एक बहुत ही चिंताजनक ट्रेंड देखने काे मिल रहा है. आम आदमी काे अपनी निजी जरूरताें के लिए छाेटा लाेन लेने में नाकाे चने चबाने पड़ते हैं, जबकि बड़े लाेन बिना किसी सही जांच-पड़ताल के पास कर दिए जाते हैं. बता दें कि यह पूरा मामला हरियाणा की एक कंपनी से जुड़ा है, जिसने साल 2019 में एसबीआई से 8.09 कराेड़ रुपये का लाेन लिया था. लाेन मिलते ही कंपनी ने एक भी किस्त वापस नहीं की और कुछ ही महीनाें में उसका खाता एनपीए घाेषित हाे गया. अब 6 साल बाद कंपनी काेर्ट आकर कह रही थी कि वह सिर्फ मूल रकम चुकाने काे तैयार है.
काेर्ट ने कंपनी की इस मांग काे बहुत कम और बहुत देर से आई बताते हुए खारिज कर दिया. अदालत ने बैंक काे कंपनी की संपत्ति जब्त करने की छूट दे दी, लेकिन साथ ही बैंक के अधिकारियाें काे भी कटघरे में खड़ा किया.
सख्त टिप्पणी के बाद सर्वाेच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यह बात अदालत के संज्ञान में आ रही है कि एसबीआई समेत सभी बैंक बड़ी कंपनियाें काे भारी-भरकम लाेन देने में बेहद लापरवाही बरतते हैं. इसके उलट, जब काेई आम इंसान अपनी निजी जरूरताें के लिए छाेटा लाेन लेने आता है, ताे उसके सामने कड़े नियम और थका देने वाली प्रक्रिया रख दी जाती है, जाे कई मामलाें में उत्पीड़न जैसा हाेता है.