दामों में उतार-चढ़ाव से सर्राफा बाजार में अजीब सी बेचैनी

दाम और कम होने की उम्मीद में ग्राहक रुके टर्नओवर पर असर पड़ने से व्यापारी परेशान पिछले दो महीनों से खरीद-बिक्री घटी

    20-Jun-2026
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लक्ष्मी रोड, 19 जून (आ.प्र.)

सोने-चांदी की कीमतों में लगातार हो रहे भारी उतार-चढ़ाव के कारण इस समय सर्राफा बाजार में एक अजीब सी बेचैनी है. एक तो पिछले डेढ़-दो महीनों से ग्राहक कम हैं, जिससे खरीद-बिक्री घट गयी है. ऊपर से कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव होने के कारण ग्राहक असमंजस में हैं और व्यापारी परेशान, ऐसी स्थिति बनी हुई है. महज चार महीने पहले सोने की कीमत करीब पौने दो लाख रुपये तक पहुंच गई थी. वही सोना जहां शुक्रवार (19 जून) को घटकर 1 लाख 44 हजार 700 रुपये तक नीचे आ गया. वहीं, चांदी की कीमतें भी तीन लाख रुपये से गिरकर 2 लाख 35 हजार रुपये के आसपास पहुंच गई हैं. पुणे में रिटेल काउंटर पर बिना जीएसटी के यही रेट शुक्रवार को देखने मिले. बता दें कि केंद्र सरकार ने 13 मई को सोने और चांदी पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था, तब से दाम तो बढ़े ही थे, लेकिन उनमें भी लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है. महज पंद्रह दिनों के भीतर (4 जून से 19 जून 2026) सोने के दाम में लगभग 11 हजार रुपये की गिरावट आई है. वहीं, चांदी की चमक भी प्रति किलो पूरे 18 हजार रुपये फीकी पड़ गई है. दुकानदारों का अनुमान है कि अब अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) खत्म हो चुका है. जिससे शादियों के मुहूर्त शुरु होंगे. इस सीजन की खरीदारी के लिए ग्राहक सर्राफा बाजार का रुख करेंगे.  
 
ग्राहक अब बड़े उतार-चढ़ाव के आदी हो चुके हैं
मार्केट वोलेटाइल (अस्थिर) होने के कारण व्यापारियों को परेशानी होती है, यानी रोजाना हमें जो खरीद- बिक्री की दिक्कत होती है, वह तो रहेगी ही. ऐसी स्थिति में हमें अपनी इन्वेंट्री (स्टॉक) तो रोज के रोज मेंटेन रखनी ही पड़ती है. मान लीजिए अगर हमने 100 ग्राम बेचा, तो 100 ग्राम हमें तुरंत खरीदना ही पड़ता है. हर बार रेट ऊपर-नीचे होने की वजह से ग्राहकों को थोड़ा लगता है कि अरे, क्या यह और कम होगा, या ज्यादा होगा? लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में मार्केट को थोड़े अच्छे तरीके से गति मिली है. मुझे लगता है कि आने वाले समय में ग्राहकों की भारी भीड़ शुरू हो जाएगी. उसके पीछे कारण यह है कि अब युद्धविराम हो गया है, जिससे दामों में स्थिरता आएगी. साथ ही शादियों का सीजन शुरु होगा, इस वजह से ग्राहकों का झुकाव खरीदारी की तरफ सबसे ज्यादा बढ़ेगा. दामों में बड़े उतार-चढ़ाव के ग्राहक अब आदी (यूज टू) हो चुके हैं. लगभग 5,000 या 10,000 रुपये का अंतर उन्हें बहुत बड़ा नहीं लगता. क्योंकि, ऐसी स्थिति पहले भी उन्होंने देखी है. ग्राहकों ने 10 ग्राम सोने के लिए 1,80,000 रुपये का भाव भी देखा हुआ है. इसलिए अब 1,40,000 या 1,50,000 रुपये का भाव उन्हें खरीदारी के लिए सही लगता है. ग्राहकों को अब यह समझ आ गया है कि दाम कम होते ही हमें खरीदारी कर लेनी चाहिए. इसी वजह से अभी कम हुए दामों में ग्राहकों का रुख खरीदारी के रास्ते पर बढ़ गया है. - विपुल अष्टेकर, मे. कृष्णा राजाराम अष्टेकर ज्वेलर्स  
 

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  उतार-चढ़ाव के चलते खरीदारी हो रही प्रभावित
मुख्य कारण यह है कि युद्ध रुक गया है. जियोपॉि लटिकल स्ट्रेस (भू-राजनीतिक तनाव) कम हुआ है और इसीलिए लोग सोना होल्ड नहीं कर रहे हैं. बाजार में एक अच्छा करेक्शन आया था,जिसमें निवेशकों ने प्रॉफिट बुक किया. अब मार्केट्स आदि में सुधार होने वाला है, इसलिए सोना थोड़ा कमजोरी पर रहेगा. दूसरा कारण यह है कि भारत और चीन में मांग भी कमजोर है. काफी समय से वहां की खपत भी रुकी हुई है, क्योंकि दरों में इतना उतार-चढ़ाव है कि लोग तुरंत खरीदारी नहीं कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को प्रतिसाद देते हुए भारत के कई ग्राहकों ने कुछ समय के लिए खरीदारी रोक दी है. एक और कारण यह है कि कई लोगों ने दरें उच्च स्तर यानी 1,52,000 रुपये - 1,53,000 रुपये के दौरान प्रॉफिट बुकिंग की और बाजार से बाहर निकल गए. इस वजह से भी सोने की दरों में करेक्शन हुआ है. इसके अलावा, अमेरिकी ब्याज दरें ऊंचे बने हुए हैं और यूएस डॉलर भी मजबूत हुआ है. इस कारण से भी सोना और चांदी थोड़े लेस अट्रैक्टिव एसेट (कम आकर्षक संपत्ति) बन गए हैं.चांदी की तो यह विशेषता ही है कि वह जिस रफ्तार से बढ़ती है, उसी रफ्तार से वापस टूटती (गिरती) भी है. जब दरें इस तरह से अचानक घटती हैं, तो ग्राहक तब तक बाजार में आना बंद कर देते हैं जब तक कि दरें स्थिर नहीं हो जातीं. - वास्तुपाल रांका, निदेशक, रांका ज्वेलर्स, कर्वे रोड
 
 
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  कुल मिलाकर बाजार के ‌‘फंडामेंटल‌’ अच्छे ही हैं
 अगर रेट कम हो रहे हैं तो इन रेटों का फायदा उठाना चाहिए. रेट ऊपर में चांदी 4 लाख बिकी हुई है, सोना जो है 1 लाख 80-90 हजार तक बिका हुआ है, इन फ्यूचर दोनों में तेजी आएगी. आगे दिवाली का सीजन आ रहा है. कुल मिलाकर बाजार के फंडामेंटल अच्छे ही जा रहे हैं. युद्ध का समझौता हो गया है तो भी हालात अच्छे होंगे, बिजनेस अच्छा होगा. ग्राहकों को और सोचना या रुकना नहीं चाहिए, खरीदना चाहिए. क्योंकि कभी भी रेट वापस बढ़ सकता है. मैं तो कह रहा हूं असमंजस है ही नहीं है, बस खरीदारी करते रहो. क्योंकि युद्ध में शांती का समझौता हो गया है. कुछ समय से सबको दिक्कत आ रही थी लेकिन सब देशों का अच्छा होगा. फिलहाल कुछ रेट कम हुए हैं लेकिन वापस रेट सुधरेंगे, हालात अच्छे होंगे, दिवाली आएगी, शादी का सीजन आएगा आगे. तो मुझे लगता है कि पॉजिटिव साइन है, इसमें खरीदी करनी चाहिए. फायदा लेना चाहिए और लोग खरीद भी रहे हैं. - दिलबाग सिंह बीर, निदेशक, नीलकंठ ज्वेलस
 
 
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  वैेिशक गतिविधियों का असर मार्केट पर पड़ रहा
एक-डेढ़ वर्ष में वैेिशक स्तर पर हो रही गतिविधियों का असर पूरे मार्केट पर पड़ रहा है. पिछले कुछ दिनों में रेट बहुत ज्यादा अस्थिर रहा है, जिसका सीधा असर हमारे बाजार पर हो रहा है. इसका कारण यह है कि यदि रेट बढ़ने लगता है, तो ग्राहक खरीदारी रोककर इंतजार करने लगते हैं. यदि रेट कम होने लगते हैं, तो ग्राहकों को लगता है कि रेट अभी और कम होगा, इसलिए वे तब भी रुक जाते हैं. इससे मार्केट का बहुत नुकसान होता है. अनुभव यही है कि अगर रेट स्थिर हो जाए, तो ग्राहक बाजार में जरूर आते हैं. अगर ग्राहक कम हो जाएं, तो हमारे बिजनेस पर उसका असर पड़ता ही है. व्यापार की दृष्टि से टर्नओवर और निवेश पर भी इसका असर होता है. रेट में इतनी अस्थिरता के बीच हमें कितना स्टॉक रखना चाहिए और कितना निवेश करना चाहिए, इसका अंदाजा लगाना भी बहुत जरूरी होता है, नहीं तो इसके सारे गणित बिगड़ सकते हैं. अगर ग्राहक न हों और ऑर्डर न मिल रहे हों, तो कारीगरों पर भी इसका असर पड़ता है. यह एक बहुत बड़ा साइकिल है, जिसमें हर किसी को परेशानी उठानी पड़ती है. ग्राहक फिलहाल गहनों की तुलना में वेढणी (सोने की पट्टी/गिल्ट), चिप और सिक्कों, कॉइन्स की खरीदारी पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. आजकल वैसे भी गहनों का सीजन नहीं है. इसलिए लोग गहनों से ज्यादा निवेश पर ध्यान दे रहे हैं. - अभय गाडगिल, उपाध्यक्ष, पुणे सर्राफ एसोसिएशन
 
 
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बड़ी रेंज रखना हमारे लिए मुश्किल हो गया है
भावों में उतार-चढ़ाव इस बिजनेस का एक हिस्सा (पार्ट एंड पार्सल) है. व्यापारियों को निश्चित रूप से इस बात की परेशानी होती है कि मान लीजिए किसी ग्राहक का डेढ़ लाख रुपये का कोई ऑर्डर है, और चार दिनों के बाद सोने का भाव मान लीजिए 1 लाख 40 हजार रुपये हो जाता है, तो ग्राहक ऑर्डर कैंसिल करने आ जाते हैं. इससे बेवजह विवाद पैदा होता है. इसके विपरीत, अगर सोने का भाव बढ़ जाता है, तो लोग खुशी-खुशी खरीदारी करते हैं. यह एकमात्र ऐसी कमोडिटी है, जिससे लोग खुश भी होते हैं और दुखी भी होते हैं. एक व्यापारी के रूप में, भावों के इस उतार-चढ़ाव के कारण हमारा निवेश बढ़ गया है. पहले के समय में हमारे लिए दुकान में ज्यादा रेंज रखना आसान होता था. लेकिन, अब उतनी बड़ी रेंज रखना हमारे लिए मुश्किल हो गया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे ट्रेड में जो छोटे ज्वेलर्स हैं, जो कम पूंजी में काम करते हैं, उन्हें इसका बहुत बड़ा झटका लग रहा है. हमारी कई दुकानें अब बंद होने की कगार पर आ गई हैं, क्योंकि अब उनमें बहुत ज्यादा आभूषण स्टॉक में रखने की क्षमता ही नहीं बची है. 25 साल या 50 साल पहले ये आभूषण सिर्फ ऑर्डर देकर बनवाए जाते थे. लेकिन, जब से रेडीमेड आभूषणों का ट्रेंड आया है, तब से अगर ऐसे आभूषण तैयार रखे जाएं, तभी ग्राहक आपके पास आते हैं. यह हमारी इंडस्ट्री में एक नई ही समस्या पैदा हो गई है. - राजेश रोकडे, अध्यक्ष, ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल
 

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अधिक मास समाप्त और शादी का सीजन शुरू
 धीरे-धीरे कीमतें स्थिरता की ओर बढ़ेंगी और युद्धविराम होने के बाद ग्राहकों को यह अहसास होगा कि अब सोने के दाम बढ़ने शुरू होंगे, इसलिए लोग खरीदारी करेंगे. अधिक मास में शादी-ब्याह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं होते हैं. अधिक मास समाप्त होने के कारण अब शादी के मुहूर्त शुरू हो रहे हैं, जिससे ग्राहकों का रुझान अब बढ़ने लगा है. ग्राहकों को ऐसा लग रहा है कि यदि वे अभी के रेट पर खरीदारी नहीं कर पाए, तो शायद अगले साल उन्हें दो लाख रुपये के रेट से सोना खरीदना पड़ेगा. वह काफी महंगा साबित होगा, इसलिए उससे बेहतर है कि अभी घटे हुए दामों पर ही खरीदारी कर ली जाए. कोविड के समय में पहले व्यापार पूरी तरह ठप हो गया था और बाद में रिवेंज बाइंग (तेजी से खरीदारी) देखने को मिली थी. दोबारा भी ऐसा ही होने की उम्मीद है. क्योंकि, पिछले तीन-चार वर्षों में जिस तेजी से रेट बढ़े हैं, उसकी वजह से लोगों का सोने के प्रति आकर्षण और ज्यादा बढ़ गया है.