पुणे मनपा द्वारा धार्मिक स्थलाें पर की जा रही कार्रवाई काे चयनात्मक बताते हुए विभिन्न धर्माें और विभिन्न राजनीतिक दलाें के प्रतिनिधियाें के एक शिष्टमंडल ने मनपा प्रशासन काे 16 दिनाें का अल्टीमेटम दिया है. जारी कार्रवाई काे तत्काल राेककर धार्मिक स्थलाें के संबंध में पारदर्शी और समान नीति घाेषित करने की मांग प्रतिनिधि मंडल ने की है.नेशनल काॅन्फ्रेंस फाॅर माइनाॅरिटी के नेतृत्व वाले इस शिष्टमंडल ने शुक्रवार काे अतिरिक्त आयुक्त प्रजीत नायर से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन साैंपा. धार्मिक स्थलाें पर कार्रवाई एकतरफा तरीके से की जा रही है और इससे पुणे के सामाजिक तथा धार्मिक साैहार्द पर असर पड़ सकता है, ऐसी चिंता इस दाैरान व्यक्त की गई. इसके बाद जानकारी देते हुए नेशनल काॅन्फ्रेंस फाॅर माइनाॅरिटी के अध्यक्ष राहुल डंबाले ने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकाें काे कानून के समक्ष समानता और धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है. इसलिए किसी भी प्रकार के भेदभाव की भावना उत्पन्न हाेने पर सामाजिक तनाव बढ़ सकता है.
धार्मिक स्थलाें के संबंध में कार्रवाई करने के लिए कानूनी प्रावधान और शासन के दिशा-निर्देश माैजूद हैं, लेकिन उनका पालन सभी समाजाें पर समान और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए, यह भी उन्हाेंने कहा.इस बैठक में अंजुम इनामदार, रफीक शेख, काशिफ सैय्यद, कारी इदरीस, अजहर मनियार, माेहसिन शेख, मुनाफ शेख, कारी मुबश्शीर इगमद, शमशाद अहमद और ताैसिफ मलिक सहित विभिन्न समाजाें के नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे. मनपा प्रशासन की ओर से 16 दिनाें के भीतर संताेषजनक जवाब नहीं मिलने पर अल्पसंख्यक संगठन और सहयाेगी समूह लाेकतांत्रिक तथा संवैधानिक तरीके से आंदाेलन शुरू करेंगे, ऐसी चेतावनी भी शिष्टमंडल ने दी. इस बीच, कथित अतिक्रमणाें और अनाधिकृत धार्मिक स्थलाें पर मनपा की कार्रवाई की पृष्ठभूमि में पुणे में एक बार फिर चर्चा शुरू हाे गई है. कानून का पालन करते समय शहर के लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक साैहार्द काे बनाए रखने की आवश्यकता है, ऐसी राय विभिन्न समाजाें की ओर से व्यक्त की जा रही है.