मैनपॉवर की कमी, अधिक वेतन की मांग जैसे मुद्दे अनसुलझे

स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन, पुणे के महासचिव राजेश मुले ने चंद्रशेखर पटवर्धन से बातचीत में कहा

    02-Jun-2026
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स्टेट बैंक कर्मचारियों की हड़ताल टल चुकी है, फिर भी बैंक कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे अभी तक सुलझ नहीं पाए हैं. तकनीक के कारण रोजगार पर पाबंदियां आ रही हैं. ऐसे में देश के सबसे बड़े बैंक के कर्मचारी संगठन के नेता राजेश मुले के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश.... राजेश मुले महासचिव, स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन पुणे मोबाइल- 9518398382
पांच दिवसीय बैंकिंग का बैंकिंग क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
पांच दिवसीय बैंकिंग से न केवल कर्मचारियों को बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक लाभ हो सकता है. आधुनिक युग में डिजिटल बैंकिंग के कारण अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हो गई हैं. इसलिए ग्राहकों की सेवा में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न नहीं होगी. शनिवार को बैंक बंद रहने से ईंधन, बिजली और अन्य संसाधनों की बचत होगी. इससे पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से भी सकारात्मक परिणाम दिखाई दे सकते हैं. इसके साथ ही कर्मचारियों को परिवार के लिए समय मिलेगा, मानसिक तनाव कम होगा और कामकाज में उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी. ग्राहक धीरे-धीरे अधिक से अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ेंगे, यह भी समय की मांग है.
 
 स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन का कार्यक्षेत्र क्या है?
उत्तर: स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन भारतीय स्टेट बैंक में कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण के लिए काम करने वाला एक प्रभावी श्रमिक संगठन (यूनियन) है. महाराष्ट्र सर्कल इस संगठन का मुख्य कार्यक्षेत्र है, और इस संगठन की स्थापना साल 1967 में नागपुर में की गई थी. स्थापना से लेकर आज तक संगठन कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं पर लगातार फॉलोअप कर रहा है. स्टेट बैंक महाराष्ट्र सर्कल में 5000 कर्मचारी हैं, जिनमें 1000 गार्ड और 350 मैसेंजर कर्मचारी हैं. ?
वर्तमान में बैंक कर्मचारियों के सामने कौन सी मुख्य समस्याएं हैं?
उत्तर: वर्तमान में बैंक कर्मचारियों के लिए पांच दिवसीय बैंकिंग एक बहुत ही आत्मीय और महत्वपूर्ण विषय बन गया है. इसी के साथ बैंकों के मुनाफे के अनुसार कर्मचारियों और अधिकारियों को दिए जाने वाले पी.एल.आई. (झशीषेीारपलश ङळपज्ञशव खपलशपींर्ळींश) में बड़ा अंतर (विषमता), शाखाओं में मनुष्यबल की कमी, बढ़ता काम का तनाव, वरिष्ठों द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न टारगेट्स का दबाव, साथ ही गार्ड और क्लेरिकल कर्मचारियों के तबादले (ट्रांसफर) की समस्याएं जैसी कई दिक्कतों का सामना कर्मचारियों को करना पड़ रहा है. इन सभी समस्याओं के कारण कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कामकाज की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है, और संगठन इसे गंभीरता से देख रहा है.
 संगठन ने अब तक कौन से विषयों को प्रभावी ढंग से हाथ में लिया है?
उत्तर: स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन ने कर्मचारियों के हित के कई विषयों को प्रबंधन (मैनेजमेंट) के सामने प्रभावी ढंग से रखा है. इसमें गार्ड भर्ती का मुद्दा, इंटर- मॉड्यूल ट्रांसफर की प्रक्रिया, कर्मचारियों को ऑनलाइन तरीके से यूनियन सदस्यता चुनने का अधिकार, गार्ड और मैसेंजर कर्मचारियों को डेंटल उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना, साथ ही कर्मचारियों को फर्नीचर अलाउंस दिलवाना जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं. संगठन केवल समस्याओं को उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका सकारात्मक समाधान निकले इसके लिए लगातार प्रयास करता रहता है. 
 25 और 26 मई को प्रस्तावित हड़ताल का आपके संगठन ने विरोध क्यों किया?
 उत्तर: इस हड़ताल का विरोध करने के पीछे हमारी भूमिका स्पष्ट और सिद्धांतवादी थी. हड़ताल में जो मांगें रखी गई थीं, उनके संदर्भ में संबंधित संगठनों ने पहले ही प्रबंधन के साथ समझौते किए हुए थे. इसलिए कर्मचारियों के सामने फिर से उन्हीं मुद्दों पर आंदोलन खड़ा करना गुमराह करने वाली बात लगी. स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन श्रमिकों के न्यायसंगत अधिकारों के लिए हमेशा संघर्ष करने को तैयार है; लेकिन केवल दिखावे के आंदोलन या राजनीतिक रुख अपनाने के बजाय वास्तविकता पर आधारित रुख अपनाना हम महत्वपूर्ण मानते हैं. इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण और वाजिब मांगें हड़ताल में शामिल नहीं की गई थीं. आउटसोर्सिंग के विषय पर भी पहले कुछ संगठनों ने प्रबंधन के साथ समझौता करके उसे मंजूरी दी थी; लेकिन उन्हीं संगठनों द्वारा आज इसके खिलाफ रुख अपनाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में भ्रम पैदा हो रहा है. इस दोहरे रुख का हमारा विरोध था. 
 ग्राहक सेवा को और अधिक सक्षम बनाने के लिए कौन से उपाय आवश्यक हैं?
उत्तर: ग्राहक सेवा को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल बैंकिंग का व्यापक उपयोग बहुत आवश्यक है. स्टेट बैंक ने ग्राहकों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली कई सुविधाएं तैयार की हैं. कैश डिपॉजिट मशीन, एटीएम सेवा, पासबुक प्रिंटिंग मशीन, चेक क्लीयरिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं अब ग्राहकों को अधिक आसानी से उपलब्ध हो रही हैं. स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन ग्राहकों के बीच डिजिटल बैंकिंग को लेकर जागरूकता पैदा कर रहा है, और ग्राहक आधुनिक तकनीक का आत्मवेिशास से उपयोग करें इसके लिए कर्मचारी लगातार मार्गदर्शन कर रहे हैं. 
अंत में बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को क्या संदेश देंगे?
उत्तर: बैंक कर्मचारी देश की आर्थिक व्यवस्था का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. बदलते समय के अनुसार तकनीक को अपनाते हुए कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच का वेिशास और मजबूत होना आवश्यक है. स्टेट बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन कर्मचारी हित, ग्राहक सेवा और बैंक की प्रगति, इन तीनों बातों में संतुलन बनाए रखते हुए सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है. हम संघर्ष के बजाय संवाद और समन्वय को अधिक महत्व देते हैं, और कर्मचारियों के न्यायसंगत अधिकारों के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे.