पुणे शहर की सीवेज प्रबंधन व्यवस्था में एक गंभीर खामी सामने आई है.शहर की निजी हाउसिंग साेसायटियाें में स्थापित 436 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटाें (एसटीपी) में से कितने प्लांट चालू हैं, कितने बंद हैं या कितने स्थानाें पर बिना उपचार के गंदे पानी काे सीधे पर्यावरण में छाेड़ा जा रहा है, इसकी काेई आधिकारिक जानकारी पुणे मनपा के पास नहीं है, यह खुलासा हुआ है.नगरसेवक सुनील पांडे द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में मनपा के सीवेज विभाग ने इस बात काे स्वीकार किया.इसके चलते पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस व्यवस्था पर मनपा का काेई प्रभावी नियंत्रण नहीं हाेने की आलाेचना की जा रही है. माैजूदा नियमाें के अनुसार 100 से अधिक फ्लैट वाले आवासीय प्रकल्पाें में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करना अनिवार्य है.
बिल्डराें के लिए इन प्लांटाें काे स्थापित करना जरूरी हाेता है, जबकि प्रकल्प का कब्जा साेसायटी काे मिलने के बाद उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी साेसायटी की हाेती है.हालांकि निर्माण की अनुमति देते समय एसटीपी स्थापित करना अनिवार्य करने वाली मनपा द्वारा बाद में यह जांच नहीं की जाती कि ये प्लांट वास्तव में चालूहैं या नहीं, यह बात सामने आई है.मनपा के आंकड़ाें के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के दाैरान शहर के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयाें के माध्यम से 40 केएलडी से 500 केएलडी क्षमता वाले 436 निजी एसटीपी काे मंजूरी दी गई है. लेकिन इनमें से कितने प्रकल्प चालू हैं और कितने बंद हैं, इसकी काेई जानकारी सीवेज विभाग के पास उपलब्ध नहीं है, ऐसी जानकारी अधिकारियाें ने दी. इस खुलासे के बाद बिना उपचार के गंदे पानी काे नालाें, नदियाें और प्राकृतिक जलस्राेताें में सीधे छाेड़े जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है और पर्यावरण प्रेमियाें तथा विशेषज्ञाें ने चिंता जताई है.